...तो सिनेमाहॉल बंद हो जाएंगे ?

विश्वरूप

अपनी अति महत्वाकांक्षी फिल्म 'विश्वरूप' (तमिल में विश्वरूपम) को लेकर अभिनेता-निर्माता कमल हासन लंबे समय से चर्चा में हैं.

फिल्म की रिलीज़ कई बार टाली गई. पहले फिल्म पिछले साल सितंबर में रिलीज़ होने वाली थी. फिर फिल्म की रिलीज़ डेट आगे बढ़ाकर 11 जनवरी की गई और अब आखिरकार फिल्म 25 जनवरी को रिलीज़ होगी.

फिल्म की रिलीज़ बार-बार टालने की एक वजह कमल हासन और तमिलनाडु के सिनेमाहॉल मालिकों के बीच मतभेद का होना भी था जिसे कथित तौर पर अब सुलझा लिया गया है.

दरअसल कमल हासन ने अपनी इस फिल्म को थिएटरों के साथ-साथ डीटीएच पर भी रिलीज़ किए जाने की योजना बनाई थी.

यानी एक निश्चित शुल्क देकर डीटीएच सेवाओं का लाभ उठाने वाले दर्शक सीधे इसे अपने घरों पर टीवी पर देख सकते. लेकिन तमिलनाडु के सिनेमाहॉल मालिकों ने इसका विरोध किया.

उनका तर्क ये था कि कमल हासन के इस कदम से उनके कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा.

फिलहाल विश्वरूप 25 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी और अभी इसकी डीटीएच पर रिलीज़ की तारीख तय नहीं की गई है.

सिनेमाहॉल मालिकों का विरोध

सिनेमाहॉल मालिकों का विरोध इस बात पर था कि फिल्म की सिनेमाहॉल पर रिलीज़ से आठ घंटे पहले ही इसे डीटीएच पर रिलीज़ किए जाने की योजना थी.

आमतौर पर फिल्म की रिलीज़ के कुछ हफ्तों बाद ही वो फिल्म डीटीएच सुविधा का लाभ उठा रहे दर्शकों को उपलब्ध हो पाती है.

कमल हासन ने ये कहकर इस डर को नकार दिया था कि जो लोग फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने के दीवाने हैं वो तो फिल्म देखने आएंगे ही.

कमल हासन ने फिल्म को डीटीएच और सिनेमाघरों में साथ-साथ रिलीज़ किए जाने के फैसले का ये कहकर बचाव किया, "आप घर में तो खाना पकाते हैं, लेकिन क्या उस वजह से बाहर रेस्तरां में जाकर खाना छोड़ देते हैं क्या. नहीं ना. तो फिर डीटीएच का डर जो सिनेमाहॉल मालिकों में है, वो बेकार है."

फिल्म व्यापार विशेषज्ञ कोमल नाहटा भी कहते हैं, "ये कमल हासन की फिल्म है. ये उनका अधिकार है वो फिल्म को जैसे चाहे रिलीज़ करें. सिनेमाहॉल मालिकों ने जो विरोध किया था वो बेबुनियाद था."

सिनेमाहॉल पर खतरा

Image caption सिनेमाहॉल मालिक मानते हैं कि डीटीएच पर फिल्मों को रिलीज़ करने का चलन सिनेमाहॉल्स को समाप्त कर देगा.

लेकिन जी-7 मल्टीप्लेक्स समूह और मराठा मंदिर सिनेमा के मालिक मनोज देसाई कुछ और ही मानते हैं.

वो कहते हैं, "लोगों को घर बैठे अगर फिल्म देखने को मिलेगी तो वो भला सिनेमाहॉल क्यों आने लगे और थिएटर में पब्लिक ही नहीं आएगी तो हमें उसके रख-रखाव के लिए भी पैसा नहीं मिलेगा. ऐसे में तो सिनेमाहॉल बंद हो जाएंगे."

मनोज देसाई ये भी कहते हैं कि वैसे भी फिल्मों के सैटेलाइट अधिकार आजकल बड़ी कीमतों में बेचे जाते हैं और वो रिलीज़ होने के चंद महीनों के भीतर ही टीवी पर आ जाती हैं. ऐसे में सारा कारोबार शुरुआती तीन दिनों का हो गया है. सिल्वर जुबली वाली अवधारणा ही खत्म हो गई है.

सिंगल स्क्रीन थिएटर वैसे भी खत्म होते जा रहे हैं. ऐसे में डीटीएच पर फिल्में सीधे रिलीज़ होने लगीं तो सिनेमाहॉल मालिकों की तो कमर ही टूट जाएगी.

मनोज देसाई ये भी मानते हैं कि डीटीएच पर फिल्में रिलीज़ होने से बड़ै पैमाने पर पायरेसी को बढ़ावा मिलेगा और वो सिनेमाहॉल मालिकों के साथ-साथ निर्माता पर भी बुरा असर डालेगा. लोग फिल्मों की सीडी बनाएंगे और वो 15-20 रुपए में मार्केट में मिलेंगी.

लेकिन कोमल नाहटा ये भी मानते हैं कि फिलहाल अगले दो-तीन साल तक डीटीएच पर फिल्में रिलीज़ करने का प्रचलन नहीं आएगा. वो ये भी कहते हैं कि ट्रेंड तभी बदलेगा जब कोई बड़े बैनर की या बड़े सितारे जैसे आमिर, शाहरुख या सलमान की फिल्म डीटीएच पर रिलीज़ होगी.

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