सेक्स कॉमेडी की आड़ में फूहड़ मज़ाक?

'ग्रैंड मस्ती'
Image caption 'ग्रैंड मस्ती' के ट्रेलर को कई लोगों ने यूट्यूब पर बेहद 'अश्लील' और 'अभद्र' करार दिया.

इंद्र कुमार निर्देशित फिल्म 'ग्रैंड मस्ती' का ट्रेलर आजकल यूट्यूब पर चर्चा का विषय बना हुआ है. कुछ लोगों को फिल्म का प्रोमो बेहद 'अभद्र' लग रहा है.

रितेश देशमुख, आफ़ताब शिवदासानी और विवेक ओबेरॉय अभिनीत इस फिल्म के कई संवाद बेहद अश्लील स्तर के हैं और उनका विवरण यहां देना संभव नहीं है. इससे पहले इंद्र कुमार नौ साल पहले 'सेक्स कॉमेडी' मस्ती बना चुके हैं.

यूट्यूब पर ट्रेलर देख रहे टिप्पणियां कर रहे लोग फिल्म का विरोध दो स्तरों पर कर रहे हैं.

कुछ लोगों को फिल्म बेहद 'अभद्र' लग रही है वहीं कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि सेक्स कॉमेडी की आड़ में किया गया ये बचकाना प्रयास है.

हालांकि कई लोगों को फिल्म का प्रोमो पसंद भी आ रहा है और वे इसे 'फनी' करार दे रहे हैं.

'बदल गया ज़माना'

बीबीसी ने इस मुद्दे पर सीधे फिल्म के निर्देशक इंद्र कुमार की राय जाननी चाही.

इंद्र कुमार ने 'ग्रैंड मस्ती' का बचाव कुछ ऐसे किया, "आज हर किसी के फोन पर गंदे-गंदे एसएमएस होते हैं. ख़ुद मेरे बच्चों को ये मैसेज आते हैं. और दिलचस्प बात ये है कि बच्चे बड़े शौक से अपने मां-बाप को ऐसे मैसेज सुनाते हैं. तो जब ज़माना बदल रहा है तो एक फिल्मकार होने के नाते मुझे भी बदलना होगा."

एक और सेक्स कॉमेडी फिल्म 'डेल्ही बेली' में काम कर चुके अभिनेता वीर दास से जब बीबीसी ने पूछा कि क्या इस तरह की फिल्में दर्शकों की समझ को कम करके नहीं आंकती कि जो भी दर्शकों को परोसो उन्हें पसंद आ ही जाएगा?

क्या फिल्मकार दर्शकों को नासमझ मान कर चल रहे हैं? इस पर वीर दास बोले, "बिलकुल ग़लत. कोई भी फिल्मकार दर्शकों को कम अक्लवाला मानने की भूल कर ही नहीं सकता. करोड़ों के बजट में क्या कोई ये सोचकर फिल्म बनाएगा कि दर्शक नासमझ हैं."

"मेरे ख्याल से हर तरह की कॉमेडी का एक अलग दर्शक वर्ग होता है. कुछ कॉमेडी फिल्मों को युवा दर्शक पसंद करते हैं कुछ कॉमेडी फिल्मों को बुज़ुर्ग दर्शक पसंद करते हैं."

वीर दास के मुताबिक़ भारत में हमेशा अच्छे कंटेट वाली फिल्में चलती रही हैं. इसलिए किसी फिल्म के कंटेट पर उंगली उठाना ठीक नहीं होगा.

ज़्यादा 'अभद्रता' ठीक नहीं

Image caption 'डेल्ही बेली' में काम कर चुके अभिनेता वीर दास कहते हैं कि फिल्मकार दर्शकों को नासमझ मानकर भला एक फिल्म में करोड़ों क्यों लगाएगा

वरिष्ठ फिल्म समीक्षक कोमल नाहटा की राय अलग है.

वो कहते हैं, "इस तरह की सेक्स कॉमेडी अगर बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से बनाई जाए और डायलॉग थोड़ा सा हिंट करते हुए हों तो चलता है. लेकिन जब ये कुछ ज़्यादा होने लगता है तो दर्शक ऊब जाते हैं. तो फिल्मकारों को ज़रा सावधान रहना चाहिए."

कोमल नाहटा कहते हैं कि सेक्स कॉमेडी और अभद्र डायलॉग की भरमार रखकर फिल्म को हिट कराने की गारंटी नहीं ली जा सकती.

उनके मुताबिक, "अगर आप अनुपात देखें तो ऐसी दस फिल्मों में से दो या तीन ही सफल होती हैं. बाकी तो असफल ही हो जाती हैं ना."

'अमेरिकन पाई' से बढ़कर ?

Image caption समीक्षक कोमल नाहटा मानते हैं कि 'अश्लीलता' की हद पार कर जाए तो दर्शक भी ऊब जाते हैं

लेकिन इंद्र कुमार ग्रैंड मस्ती के बारे में कई बड़े-बड़े दावे करने से नहीं चूकते.

वह कहते हैं, "हॉलीवुड की अमेरिकन पाई और हैंगओवर जैसी सेक्स कॉमेडी को तो हम भारतीयों ने भी बहुत पसंद किया. और मेरा दावा है कि ग्रैंड मस्ती इन दोनों हॉलीवुड फिल्मों से बढ़कर साबित होगी."

और जिन दर्शकों को ऐसी फिल्मों या ऐसे विषय से सख्त आपत्ति है उनके लिए इंद्र कुमार का साफ और सख्त संदेश है, "मैंने फिल्म के प्रोमो में साफ लिखा है. सिर्फ एडल्ट कॉमेडी के शौकीनों के लिए. अगर आपको ये पसंद नहीं है तो कृपया फिल्म देखने ना आएं."

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