क्या आपको शाहिद आज़मी याद हैं?

 रविवार, 30 सितंबर, 2012 को 12:11 IST तक के समाचार
शाहिद फिल्म का दृश्य

शाहिद फिल्म रिलीज़ होने की तारीख़ अभी बताई नहीं गई है

क्या आपको क्लिक करें शाहिद आज़मी का नाम याद है, वही वकील जिन्होंने मुंबई हमलों के तीन मुख्य अभियुक्तों में से एक भारतीय नागरिक क्लिक करें फहीम अंसारी की पैरवी की थी.

शाहिद आज़मी की फरवरी 2010 में मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. एक समय ऐसा भी था जब शाहिद को भारत के चरमपंथ-निरोधी कानूनों के तहत हिरासत में लिया गया था और इसके बाद उन्होंने वकालत को अपना पेशा बना लिया था.

इसी व्यक्ति को केंद्र में रखकर एक फिल्म बनाई गई है जिसका नाम है 'शाहिद' जिसने टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में सुर्खियां बटोरी.

फिल्म में दो चरमपंथी घटनाओं से जुड़े अदालती मामलों को दिखाया गया. ये मामले वर्ष 2006 में मुंबई में लोकल ट्रेनों में हुए धमाकों और साल 2008 में मुंबई पर हुए चरमपंथी हमलों से जुड़े हैं.

फिल्म के निर्देशक हंसल मेहता हैं और इसके निर्माताओं में अनुराग कश्यप का नाम भी शुमार है जिनकी वर्ष 2007 में आई फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' लगभग दो वर्ष तक रिलीज़ नहीं हो पाई थी क्योंकि इसकी पटकथा में मुंबई में वर्ष 1993 में सिलसिलेवार हुए धमाकों का ज़िक्र था.

अदालत ने जिन लोगों की याचिका पर 'ब्लैक फ्राइडे' को रिलीज़ करने पर रोक लगाई थी, उनकी पैरवी किसी और नहीं बल्कि युवा वकील शाहिद आज़मी ने ही की थी. याचिका में कहा गया था कि इस फिल्म के रिलीज़ होने से मुंबई धमाकों की सुनवाई पर असर पड़ सकता है.

अंडरवर्ल्ड से रिश्तों की कीमत

शाहिद आज़मी

शाहिद आजमी का किरदार अभिनेता राज कुमार यादव अदा कर रहे हैं

फिल्म समीक्षक सैबल चटर्जी ने 'शाहिद' फिल्म के निर्देशक हंसल मेहता से इस फिल्म के बारे में बात की. हंसल मेहता ने बताया कि ये एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो उम्मीद की किरण के समान है.

वे कहते हैं, ''शाहिद आजमी नीचे से उठे व्यक्ति थे जो उम्मीद के प्रतीक थे, लेकिन उन लोगों ने शाहिद की हत्या करा दी जिन्हें मुंबई हमलों के अभियुक्त फहीम अंसारी की पैरवी करना पसंद नहीं आया.''

फिल्म में इस बात का खासतौर पर ज़िक्र किया गया है कि शाहिद आज़मी ने अपने सात साल के करियर में 17 लोगों को अदालत से बरी कराया था.

हंसल मेहता बताते हैं, ''शाहिद आज़मी ने जितनी भी याचिकाएं दाखिल की थी, मैंने उन सभी का अध्ययन किया और कहानी में नाटकीयता के साथ स्पष्टता लाने के लिए ज्यादातर को आपस में मिला दिया.''

शाहिद आज़मी की हत्या के बाद मीडिया में आई कुछ खबरों में कहा गया था कि शाहिद को अंडरवर्ल्ड से रिश्तों की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी.

हंसल मेहता कहते हैं, ''ये बात पूरी तरह से निराधार है और दुखी करने वाली है. शाहिद अपनी कहानी बताने के लिए जिंदा नहीं है, इसलिए मैंने तय किया कि मैं ही उनकी कहानी सामने लाऊंगा.''

'याद रहेगा शाहिद का किरदार'

फिल्म में शाहिद का क़िरदार अभिनेता राज कुमार यादव ने निभाया है. फिल्म के एक दृश्य में दिखाया गया है कि हमलावरों ने अदालत के बाहर उनके मुंह पर कालिख पोत दी है.

"शाहिद आजमी नीचे से उठे व्यक्ति थे जो उम्मीद के प्रतीक थे, लेकिन उन लोगों ने शाहिद की हत्या करा दी जिन्हें मुंबई हमलों के अभियुक्त फहीम अंसारी की पैरवी करना पसंद नहीं आया"

हंसल मेहता

हंसल मेहता बताते हैं कि ऐसी ही घटना उनके साथ भी हो चुकी है.

साल 2010 की बात है जब शिवसेना के नेतृत्व में भीड़ ने हंसल मेहता के दफ्तर पर धावा बोला था. वजह थी उनकी फिल्म 'दिल पर मत ले यार' जिसमें मुंबई में रहने वाले प्रवासियों की दशा दिखाई गई थी.

'शाहिद' फिल्म को लेकर भी उन्हें धमकियां मिली हैं लेकिन उन्हें भरोसा है कि फिल्म के सह-निर्माता अनुराग कश्यप के साथ वे इसे आम लोगों तक पहुंचाने में क़ामयाब होंगे.

कम बजट की फिल्म 'शाहिद' को बड़े गोपनीय तरीके से फिल्माया गया है. फिल्म रिलीज़ होने की तारीख़ भी अभी नहीं बताई गई है.

हंसल मेहता बताते हैं कि शाहिद आज़मी ने अपना माज़ी कभी किसी से छिपाना नहीं चाहा जिसमें पाक प्रशासित कश्मीर में बने चरमपंथियों के प्रशिक्षण शिविर में कुछ समय बिताना भी शामिल है.

भारत के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में शाहिद आज़मी ने दिल्ली की तिहाड़ जेल में सात साल भी काटे थे. लेकिन उनके खिलाफ लगे आरोप कभी साबित नहीं हो पाए, वे आज़ाद हो गए और इसके बाद उन लोगों की आवाज़ बने जो उनकी तरह आरोपों के शिकार हुए थे.

फिल्म का तानाबाना इसी कहानी के इर्द-गिर्द बुना गया है. शाहिद आजमी का किरदार अदा कर रहे राज कुमार यादव को दर्शक 'लव सेक्स और धोखा', 'रागिनी एमएमएस', और 'शैतान' जैसी फिल्मों में देख चुके हैं.

राज कुमार यादव के अभिनय पर हंसल मेहता कहते हैं, ''जब आप राज कुमार को देखेंगे तो आप उन्हें नहीं उनके क़िरदार को याद रखेंगे. शाहिद आज़मी के किरदार के लिए मुझे राज कुमार जैसे अभिनेता की ही तलाश थी.''

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