शैंपू बेचें पर समाज के लिए भी सोचें: कुणाल

कुणाल कपूर
Image caption कुणाल कपूर ने अपनी नई फिल्म लव शव ते चिकन खुराना में बेहतरीन अभिनय किया है

काले घुंघराले बालों वाले लंबे और छरहरे से अभिनेता कुणाल कपूर रंग दे बसंती, बचना ए हसीनों और डॉन 2 जैसी फिल्मों के ज़रिए लड़कियों में काफी लोकप्रिय हैं. लेकिन कुणाल कपूर मानते हैं कि शैंपू-कोला बेचने के साथ-साथ अपने सेलीब्रिटी स्टेटस का इस्तेमाल कुछ नेक और सामाजिक मकसद के लिए भी करना चाहिए.

इस बारे में बीबीसी से बात करते हुए कुणाल ने कहा, “अभिनेता तो मैं हूँ ही लेकिन मैं अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियों को लेकर भी सजग हूँ. अगर आप सेलिब्रिटी होने के नाते शैंपू बेच सकते हैं, कोला बेच सकते हैं, गाड़ियाँ बेच सकते हैं तो बहुत ज़रूरी है कि आप किसी सामाजिक मुद्दे को भी लोगों के बीच उठाएँ. कुछ दिन पहले ही मैंने एक ऑनलाइन साइट शुरु की है जिसमें शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और अन्य मुद्दों के लिए हम पैसे जुटाने की कोशिश करते हैं.”

कुणाल ने अपने करियर की शुरुआत सहायक निर्देशक के तौर पर की थी. 2001 में आई राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म अक्स में वे सहायक निर्देशक थे.

अभिनय का मौका मिला उन्हें 2005 में आई एमएफ हुसैन की फिल्म मीनाक्षी में. जिसने फिल्म देखी है उसे बेहद दुबले पतले से कुणाल याद होंगे. इससे पहले कुणाल ने खुद को नसीरुद्दीन शाह और बैरी जॉन के साथ थिएटर में मांजा.

लेखक भी छिपा है

फिल्मों में कदम रखे कुणाल को सात-आठ साल हो चुके हैं लेकिन उन्होंने अब तक बहुत कम ही फिल्में की हैं.

इस पर कुणाल कहते हैं, “मैं एक्टर इसलिए बना क्योंकि मुझे अभिनय पसंद है. मैं ऐसी फिल्मों में काम करना चाहता हूँ जिसमें मुझे मज़ा आए. लेकिन ऐसे रोल मुझे कम मिले हैं. मेरा मानना है कि अगर आपको मनमाफिक फिल्में न मिलें तो बेहतर है आप काम न करें- बजाए इसके कि आप सेट पर जाएँ और सोचें कि मैं ये फिल्म क्यों कर रहा हूँ. या रिलीज़ होने के बाद आपको अपना ही काम पसंद न आए. ऐसी कम ही स्क्रिप्ट आई हैं मेरे पास.”

कुणाल की नई फिल्म लव शव ते चिकन खुराना के लिए उनकी काफी तारीफ हो रही है. ये फिल्म जो प्यार और खाने के ईद गिर्द घूमती है. तो रिश्तों की मिठास बढ़ाने में लज़ीज़ खाने की क्या भूमिका होती है.

कुणाल अपने अनुभव गिनाते हुए कहते हैं, “खाने से रिश्ता और मीठा होता है. मुझे याद है बचपन में मैं अपनी मासियों के पास दिल्ली आता था तो 10-12 लोग एक मेज़ पर बैठकर खाना खाते थे. एक ही पराठे से में से तोड़-तोड़ कर खाते थे. उसका मज़ा ही कुछ और था और परिवार का प्यार भी बढ़ता है. हाल ही मैं अमृतसर भी गया था. सुबह का खाना खाया नहीं कि लोग पूछने लगते थे दोपहर को क्या खाना है. शाम को आओ तो मनपसंद चीज़ें खाने के लिए बनी होती थीं.”

खाना घोलता है रिश्ते में मिठास

कुणाल बताते हैं कि घर में बने स्वादिष्ट व्यंजन खाना उन्हें बेहद पसंद है पर उनके लिए तो ख़ुद अंडा उबालना भी बहुत बड़ी बात है.

अभिनेता कुणाल में एक लेखक भी छिपा हुआ है. वे एक अख़बार के लिए कॉलम भी लिखते थे.

अपने इस हुनर के बारे में कुणाल ने बताया, “मेरी सोच है कि अगर मेरी पंसद की फिल्में मुझे न मिलें तो उनसे मैं ख़ुद ऐसी स्क्रिप्ट तैयार करूँ. ऐसी कुछ स्क्रिप्ट मैंने लिखकर तैयार कर ली हैं. मैं दरअसल बहुत जिज्ञासु किस्म का व्यक्ति हूँ, जब आप जिज्ञासु होते हों, पढ़ने लिखने का शौक होता है और उस पर अभिनेता भी हो तो कहानियों की खोज अपने आप शुरु हो जाती है. मेरे दिमाग़ में ये हलचल चलती रहती है कि मैं किस तरह के रोल करना चाहता हूँ. वो विचार मैं कागज़ पर उतार लेता हूँ और निर्देशकों को दिखाता हूँ.”

लव शव ते चिकन खुराना में कुणाल नए लुक में नज़र आए हैं- बिना घुंघराले बालों और दाढ़ी के.

ज़्यादातर निर्देशकों ने अब तक कुणाल को उनके चिर-परिचित लुक में ही बाँधकर रखा है जिसे लोग पसंद भी करते आए हैं. लेकिन कुणाल कहते हैं कि रोल के लिए वे इसे बदलने के लिए हमेशा तैयार हैं.

कुणाल ने बताया कि लव शव के लिए पंजाब में शूटिंग के दौरान लोग उन्हें पहचान ही नहीं पाते थे और उन्हीं से पूछते कि ये कुणाल कहाँ मिलेगा.

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