रजनी के डायलॉग सिखाएँगे मैनेजमेंट के गुर

  • 12 दिसंबर 2012
Image caption 12 दिसंबर को रजनीकांत 62 साल के हो गए.

रजनीकांत, एक ऐसा नाम जो इतना बड़ा बन चुका है कि उस पर तमाम चुटकुले कहे जाते हैं.

वो किस्से, कहानियों यहां तक कि बच्चों के कार्टून और एनिमेशन का हिस्सा बन चुका है. और अब रजनीकांत का नाम और उनके संवाद मैनेजमेंट के छात्रों और कॉर्पोरेट जगत का मनोबल बढ़ाने के लिए और तमाम व्यावसायिक रणनीतियां बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

12 दिसंबर को दक्षिण भारतीय सिनेमा के इस सबसे बड़े सितारे का जन्मदिन है और उससे बस चंद रोज़ पहले 'ग्रैंड ब्रांड रजनी' नाम की किताब बाज़ार में आई.

मैनजमेंट और कॉर्पोरेट जगत को टारगेट कर लिखी गई इस किताब में विश्लेषण किया गया है कि कैसे 'रजनीकांत' नाम एक ब्रांड के तौर पर आगे बढ़ा. कैसे तमाम फिल्मकारों ने इस 'ब्रांड' को भुनाया और हिट फिल्में बनाईं. साथ ही कैसे इस चलन से प्रेरणा लेकर कोई कंपनी अपना एक ब्रांड बाज़ार में स्थापित कर सकती है.

हालांकि दिलचस्प बात ये है कि खुद रजनीकांत ने आज तक कोई भी विज्ञापन नहीं किया है ना ही वो किसी उत्पाद के ब्रांड एंबेसडर बने हैं.

इस किताब के लेखक हैं पीसी बालसुब्रमण्यन और राम एन रामकृष्णन, जो पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं और खुद भी रजनीकांत के बहुत बड़े प्रशंसक हैं.

लेकिन रजनीकांत, दक्षिण भारतीय फिल्मों के बहुत बड़े अभिनेता हैं, तो ऐसे में ये किताब उत्तर भारत के लोगों के लिए या दूसरी जगह के लोगों के लिए क्या मायने रखेगी.

इसके जवाब में बालसुब्रमण्यन कहते हैं, "रजनीकांत के प्रशंसक पूरी दुनिया में फैले हैं. वो उनसे भावनात्मक लगाव रखते हैं. जो लोग उनकी फिल्मों से वाकिफ नहीं भी हैं वो भी उनके करिश्मे से वाकिफ हैं. उनके चुटकुलों को सुनाते हैं और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर इन्हें बड़े चाव से शेयर करते हैं."

Image caption रजनीकांत पर पहले भी कई किताबें लिखी जा चुकी हैं.

इससे पहले बालसुब्रमण्यन, तमिल कलाकार राजा कृष्णमूर्ति के साथ मिलकर 'रजनी पंचतंत्र' नाम की किताब भी लिख चुके हैं. जिसमें बताया गया था कि कैसे रजनीकांत की फिल्मों के मशहूर डायलॉग्स के ज़रिए मैनेजमेंट और कॉर्पोरेट जगत प्रेरणा ले सकता है. रजनीकांत के कुछ मशहूर संवाद जो इस किताब में शामिल किए गए हैं, वो हैं.

फिल्म अरुणाचलम: मैं जो बोलता हूं, वो करता हूं और जो नहीं बोलता वो भी करता हूं.

शिवाजी: जिसका सिर्फ नाम सुनकर ही ज़मीन कांपने लगती है.

पडियप्पा: मेरा रास्ता सबसे अलग रास्ता है.

यजमान: लोग कहते हैं वही करो जो कानून कहता है. मैं कहता हूं कि सिर्फ अच्छा करो, वही कानून है.

इसके अलावा रजनीकांत के जन्मदिन के मौके पर मशहूर निर्देशक सुरेश कृष्णा भी एक किताब लॉन्च कर रहे हैं जिसका शीर्षक है 'माय डेज़ बिद बाशा'.

सुरेश रजनी की सुपरहिट फिल्म बाशा (1995) के निर्देशक हैं.

ये साल 2012 का 12वां महीना है यानी रजनीकांत के जन्मदिन पर तारीख होगी 12-12-12.

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