मीडिया से नाराज़ हैं अभय देओल

Image caption फिल्म चक्रव्यूह के एक दृश्य में अभय देओल और अभिनेत्री अंजलि पाटिल.

अभिनेता अभय देओल आजकल मीडिया से नाराज़ हैं. वो कहते हैं कि पत्रकारों को थोड़ा ज़्यादा ज़िम्मेदारी से काम करना चाहिए.

अभय देओल की आने वाली फिल्म है प्रकाश झा की 'चक्रव्यूह'.

इसको लेकर भी मीडिया में कई तरह की अफ़वाहें आईं. कहा गया कि अभय देओल अपने रोल से ख़ास ख़ुश नहीं है.फिर इसी फ़िल्म का गाना 'बिड़ला हो या टाटा, अंबानी हो या बाटा, सबने अपने चक्कर में देश को है काटा' कई बड़े उद्योगपतियों के गले से नीचे नहीं उतर रहा है.ये गाना अभय देओल पर ही फिल्माया गया.

इन सारे विवादों के बारे में जब अभय से पूछा गया तो वो बोले, "मीडिया में एक बात ग़लत है कि आप लोग अपनी स्टोरी में सूत्रों का हवाला देकर साफ निकल जाते हैं. कोई भी ख़बर छाप दी और उसे कह दिया कि सूत्रों के हवाले से हमें पता चला. ये ग़लत परंपरा है. इससे उस अखबार या चैनल की प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचता है."

नक्सलवाद पर आधारित 'चक्रव्यूह'

फिल्म 'चक्रव्यूह' नक्सलवाद की समस्या पर आधारित है. इसमें वो एक पुलिस के मुखबिर की भूमिका अदा कर रहे हैं जो एक योजना के तहत नक्सलियों के गुट में शामिल हो जाता है, लेकिन बाद में उसे खुद भी नक्सलियों से सहानुभूति हो जाती है.

क्या ये फिल्म नक्सलवाद को सही ठहराने की कोशिश तो नहीं कर रही है. ये सवाल पूछने पर अभय ने कहा, "देखिए इस दुनिया में कोई चीज़ सिर्फ अच्छी या बुरी नहीं होती. हर बात में कुछ सही और कुछ ग़लत होता है. हम नक्सलवाद की आलोचना या पक्ष नहीं ले रहे हैं,लेकिन किसी समस्या को समझने के लिए उसके दोनों पहलू जानने बहुत ज़रूरी हैं. नक्सलवाद क्यों पनपा इसकी वजह जानना बहुत ज़रूरी है."

अभय कहते हैं कि वो 'शंघाई' और 'चक्रव्यूह' जैसी फिल्में करके बहुत खुछ हैं क्योंकि इन फिल्मों के ज़रिए जिन मुद्दों को उठाया गया है वो चाहते हैं कि लोग उन मुद्दों पर चर्चा करें.

अपने अब तक के करियर से अभय संतुष्ट हैं. वो इस बात से खुश हैं कि अपने छोटे से करियर में उन्होंने काफी अलग-अलग तरह का सिनेमा किया और लोगों के बीच में वो अपनी एक अलग छवि बनाने में कामयाब रहे.

फिल्म 'चक्रव्यूह' 24 अक्टूबर को रिलीज़ हो रही है. इस फिल्म में अभय के अलावा मनोज बाजपेई, अर्जुन रामपाल और ईशा गुप्ता की भी अहम भूमिका है.

संबंधित समाचार