जब एक फ़िल्म बदल दे क़िस्मत

 शनिवार, 6 अक्तूबर, 2012 को 08:18 IST तक के समाचार
गैंग्स ऑफ वासेपुर

नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी 15 सालों से फ़िल्म इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे थे. उनके हिस्से छोटे-मोटे रोल ज़रूर आ रहे थे, लेकिन वो अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्षरत थे. लेकिन अनुराग कश्यप की फ़िल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' ने जैसे सब कुछ बदल कर रख दिया.

इसके बाद नवाज़ुद्दीन के पास डेढ़ सौ से भी ज्यादा स्क्रिप्ट आए. अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने दिबाकर बनर्जी की फ़िल्म 'ओए लकी लकी ओए' में एक छोटा सा रोल ज़रूर किया था, लेकिन गैंग्स की कामयाबी के बाद उनके फ़िल्मी करियर में भी जैसे बहार आ गई.

वो अब तमंचे, फुकरे और संजय लीला भंसाली की राम लीला सरीखी फ़िल्में कर रही हैं.

यही हाल अभिनेता आयुष्मान खुराना का है. टीवी और रेडियो से जुड़े आयुष्मान के जीवन में फ़िल्म 'विकी डोनर' ने ज़बरदस्त बदलाव लाया.

फ़िल्म की कामयाबी के बाद उनके पास ऑफ़र्स की क़तार लग गई और फ़िल्मी दुनिया से जुड़े लोगों के मुताबिक़ पहली ही फ़िल्म के बाद उनकी फ़ीस करोड़ में पहुंच गई.

"गैंग्स ऑफ वासेपुर की कामयाबी के बाद मेरे पास इतने ऑफर्स आए कि मेरे पास अगले एक साल तक कोई डेट्स नहीं है. और मजे की बात तो ये कि मुझे मेरी मुंहमांगी कीमत भी मिलने लगी है."

इसी तरह से 'शोर इन द सिटी' में काम करके प्रशंसा बटोर चुके अभिनेता पितोबेश को भी इस फ़िल्म के बाद काफ़ी ऑफर्स मिले.

उन्होंने शंघाई और जोकर जैसी फ़िल्में की. अब वो आलाप नाम की एक फ़िल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं.

डेट्स नहीं है

नवाज़ुद्दीन कहते हैं, "गैंग्स ऑफ वासेपुर की कामयाबी के बाद मेरे पास इतने ऑफ़र्स आए कि मेरे पास अगले एक साल तक कोई डेट्स नहीं है. और मज़े की बात तो ये कि मुझे मेरी मुंहमांगी क़ीमत भी मिलने लगी है."

ऋचा चड्ढा के पास भी 'गैंग्स' की कामयाबी के बाद कई फिल्मों के ऑफर हैं.

नवाज़ुद्दीन ने बताया कि उन्हें श्याम बेनेगल और अमिताभ बच्चन सरीखे लोगों ने बधाइयां दीं और रणबीर कपूर ने कहा कि वो उनके जैसा रोल चाहते हैं.

इस तरह से गैंग्स को नवाज़ुद्दीन अपने करियर का टर्निंग प्वाइंट मानते हैं. उनके पास आमिर ख़ान की तलाश के अलावा आधा दर्जन फ़िल्में हैं.

ऋचा चड्ढा मानती हैं कि गैंग्स ऑफ वासेपुर में एक जवां महिला से लेकर बूढ़ी महिला तक के नग़मा ख़ातून चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाकर उन्होंने जो जोख़िम लिया अब उन्हें इसका रिवॉर्ड मिल रहा है.

वो कहती हैं, "हालांकि गैंग्स ऑफ वासेपुर का ऑफ़र इस दौर की एक ऐसी अभिनेत्री को भी दिया गया था, जिनकी तुलना लोग स्मिता पाटिल से करते हैं, लेकिन नग़मा ख़ातून का ये किरदार ग्लैमरविहीन था, तो शायद इस वजह से उन्होंने इसे करने से मना कर दिया. लेकिन देखिए मुझे कितना फ़ायदा हुआ इस किरदार का."

ऋचा ने बताया कि अब अगले कई महीनों तक उनके पास डेट्स ही नहीं है. ऋचा कहती हैं, "एक्टर का करियर नसीब से नहीं, बल्कि अपनी पसंद से बनता है."

इज़्ज़त मिलने लगी

विकी डोनर की कामयाबी के बाद आयुष्मान खुराना की फीस करोड़ में पहुंच गई है.

अभिनेता आयुष्मान खुराना कहते हैं कि फ़िल्म विकी डोनर के बाद अब उन्हें बहुत ज़्यादा लोग पहचानने लगे हैं.

अब उन्हें पहले से कहीं ज़्यादा इज़्ज़त मिलने लगी है. आयुष्मान फ़िल्म करने से पहले रेडियो और टीवी से जुड़े थे.

वो कहते हैं, "विकी डोनर के बाद कई वीजे मुझसे बोलते हैं कि यार थैंक्यू वेरी मच. तेरी वजह से ये मिथक टूटा है कि वीजे एक्टिंग नहीं कर सकते."

हालांकि मनोज बाजपेई सरीखे अभिनेता अब भी मानते हैं कि उन जैसे कलाकारों को अच्छे रोल के साथ-साथ अच्छे पैसे भी मिलने चाहिए. जो अभी नहीं हो रहा है.

शोर इन द सिटी में काम कर चुके पितोबेश कहते हैं, "देखिए मेरे अभिनय की प्रशंसा हुई लेकिन दिबाकर बनर्जी सरीखे कलाकार को भी जब 20 करोड़ की लागत वाली शंघाई बनानी थी तो बड़े रोल के लिए उन्होंने इमरान हाशमी को ही चुना, मुझे नहीं चुना. तो अब भी हमें मेनस्ट्रीम वाले रोल नहीं मिल रहे हैं."

लेकिन ये सारे कलाकार एक बात पर सहमत हैं कि माहौल बदला है. और नए क्रिएटिव लोग आ रहे हैं.

लीक से हटके फ़िल्में बनने की मात्रा बढ़ रही है. ऐसे में अब इन सबकी चांदी है.

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