लो हम भी मिल लिए अमिताभ बच्चन से...

 बुधवार, 10 अक्तूबर, 2012 को 10:27 IST तक के समाचार
अमिताभ बच्चन और प्रभात पांडेय

मैं अमिताभ बच्चन का शायद वो इकलौता फैन हूं जिसने 'रामगोपाल वर्मा की आग' भी दो बार देखी है. आज से दो साल पहले मैंने अमिताभ बच्चन को ये बात बताई थी तो वो ठहाका मार कर हंस पड़े थे.

अमिताभ बच्चन से मेरी वो पहली मुलाकात कुल जमा डेढ़ या दो मिनट चली होगी. मामला किसी फिल्म के प्रमोशन का था. तब से लेकर मेरी दिली ख्वाहिश रही कि कभी न कभी अमिताभ का इंटरव्यू करने का मौका मिले.

11 अक्टूबर को उनका 70वां जन्मदिन है. मैं करीब तीन महीने से इंटरव्यू की कोशिश में लगा था. हम कई महीनों से उनकी पीआर टीम के संपर्क में थे. लेकिन इंटरव्यू टलता ही जा रहा था.

आखिरकार दो अक्तूबर यानी गांधी जयंती के दिन तय हुआ कि हिंदी सिनेमा के इस बेताज बादशाह से आधे घंटे का समय मिलेगा.

हिदायत

"मैं करीब तीन महीने से इंटरव्यू की कोशिश में लगा था. हम कई महीनों से उनकी पीआर टीम के संपर्क में थे. लेकिन इंटरव्यू टलता ही जा रहा था. आखिरकार दो अक्तूबर यानी गांधी जयंती के दिन तय हुआ कि हिंदी सिनेमा के इस बेताज बादशाह से आधे घंटे का समय मिलेगा."

प्रभात पांडेय, बीबीसी संवाददाता

वक्त दिया गया दोपहर 12 बजकर 15 मिनट का.

ठीक इस वक्त पर अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित ऑफिस 'जनक' पहुंचने की हिदायत के साथ ये भी कहा गया कि किसी भी तरह के व्यक्तिगत और 'असहज' सवाल ना पूछे जाएं.

उत्साह था कि अमर अकबर एंथनी के एंथनी और अग्निपथ के विजय दीनानाथ चौहान से सवाल पूछ सकूंगा.

सवाल का तनाव अपनी जगह पर था लेकिन इस बीच बाहर के कुछ दोस्तों और ऑफिस के भी कुछ साथियों ने कहा ऑटोग्राफ लेते आना.

मैंने सबसे वादा कर दिया कि मैं ऑटोग्राफ लेकर आऊंगा. ये और बात है कि मैं खुद अपने लिए ऑटोग्राफ लेना भूल गया.

सत्तर के अमिताभ की चाल बेहद तेज है. उनकी बराबरी के लिए आपको दौड़ना पड़ेगा.

अमिताभ वक्त के पाबंद हैं ये कौन नहीं जानता. खैर मैं ठीक 12 बजे उनके ऑफिस 'जनक' पहुंच गया.

ऑफिस में अमिताभ बच्चन की वर्तमान तस्वीरों के अलावा उनकी युवावस्था की कुछ तस्वीरें और पेंटिंग्स लगे हुए थे. लेकिन जिस तस्वीर ने मेरा ध्यान सबसे ज्यादा खींचा वो थी उनके पिता हरिवंशराय बच्चन और मां तेजी बच्चन की विवाह के समय की तस्वीर.

अंदर जहां इंटरव्यू होना था वहां ट्राफियों का अंबार लगा हुआ था और बीच में शायद शहंशाह बैठने वाले थे इंटरव्यू के लिए.

लंबा-चौड़ा इंसान

चाय की प्याली आ चुकी थी और इससे पहले कि चाय का आनंद ले पाते बैठक का दरवाज़ा खुला और बहुत तेज़ी से एक शख्स अंदर दाखिल हुआ. सामने एक लंबा चौड़ा इंसान खड़ा था.. कुर्ता, पायजामा और शॉल ओढ़े हुए.

ये अमिताभ बच्चन थे.

नियत समय से पूरे पांच मिनट लेट. उन्होंने अपनी भारी आवाज़ में (जो ज़ुकाम की वजह से थोड़ी और भारी हो गई थी) कहा, "अरे आप लोग यहां बैठे हैं." हम कुछ कह पाते इससे पहले ही वो बाहर निकल गए. उनकी पीआर टीम उनके पीछे भागी. यकीन जानिए चलते हुए अमिताभ बच्चन के कदमों की बराबरी करने के लिए बाकियों को दौड़ना पड़ता है.

"बड़े मज़े मज़े में उन्होंने मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए और इंटरव्यू खत्म होने के बाद मैंने उन्हें बताया कि कैसे मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं. वो मुस्कुरा दिए. क्योंकि ऐसी बातें उनसे ना जाने कितने लोगों ने कितनी बार की होगी."

प्रभात पांडेय, बीबीसी संवाददाता

70 साल की उम्र, लेकिन कमर बिलकुल सीधी और चाल बेहद तेज. हमें बताया गया कि इंटरव्यू सेकेंड फ्लोर में होगा.

वहां पहुंचे और तैयार होते होते दो मिनट में ही अमिताभ आकर मेरे बगल वाली कुर्सी पर जम गए. तबियत उनकी थोड़ी सी नासाज़ थी, शायद उस वजह से थोड़ा कमज़ोर नज़र आ रहे थे.

उन्होंने मुझसे पूछा, "हां भाई, क्या लेंगे आप. चाय, कॉफी, शरबत, दूध, शराब. क्या पिएंगे खुलकर बताइए. मैं ये सारी चीजें खुद नहीं पीता. लेकिन दूसरों को पिलाता हूं."

मैंने कहा, चाय पी चुका हूं अब इंटरव्यू से काम चल जाएगा.

सहजता

ये मेरा अमिताभ से पहला इंटरव्यू था. मैंने इससे पहले उनके तमाम इंटरव्यू सुने और देखे थे. और मुझे कई बार लगता था कि ये शख्स इतना 'पॉलिटिकली करेक्ट' क्यों हैं.

माहौल को अमिताभ ने इतना सहज बना दिया कि मेरी नर्वसनेस जाती रही.

खैर, इंटरव्यू शुरू हुआ. मैंने एक एक करके उनके फिल्मी करियर पर कई सवाल पूछे. वो सहजता से जवाब देते चले गए. इंटरव्यू की शुरुआत में मुझे जो नर्वसनेस महसूस हो रही थी. वो अमिताभ बच्चन से मिलते ही जाती रही. शायद उन्होंने माहौल को सहज बना दिया था.

बड़े मज़े मज़े में उन्होंने मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए और इंटरव्यू खत्म होने के बाद मैंने उन्हें बताया कि कैसे मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं. वो मुस्कुरा दिए. क्योंकि ऐसी बातें उनसे ना जाने कितने लोगों ने कितनी बार की होगी.

मुझसे उन्होंने हाथ मिलाया और तस्वीरें भी खिंचाई. फिर मैं वहां से रवाना हो गया. और सोचने लगा कि 'यार, अमिताभ बच्चन भी अप्रोचेबल है'. उन्हें भी जुकाम होता है. अमिताभ पर भी बाकी लोगों की तरह उम्र का असर होता है.

लेकिन एक सवाल जो इंटरव्यू शुरू होने से पहले मेरे दिमाग में था वो अब भी मेरे दिमाग में कौंध रहा था. 'ये शख्स इतना पॉलिटिकली करेक्ट क्यों हैं?'

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