फिल्म रिव्यू: साहेब, बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स

  • 8 मार्च 2013
साहेब, बीवी और गैंगस्टर रिटंर्स

तिग्मांशु धूलिया की ये फिल्म साहेब, बीबी और गैंगस्टर का सीक्वल है.

पहले हिस्से में बीवी माधवी (माही गिल) का अपने ड्राइवर गैंगस्टर बबलू (रणदीप हुडा) से अफेयर होता है. लेकिन अंत में वो उसे खत्म कर देती है.

जबकि उसका पति राजसी खानदान का साहेब आदित्य प्रताप सिंह ( जिमी शेरगिल) क्रास फायरिंग में घायल हो जाता है और व्हील चेयर का सहारा लेने को बाध्य हो जाता है.

कहानी

सीक्वेल की शुरुआत में दिखाया जाता है कि आदित्य प्रताप सिंह अपना प्रभाव लगभग खो चुका है.

बीवी माधवी, विधायक चुन ली जाती है और उसे शराब पीने की बुरी लत लग चुकी होती है.

हालांकि वो अपने पति के साहेब के साथ एक ही हवेली में रहती है लेकिन दोनों के बीच संबंध खासे तनावपूर्ण हो चुके हैं.

Image caption इरफान और माही गिल ने कमाल का अभिनय किया है

इंद्रजीत सिंह (इरफान) एक दूसरे राजसी खानदान का राजा होता है. वो रंजना (सोहा अली खान) से प्यार करता है.

रंजना भी एक राजसी खानदान से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता ब्रजेंद्र सिंह (राज बब्बर) हैं.

इंद्रजीत और रंजना एक दूसरे से शादी करने का फैसला कर लेते हैं. लेकिन आदित्य प्रताप सिंह ऐसी परिस्थितियां पैदा कर देता है कि ब्रजेंद्र सिंह अपनी बेटी की शादी व्हीलचेयर पर बैठे आदित्य प्रताप से करने के लिए बाध्य हो जाता है.

जिससे इंद्रजीत और माधवी को धक्का पहुंचता है. ब्रजेंद्र सिंह गुप्त तरीके से इंद्रजीत सिंह को तब तक अपनी बेटी की देखभाल करने की ज़िम्मेदारी सौंपता है जब तक कि वो आदित्य प्रताप सिंह के साथ है.

बॉलीवुड पर इरफान की राय

तब ब्रजेंद्र को दो बातों का पता लगता है. पहली बात तो ये कि पुरानी दुश्मनी की वजह से इंद्रजीत, आदित्य के खून का प्यासा है. और दूसरी बात ये कि इंद्रजीत और रंजना एक दूसरे से प्यार करते हैं.

आदित्य और रंजना की सगाई के बाद, आदित्य, रंजना को कुछ दिनों के लिए हवेली में रहने को कहता है. एकाकीपन का शिकार हुई माधवी और ज़्यादा हताश हो जाती है और अपने आपको राजनैतिक गतिविधियों में व्यस्त रखने की कोशिश करती है.

इंद्रजीत इस मौके का फायदा उठाता है और माधवी के करीब जाता है.

एक दिन रंजना, इंद्रजीत और माधवी को आपत्तिजनक अवस्था में देख लेती है. वो अपने आपको ठगा सा महसूस करती है और इंद्रजीत को सबक सिखाने का फैसला करती है.

वो माधवी और इंद्रजीत के अफेयर और इंद्रजीत के आदित्य को मारने के प्लान की जानकारी आदित्य को दे देती है.

जल्द ही आदित्य अपनी विकलांगता से निजात पा लेता है. उसके बाद क्या होता है.

प्यार, वासना, सत्ता और धोखे के इस खेल में कौन जीतता है और कौन हारता है. इंद्रजीत, आदित्य का मार पाता है या आदित्य ही इंद्रजीत को खत्म कर देता है. क्या रंजना, आदित्य से शादी कर लेती है या इंद्रजीत को माफ करके उसके पास लौट जाती है. क्या माधवी और आदित्य एक दूसरे के करीब जा पाते हैं.

