फिल्म रिव्यू: आशिकी 2

आशिकी 2
Image caption आशिकी 2, 1990 में बनी फिल्म 'आशिकी' का रीमेक है.

टी सीरीज़ फिल्म्स और विशेष फिल्म्स की ‘आशिकी 2’, इस सीरीज़ की दूसरी फिल्म है. इससे पहले ‘आशिकी’ 1990 में रिलीज़ हुई थी.

कहानी है एक लड़के राहुल जयकर (आदित्य रॉय कपूर) और लड़की आरोही शिर्के (श्रद्धा कपूर) की.

राहुल एक प्रख्यात गायक है लेकिन तमाम कामयाबियों और उपलब्धियों के बावजूद वो शराब पीने की बुरी लत का शिकार हो जाता है.

धीरे-धीरे वो तबाही के रास्ते पर चल निकलता है और निर्माता उसे काम देना बंद कर देते हैं. उसका सेक्रेटरी उसे सुधरने की चेतावनी भी देता है लेकिन राहुल उसकी बात बिलकुल नहीं सुनता और शराब छोड़ने को तैयार नहीं.

एक दिन वो एक बार में आरोही (श्रद्धा कपूर) को अपना गाना गाते सुनता है और उसे आरोही से उसी पल प्यार हो जाता है. वो आरोही से वादा करता है कि उसे एक दिन बहुत बड़ी गायिका बनाएगा.

राहुल की मेहनत और अपने टैलेंट से एक दिन आरोही काफी बड़ी गायिका बन जाती है लेकिन राहुल खुद अपने करियर पर बिलकुल भी ध्यान नहीं देता और बेहिसाब शराब पीता रहता है जिसका उसका करियर लगभग खत्म हो जाता है.

जिस गति से आरोही को कामयाबी मिलती जाती है राहुल उसी रफ्तार से बर्बादी की तरफ बढ़ता रहता है. यहां तक कि लोग उसकी नाकामयाबी पर उसे ताने देना शुरू कर देते हैं.

आरोही और राहुल साथ-साथ रहते हैं क्योंकि वो एक दूसरे से प्यार करते हैं. क्या आरोही, राहुल को सुधार पाती है. क्या उनके रिश्ते में कोई दरार आती है. और क्या वो उससे उबरकर साथ-साथ रह पाते हैं, यही फिल्म की कहानी है.

कैसी है कहानी

शगुफ्ता रफीक की कहानी काफी दिलचस्प है. आरोही का अपने प्रेमी राहुल के प्रति प्यार और उसे सुधारने की कोशिश करना वाला एंगल दर्शकों को अपने साथ जोड़ पाने में कामयाब होता है.

Image caption आदित्य रॉय कपूर का अभिनय अच्छा है, लेकिन श्रद्धा ने तो शानदार अभिनय से अपने किरदार में जान ही डाल दी है.

राहुल सुपरस्टार गायक ज़रूर है लेकिन कहानी, राहुल के पतन से ही शुरू होती है. इस लिहाज से पूरी फिल्म के दौरान राहुल के किरदार में किसकी किस्म का फर्क नहीं आता.

चूंकि राहुल खुद अपनी बर्बादी के लिए ज़िम्मेदार है इसलिए उसे दर्शकों की सहानुभूति नहीं मिल पाती.

हालांकि आरोही को कामयाब बनाने के लिए वो जो प्रयास करता है उससे ज़रूर दर्शक कुछ पलों के लिए उससे जुड़ाव महसूस करेंगे लेकिन कहानी में ये ठीक तरह से ज़ाहिर नहीं किया गया है कि आखिर क्यों राहुल बर्बादी के रास्ते पर खुद को डाल लेता है और उसे शराब पीने की इतनी लत क्यों लग जाती है.

डार्क फिल्म

फिल्म के कई हिस्से खासे तनावपूर्ण और दुखद हैं जो फिल्म को डार्क बनाते हैं. इस वजह से दर्शकों के एक बड़े वर्ग को शायद ‘आशिकी 2’ अपील ना कर पाए.

युवा दर्शक फिल्म से कितना जुड़ेंगे ये बड़ा सवाल है क्योंकि आज का युवा, मौज मस्ती से परिपूर्ण कहानी देखना चाहता है और ज़्यादा तनाव नहीं लेना चाहता.

फिल्म का क्लाईमेक्स संतोषजनक नहीं है. लेकिन हां शगुफ्ता अली के संवाद कहीं कहीं पर खासा प्रभाव छोड़ते हैं.

अभिनय

आदित्य रॉय कपूर ने अच्छा काम किया है, लेकिन उनके किरदार में लोकप्रिय होने के मसाले कम है. क्योंकि भारतीय दर्शक शराब में डूबे, हमेशा तनाव और परेशान रहने वाले हीरो से जुड़ा हुआ महसूस नहीं करती.

श्रद्धा कपूर ने बेहतरीन अभिनय किया है. अपने कठिन और चुनौतूपर्ण किरदार को उन्होंने अच्छे से निभाया है.

महेश ठाकुर ने सीमित मौके मिलने के बाद भी अच्छा काम किया है,. शाद रंधावा, राहुल के सेक्रेटरी के रोल में जमे हैं.

निर्देशन

मोहित सूरी का निर्देशन अच्छा है. उन्होंने कहानी को काफी परिपक्व तरीके से हैंडल किया है.

जीत गांगुली मिथुन और अंकित तिवारी का संगीत काफी कर्णप्रिय है. तुम ही हो, सुन रहा है ना तू जैसे गाने बेहद अच्छे बन पड़े हैं.

हां, लेकिन गानों का फिल्मांकन उतना अच्छा नहीं है. राजू सिंह का बैकग्राउंड स्कोर बढ़िया है.

विष्णु राव का कैमरावर्क और देवेन मुरुदेश्वर की एडिटिंग भी काबिले-तारीफ है.

कुल मिलाकर आशिकी 2, एक अच्छी, संगीतमय फिल्म है. हीरो की ज़िंदगी पटरी पर लाने के लिए हीरोइन का बलिदान फिल्म का ट्रंपकार्ड है.

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