कैसे बनाई 26 साल पहले की दिल्ली?

स्पेशल छब्बीस,हिंदी फिल्म

पिछले दिनों रिलीज़ हुई फ़िल्म स्पेशल छब्बीस 1987 में हुई एक सच्ची घटना पर आधारित है जब एक गुट नकली सीबीआई अधिकारी बनकर नेताओं और कारोबारियों के घर और दफ्तरों पर छापा डालते हैं.

80 के दशक की इस घटना को फ़िल्माने के लिए दिल्ली, कलकत्ता और चंडीगढ़ जैसे शहरों के पच्चीस साल पहले के हुलिए को फ़िल्म में दिखाया गया जिसे रचने में निर्देशक और उनकी टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

स्पेशल छब्बीस के निर्देशक नीरज पांडे ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "फ़िल्म में एक शुरुआती सीन दिल्ली के क्नॉट प्लेस में शूट करना था जब मनोज एक अपराधी का पीछा करता है. 25 साल पहले का सीपी काफी अलग था. अब तो मेट्रो और विदेशी ब्रांड के आ जाने से चीज़ें काफी बदल गई हैं. इस सीन के लिए हमने पालिका बाज़ार से लेकर सीपी को एक तरीके से फिर से रचा."

नीरज ने बताया, "पच्चीस साल पहले जो गाड़ियां इस्तेमाल होती थी, वो अब नहीं होती इसलिए हमने पुरानी फटफटिया गुजरात से मंगाई. पूरे देश से हमने पुरानी गाड़ियों का इंतज़ाम किया जो हर तीन मिनट में बंद पड़ जाती थी. उन्हें फिर से चलाने के लिए हमारे साथ हर वक्त एक मैकेनिक रहता था."

शूटिंग के बाद की मेहनत का ज़िक्र करते हुए नीरज ने कहा कि फ़िल्म की शूटिंग के बाद भी बहुत सारा डिजिटल काम हुआ क्योंकि जिस सीन में विदेशी ब्रांड नज़र आते थे उसे मिटाकर हमें वहीं पुराने वक्त का हॉर्डिंग लगाना पड़ता था.

पुराने हवाई अड्डे

स्पेशल छब्बीस में एक और ख़ास बात रही अलग अलग शहरों के हवाई अड्डे. फ़िल्म में दिल्ली से लेकर मुंबई,चंडीगढ़ और कलकत्ता के दमदम एयरपॉर्ट को बेहद साधारण और ग्लैमर-विहीन तरीके से दिखाया गया है जबकि आज की तारीख में ये सभी हवाई अड्डे चकाचौंध से भरे हैं.

नीरज कहते हैं,"आज की पीढ़ी को पता भी नहीं है कि एक वक्त में ऐसे हवाई अड्डे होते थे जो बस स्टॉप से भी ज़्यादा गए गुज़रे लगते थे. हमने डॉर्नियर हवाई जहाज़ दिखाए जो अब देखने को भी नहीं मिलते हैं. अब तो सिर्फ एक दो ही बचे हैं जो उत्तर पूर्व भारत में ही कहीं उड़ते हैं."

वो हमारा ही दौर था

अपने दौर की बात करते हुए नीरज ने कहा, "80 के दशक के लाइफस्टाइल को कैमरे में कैद करने के लिए ज़्यादा रिसर्च की ज़रुरत नहीं पड़ी क्योंकि मैं और मेरी टीम के कई लोग उसी दौर में बड़े हुए हैं. हमने उस वक्त की कई चीज़ों को गौर से देखा है और जिया भी है."

फ़िल्म के छायाकर बॉबी सिंह थे जिनकी फ़िल्म की रिलीज़ से पहले मृत्यु हो गई. नीरज कहते हैं, "स्पेशल छब्बीस जैसी फ़िल्म को मात्र 42 दिनों में शूट करने का श्रेय बॉबी को जाता है. प्री प्रोडक्शन से पहले हम दोनों ने सभी जगहों का इस कदर दौरा किया कि अगर मैं सेट पर नहीं भी आता तो भी वो खुद ही सब शूट कर सकते थे."

स्पेशल छब्बीस में अक्षय कुमार, मनोज वाजपेयी और अनुपम खेर मुख्य भूमिका में थे. फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी सफलता हासिल की है.

नीरज पांडे की पहली फ़िल्म 'अ वेडनेसडे' थी जो 2008 में आई थी.

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