ये फिल्म है या गूगल का 'विज्ञापन' ?

द इंटर्नशिप

मैं फिल्में देखने जाता हूं इस उम्मीद से की एक अच्छी कहानी देखने को मिलेगी. अगर मेरी किस्मत अच्छी रही तो फिल्म थोड़ी गहरी और दमदार भी हो सकती है.

हालांकि आजकल तो फिल्मों में विभिन्न कंपनियों के उत्पाद भी फ्रेम दर फ्रेम देखने को मिल जाते हैं.

लेकिन हॉलीवुड की नई कॉमेडी फिल्म 'द इंटर्नशिप' ने ब्रांड प्लेसमेंट को किसी और ही जगह पहुंचा दिया है ; ये फिल्म नहीं, गूगल का अच्छा ख़ासा विज्ञापन है.

दो घंटे का विज्ञापन

इस फिल्म में अभिनेता ओवन विल्सन और विंस वॉन ने दो असफल सेल्समैन की भूमिका निभाई है जो कुछ नए की तलाश में गूगल के इंटर्नशिप प्रोग्राम में दाखिल होते हैं.

Image caption द इंटर्नशिप में 'गूगल' फिल्म का केंद्रीय बिंदू है.

ज़्यादातर सीन इस सर्च इंजन के मुख्यालय में दिखाए गए हैं जहां गूगल के उत्पाद दिख रहे हैं और पूरी फिल्म ये दिखाने की कोशिश में है कि काम करने के लिए ये कंपनी सर्वश्रेष्ठ है.

शायद हो भी लेकिन जब आप फिल्म में एक गूगल कर्मचारी को ये बोलते हुए पाते हैं कि "हम यहां जो करते हैं उससे लोगों की ज़िंदगी थोड़ी बेहतर हो जाती है" तब आप सोच में पड़ जाते हैं कि मैं एक फिल्म देख रहा हूं या फिर किसी एजेंसी के कॉपीराइटर द्वारा तैयार किया गया विज्ञापन ?

हविंगटन पोस्ट में अमरीका के मनोरंजन लेखक माइक राइन ने लिखा है कि 'द इंटर्नशिप' को दरअसल मुफ्त में दिखाया जाना चाहिए क्योंकि ये तो गूगल का दो घंटे का 'विज्ञापन' है.

गूगल के लिए सुनहरा मौका

इसकी जानकारी तो नहीं है कि गूगल और 'द इंटर्नशिप' के बीच क्या बात हुई है लेकिन अभिनेता विंस का कहना है कि कंपनी ने फिल्म में किसी तरह का पैसा नहीं लगाया है.

ऐसा कहा जा रहा था कि गूगल ने निर्माताओं के साथ मिलकर काम किया और स्क्रिप्ट भी पढ़ी लेकिन फिल्म के निर्देशक शॉन लेवी के मुताबिक कंपनी ने किसी तरह की संपादकीय दख़लअंदाज़ी नहीं की है.

अगर गूगल के नज़रिए से देखें तो उनके ब्रांड के प्रचार का ये सुनहरा अवसर था और मुख्य कार्यकारी अधिकारी लैरी पेज ने माना भी कि वो इस फिल्म से इसलिए जुड़े क्योंकि उनकी कंपनी मार्केटिंग में कच्ची है.

प्रमोशन की सीमा पार

Image caption 2002 में आई फिल्म 'डाय अनैदर डे' में भी कई उत्पादों को दिखाया गया था.

हालांकि 'द इंटर्नशिप' कोई पहली फिल्म नहीं है जिसने ब्रांड प्रमोशन की सीमा पार कर दी हैं. इससे पहले भी हॉलीवुड की कई फिल्मों ने ये काम किया है.

2002 में बॉंड फिल्म 'डाय अनैदर डे' को 'बाय अनैदर डे' कहा जाने लगा था क्योंकि बहुत सारी कंपनियों ने फिल्म में अपने उत्पाद दिखाने के लिए पैसे दिए थे.

हालांकि फिल्म अध्ययन से जुड़े लोगों का मानना है कि द इंटर्नशिप ने तो हद ही कर दी है. गूगल ये दिखाने की कोशिश में है कि वो कोई विशालकाय कॉरपॉरेट नहीं बल्कि एक बेहद ही 'प्यारी' सी जगह है जहां सब बहुत 'खुश' है और 'प्यार' से काम कर रहे हैं.

कुछ मीडिया विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि गूगल के लिए पब्लिसिटी पाने का ये एक अच्छा मौका है.

वैसे भी स्नोडेन के खुलासे के बाद कई लोगों का बड़ी आईटी कंपनियों पर से भरोसा उठता जा रहा है. ऐसे में ये फिल्म गूगल की छवि को बचाए रखने में मदद कर सकता है.

विज्ञापन का दख़ल

Image caption द इंटर्नशिप में ने ओवन विल्सन और विंस वॉन मुख्य भूमिका निभाई है

हालांकि बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म बहुत कमाल नहीं कर पाई है लेकिन इसके बावजूद मुझे लगता कि अब इस फिल्म की देखा-देखी दूसरी और कंपनियां भी फिल्म का केंद्रीय बिंदू बनने की फिराक़ में रहेंगी.

मार्केटिंग के लोगों की आक्रमकता इस हद तक बढ़ गई है कि विज्ञापन हमारी ज़िंदगी में पूरी तरह दाखिल कर गए हैं फिर वो ऑनलाइन हो या फिर फिल्में.

'द इंटर्नशिप' जैसी फिल्म भी ऐसा ही कुछ कर रही है जिसमें आपको गूगल की दुनिया में बंद कर दिया जाता है - एक अच्छी ख़ासी फिल्म को बिना रुकावट के खेद वाला विज्ञापन बना दिया गया है.

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