दिलचस्प मोड़

Image caption तिगमांशु धूलिया का निर्देशन लाजवाब है

तिगमांशु धूलिया और कमल पांडेय की लिखी कहानी में कई दिलचस्प मोड़ हैं जो पूरी फिल्म के दौरान दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब होते हैं. फिल्म की यही बात इसकी सबसे बड़ी ताकत है.

फिल्म का स्क्रीनप्ले तिगमांशु ने लिखा है जो काफी रफ्तार से आगे बढ़ता है लेकिन इंटरवल के बाद थोड़ा सा उलझ जाता है.

पात्रों के आपसी रिश्ते और उनमें आए बदलावों को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है.

हीरोइनों पर तिगमांशु धूलिया

तिगमांशु ने फिल्म में कई जगह हास्यजनक स्थितियां पैदा की हैं जो इस गंभीर विषय वाली फिल्म में मनोरंजन का पुट देती हैं.

इंद्रजीत सिंह (इरफान) और एमएलए प्रभु तिवारी (राजीव गुप्ता) के बीच फिल्माया एक दृश्य बेहद मज़ाकिया बन पड़ा है.

तिगमांशु द्वारा लिखे संवाद फिल्म का एक और मज़बूत पक्ष हैं जो दर्शकों की तालियां बटोर ले जाएंगे.

हां, फिल्म का क्लाइमेक्स थोड़ा बिखरा सा लगता है और महसूस होता है कि आनन फानन में फिल्म खत्म कर दी गई, जो शायद कई लोगों को रास ना आए.

ज़बरदस्त अभिनय

इरफान ने कमाल का अभिनय किया है. इंद्रजीत के रोल को उन्होंने इस खूबी से निभाया है कि परदे पर इरफान को देखना एक बेहद सुखद अनुभव लगता है. उनकी संवाद अदायगी कमाल की है.

जिमी शेरगिल ने भी शानदार अभिनय किया है. वो आदित्य प्रताप के रोल में खासा नेचुरल लगे हैं.

माही गिल ने माधवी के रोल में कमाल किया है. शराब पीकर लड़खड़ाते हुए चलने वाले दृश्यों में वो देखने लायक हैं.

Image caption माही गिल ने शराब पीने वाले दृश्यों में अपनी छाप छोड़ी है.

उन्होंने साबित किया है कि वो बेहद लाजवाब अभिनेत्री हैं. उन्होंने अपने एकाकीपन को, अपनी कामवासना को, अपनी महत्वाकांक्षा को इतने सटीक तरीके से प्रस्तुत किया है कि इस साल के उनका नाम सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार की दौड़ में होना ही चाहिए.

सोहा अली खान ने भी अपने रोल को अच्छी तरह से निभाया है.

राज बब्बर ने भी विश्वसनीय अभिनय किया है. प्रवेश राणा (परमजीत सिंह) ने भी अच्छा अभिनय किया है. एमएलए प्रभु तिवारी के रोल में राजीव गुप्ता काफी प्रभावित करते हैं.

बेहतरीन निर्देशन

तिगमांशु धूलिया का निर्देशन बहुत अच्छा है. सभी पात्रों को उन्होंने सही तरीके से परिभाषित किया है.

सभी कलाकारों से शानदार अभिनय करवाने के लिए वो बधाई के पात्र हैं.

हां संगीतकार संदीप चौटा हिट गाने नहीं दे पाए हैं. उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी. उनका बैकग्राउंड संगीत अच्छा है.

योगेश जानी और हिमान धमीजा की सिनेमेटोग्राफी लाजवाब है.

मनोरंजक फिल्म

कुल मिलाकर साहेब, बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स एक मनोरंजक फिल्म है. इसके संवाद और कलाकारों का अभिनय फिल्म के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं.

बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी हुई है क्योंकि देश के कई हिस्सों में छात्रों की परीक्षाएं चल रही हैं. लेकिन उम्मीद है कि फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स को अच्छी कमाई हो जाएगी क्योंकि फिल्म उन्हें उचित कीमत में मिल गई है.

फिल्म के निर्माताओं को भी मुनाफा हो ही जाएगा.

संबंधित समाचार