जब तक है जान - दमदार या बेकार?

 बुधवार, 14 नवंबर, 2012 को 15:52 IST तक के समाचार
जब तक है जान

'प्यार में मिलना, मिलकर बिछड़ना और एक बार फिर मिलना' यही है फिल्म 'जब तक है जान' की कहानी. कहानी के मध्य में हैं शाहरुख़ खान, उनके इर्द-गिर्द हैं कटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा.

कहानी लंदन से लद्दाख, लद्दाख से कश्मीर घाटी होती हुई फिर लंदन पहुंचती है और एक चौराहे पर खड़ी हो जाती है. कहानी का अंत लंदन की गलियों में होता है या फिर कश्मीर की वादियों में इस राज़ पर से मैं पर्दा नहीं हटाना चाहता.

लेकिन अंत के अलावा और कई बातें मैं आपको बता सकता हूं. जैसे मैं आपसे ये कह सकता हूं कि फिल्म के हर दृश्य में आपको यश चोपड़ा के 'रोमांस' की छाप मिलेगी.

जब तक है जान

ये शाहरुख़ और कटरीना की साथ में पहली फिल्म है।

मैं आपको ये भी बता सकता हूं कि यूं तो यश जी ने अपनी ज़्यादातर फिल्मों की शूटिंग स्विटज़रलैंड की वादियों में की है लेकिन इस फिल्म में आपको स्विटज़रलैंड की कमी नहीं खलेगी क्योंकि फिल्म में खूबसूरत लंदन से लेकर डल झील तक के नज़ारे हैं.

मैं आपको ये भी बता सकता हूं कि 'जब तक है जान' में यश चोपड़ा ने नई और पुरानी पीढ़ी के प्रेम में जो फर्क है उसे बखूबी दर्शाया है.

रोमांस के बादशाह

शाहरुख़ खान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भले ही उनकी पिछली फिल्म 'रा.वन' बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली लेकिन जहां तक बॉलीवुड में रोमांटिक हीरो की बात है तो वो ही हैं 'बादशाह'.

'दिल वाले दुलहनिया ले जाएंगे' से लेकर 'कल हो न हो तक' शाहरुख़ कई बार परदे पर रोमांटिक अवतार में नज़र आए हैं लेकिन ‘जब तक है जान’ के शाहरुख़ आपको शायद थोड़ा अलग लगें.

जब तक है जान

  • कलाकार: शाहरुख़ खान, कटरीना कैफ, अनुष्का शर्मा
  • निर्देशक: यश चोपड़ा
  • रेटिंग: ***1/2

कटरीना कैफ की भी बात कर लेते हैं. फिल्म में कटरीना का नाच हो, उनकी फिटनेस या फिर उनका खूबसूरत चेहरा सब कमाल का है लेकिन जहां बात आती है किसी भावुक दृश्य की कटरीना वहीं मार खा जाती हैं.

बात अगर अनुष्का शर्मा की करें तो हो सकता था कि शाहरुख़ और कटरीना के बीच वो कहीं खो जाती लेकिन ऐसा हुआ नहीं है. इस बात का श्रेय फिल्म के कहानीकार आदित्य चोपड़ा के साथ-साथ खुद अनुष्का को भी जाता है, जिन्होंने अपने किरदार में पूरी जान डालने की कोशिश की है.

आज तो ठिक है लेकिन अनुष्का के लिए भविष्य चुनौतीपूर्ण होने वाला है क्योंकि अब उन्हें कुछ अलग करने की ज़रुरत है. एक बिंदास और बेबाक लड़की के किरदार कब तक निभाती रहेंगी वो.

रहमान का संगीत

जब तक है जान

'फौजी' के बाद एक और फौजी.

फिल्म के संगीत की अगर बात करें तो एआर रहमान का संगीत कुछ खास जमा नहीं. लेकिन रहमान के संगीत के साथ अक्सर ऐसा होता है कि पहली बार में वो आपको कम ही भाता है. शायद मैं उसे बार बार सुनूं तो मुझे भी भा जाए.

मैं अनिल मेहता का ज़िक्र भी करना चाहूंगा. 'जब तक है जान' में उनकी फोटोग्राफी कमाल की है. फिल्म थोड़ी लम्बी ज़रूर है लेकिन अगर आपको रोमांटिक फिल्में पसंद है तो मुझे पूरी उम्मीद है आपको ये फिल्म भी पसंद आएगी.

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