पसंद आएगा कमल हासन का 'विश्वरूप'?

विश्वरूप,हिंदी फिल्म

कमल हासन द्वारा लिखित और निर्देशित 'विश्वरूप' कहानी है भारतीय गुप्त सर्विस के कुछ एजेंट की जो कई देशों में फैले एक आंतकवादी संगठन को पकड़ने की कोशिश में लगे हैं.

विश्वनाथ उर्फ तौफ़िक उर्फ विसाम अहमद कश्मीरी (कमल हासन) की पत्नी है निरुपमा (पूजा कुमार) जो एक नाभिकीय कर्करोग डॉक्टर हैं. ओमारभाई (राहुल बोस) एक आतंकवादी संगठन चलाते हैं जो ओसामा बिन लादेन के लिए काम करता है.

विसाम इस संगठन में घुस जाता है और ओमार के आदमियों को ट्रेनिंग देकर सबका दिल जीत लेता है.लेकिन ओमार के साथी सलीम (जयदीप अहलावात) को विसाम पर शक हो जाता है.इससे पहले कि सलीम कुछ बताए ओमारभाई का परिवार अमरीकी सेना के एक हमले में मारा जाता है.

इस बीच ओमारभाई के आदमी,विसाम और उसकी पत्नी को पकड़ लेते हैं लेकिन विसाम उनके हाथ ज़्यादा देर नहीं टिकता. क्या विसाम और उसके साथी ओमार के मंसूबों पर पानी फेर देते हैं? क्या है ओमार का गेम प्लान? अंत में क्या होता है ओमार भाई और वासिम का ?

उलझी कहानी

Image caption कमल का अभिनय अच्छा था लेकिन उनकी कहानी कमज़ोर थी

कमल हासन की लिखी कहानी काफी उलझी हुई है और ढेर सारे चेहरे और किरदार होने के कारण ड्रामा काफी अस्पष्ट हो जाता है.फिल्म की पटकथा तो बेहद ख़राब है क्योंकि वो जिस तरह से लिखी गई है दर्शक को पता ही नहीं चलता कि फिल्म किस दिशा में जा रही है.आखिरकार चीज़ें जमने लगती हैं लेकिन तब तक दर्शक की सहनशक्ति जवाब दे जाती है.

घृणा पैदा करने वाले एक्शन सीन परेशान कर सकते हैं, वहीं इंटरवेल के बाद कुछ हल्के फुल्के सीन हंसा भी नहीं पाते.फिल्म में किरदार हिंदी के अलावा अन्य भाषा में इतना अधिक बात करते हैं कि सबटाइटल्स परेशान कर देते हैं.

फिल्म के अंत से बिल्कुल संतुष्टि नहीं मिलती और लगता है जैसे सीक्वेल के बारे में सोचकर ही क्लाइमेक्स को गढ़ा गया है.कुछ सीन जैसे निरुपमा का बम को डिफ्यूज़ करना काफी अविश्वसनीय लगता है.

बढ़िया अभिनय

Image caption राहुल बोस ने आतंकवादी की भूमिका बेहतरीन तरीके से निभाई है

फिल्म में कुछ अच्छे मोड़ आते हैं जो कहानी को रुचिकर बनाते हैं.रोमांचक सीन भी हैं और कुछ एक्शन सीन अपील करने वाले हैं.ख़ासतौर पर विश्वनाथ और तौफ़िक का फारुख़ को मारने वाला सीन काफी प्रशंसनीय है.अतुल तिवारी के संवाद अच्छे हैं.

कमल हासन ने गुप्त सर्विस एजेंट के रोल को बखूबी निभाया है.फिल्म में निभाए अपने हर किरदार में वो घुस गए हैं.उनका अभिनय बेहतरीन है.पूजा कुमार कमल की पत्नी के रुप में जमी है.

ओमारभाई के किरदार में राहुल बोस बहुत बढ़िया लगे हैं.वो पूरी तरह से आतंकवादी के रोल में थे.उनकी वेषभूषा और आवाज़ एक अलग छाप छोड़ते हैं.शेखर कपूर ठीक थे.

कमल का निर्देशन अच्छा था लेकिन कहानी कहने के अंदाज़ ने दर्शकों को उलझा दिया.स्क्रिप्ट में सीमित अपील है.शंकर एहसान लॉय का संगीत प्रचलित किस्म का नहीं है.जावेद अख़्तर के गीत ठीक हैं.पंडित बिरजू महाराज का नृत्य निर्देशन अच्छा है.

कुल मिलाकर विश्वरूप एक लंबी और थकाऊ फिल्म है.एक ऐसा विषय जिसमें शायद ज़्यादा लोग की रुचि नही होगी. लगता नहीं कि तमिल फिल्म के विवाद से हिंदी संस्करण का कुछ भला होगा.

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