क्या दिमाग़ में दर्ज होगी मर्डर 3 ?

  • 15 फरवरी 2013
मर्डर 3

विशेष फिल्म्स की मर्डर सीरिज़ का तीसरा भाग 'मर्डर 3' है.

विक्रम (रणदीप हुड्डा) एक फैशन फोटोग्राफर हैं और रोशनी (अदिति राव हैदरी) से प्यार करता है.

भारत में विक्रम के लिए एक अच्छी नौकरी का प्रस्ताव है, इसलिए रोशनी केप टाउन में अपनी लगी लगाई नौकरी छोड़कर विक्रम के साथ भारत आ जाती है जहां ये दोनों एकांत जगह पर बंगला खरीदकर रहने लगते हैं.

रोशनी देखती है कि नाओमी (तोनिषा पवार) जो एक हेयर स्टायलिस्ट है और विक्रम के बीच नज़दीकियां बढ़ती जा रही है.

एक दिन विक्रम को एक वीडियो मिलता है जिसमें रोशनी कहती है कि वो उसकी ज़िंदगी से दूर जा रही है. रोशनी गायब हो जाती है और विक्रम पुलिस में रिपॉर्ट करवाता है.

कुछ समय बाद विक्रम की मुलाकात निशा (सारा लोरेन) से होती है. दोनों एक दूसरे के करीब आते हैं और फिर निशा विक्रम के बंगले में रहने लगती है.

एक पुलिस अफसर कबीर (राजेश श्रृंगारपुरे) निशा को आगाह करता है कि विक्रम से बचकर रहे लेकिन निशा कबीर की बात पर ध्यान नहीं देती.

कुछ दिनों में निशा को बाथरुम से अजीब आवाज़ें आने लगती हैं. कुछ अजीबोगरीब चीज़ें होती हैं बंगले में.

रोशनी कहां गायब हो गई. क्या विक्रम ने उसका कत्ल कर दिया. क्या उसने आत्महत्या कर ली क्या निशा कभी भी रोशनी से मिल पाएगी.

कहानी में ट्विस्ट

Image caption पहली फिल्म के हिसाब से निर्देशक विशेष भट्ट ने परिपक्वता का परिचय दिया है.

मर्डर 3 एक स्पैनिश फिल्म 'ला कारा ओक्लटा' का रीमेक है.

कहानी आम फिल्मों से थोड़ी अलग है क्योंकि उसमें एक अनोखा ट्विस्ट है.

एक घर (जिसमें रहस्यमयी कमरा है) जिसे समझना थोड़ा मुश्किल है लेकिन ट्विस्ट के बाद कहानी रफ्तार पकड़ती है और दर्शकों को सोचने का वक्त ही नहीं देती.

महेश भट्ट और अमित मासुरकर की पटकथा काफी बांधे रखने वाली है.

पहला भाग काफी सामान्य सा है लेकिन इंटरवल के बाद दर्शक आखिर तक स्कीन पर टकटकी लगाए रखता है.

दूसरे भाग में महिलाओं की संवेदनाओं को ज़्यादा दिखाया गया है. बात बस यही समझ नहीं आई कि अगर निशा बंगले में सहज नहीं थी तो कबीर की चेतावनी को उसने अनदेखा क्यों किया. फिल्म का अंत काफी अप्रत्याशित है.

फिल्म में कॉमेडी नहीं है. पहले हिस्से में कुछ हल्के फुल्के पल हो सकते थे. निशा द्वारा गुत्थी सुलझाने वाले सीक्वेंस में भी ट्विस्ट काफी आसानी से आ जाता है. संजय मासूम के संवाद बढ़िया है.

अभिनय

रणदीप हुड्डा ने अच्छा अभिनय किया लेकिन वो अपने किरदार को औऱ भी बेहतर बना सकते थे. उनकी विग काफी अजीब लग रही थी.

Image caption इमरान हाशमी की जगह रणदीप हुड्डा को लिया जाना कई लोगों को खटक सकता है.

साथ ही पिछली दो 'मर्डर' के हीरो रहे इमरान हाशमी की जगह रणदीप को लेना शायद थोड़ा कमज़ोर निर्णय भी रहा क्योंकि लोग 'मर्डर' ब्रांड के साथ इमरान को जोड़कर देखने लगे थे.

अदिति ने अच्छा काम किया है और दिखा दिया है कि उन पर निर्भर किया जा सकता है.

सारा लोरेन में भी संभावनाएं दिखाई दी है. राजेश श्रृंगारपुरे ने भी छाप छोड़ी हालांकि उनका रोल काफी छोटा था.

विशेष भट्ट ने अपनी पहली फिल्म के हिसाब से काफी मुश्किल और असामान्य विषय चुना है.

हालांकि उन्होंने विषय को काफी परिपक्वता के साथ डील किया है,बिना किसी हंसी मज़ाक के उन्होंने एक सीरियस फिल्म बनाई है.

संगीत

प्रीतम,अनुपम और रॉक्सेन का संगीत अच्छा है लेकिन ज़्यादा प्रचलित नहीं हुआ.

सईद क़ादरी के गीत बढ़िया है. राजू सिंह का बैकग्राउंड संगीत मज़बूत है. सुनील पटेल का छायांकन भी खूबसूरत है.

कुल मिलाकर 'मर्डर 3' एक अच्छी मनोरंजक फिल्म है लेकिन देखना होगा कि इमरान हाशमी के ना होने से बिज़नेस कितना कर पाएगी.

जहां तक निर्माताओं की बात है तो उन्होने पहले ही फिल्म के सैटेलाइट अधिकार बेचकर 70-80 प्रतिशत पैसा रिकवर कर लिया है.

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