जब ऋतिक किराए के घर से निकाले गए

  • 3 सितंबर 2013
फिल्म

मुंबई के बेहद पॉश इलाके में करोड़ों के अपार्टमेंट में रहने वाले ऋतिक रोशन कभी किराया नहीं दिए जाने के कारण घर से निकाल दिए गए थे.

सुपर स्टार कहलाने वाले ऋतिक रोशन मुंबई के जुहू जैसे पॉश इलाके में आलीशान अपार्टमेंट में रहते हैं. हर तरह के ऐशो-आराम से सजा करोड़ों का यह अपार्टमेंट ''पालाजो'' बिल्डिंग में स्थित है. मगर एक समय ऐसा भी था, जब घर का किराया न भर पाने के एवज में मकान मालिक ने उनके पिता और पूरे परिवार को घर से निकाल दिया था.

बिना पंखे के फर्श पर बिताई तीन रातें

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि राकेश रोशन और ऋतिक रोशन एक अमीर फ़िल्मी परिवार से ताल्लुक रखते हैं. पर अपने हिस्से का संघर्ष तो उन्होंने भी किया है.

बीबीसी से हुई ख़ास मुलाक़ात में ऋतिक ने बताया, ''मुझे याद है कि उन दिनों हम एयरइंडिया के लोटसे बिल्डिंग में किराए पर रहते थे. अचानक एक दिन कुछ लोग आए और मम्मी ने बोरिया बिस्तर बांधना शुरू कर दिया. असल में उस मकान से हमें निकाल दिया गया था. हमारे पास किराए के पैसे नहीं थे. तब मैं और मेरी बहन काफी छोटे थे. हम लोग खेलते-कूदते हुए अपने नाना (जाने-माने फिल्मकार जे ओम प्रकाश) के घर पहुँच गए."

ऋतिक ने आगे बताया, "नाना का जुहू में महलों जैसा बंगला था. मम्मी भी हमारे साथ आईं. पर पिता (राकेश रोशन) के आत्मसम्मान को ये गवारा न था. वे हमारे साथ नहीं आए. वे अपने भाई के यहाँ जाकर सान्ताक्रुज़ में रहे. उस वक़्त किराया था महज दस हज़ार रुपए."

उन्होंने कहा, "कुछ छह महीने तक हम लोग अपने नाना के यहाँ रहे. फिर जैसे ही छह महीनों में मेरे पापा ने कुछ पैसे इक्कट्ठे किए, उन्होंने इलेवेंथ रोड पर एक फ्लैट लिया. आनन-फानन में आकर हमें ले गए. आपको पता है, उस घर में एक भी फर्नीचर नहीं था. पूरी तीन रात हम लोगों ने एक कमरे में ज़मीन पर एक चादर के साथ सो कर बिताई. कमरे में पंखा तक नहीं था. कुछ भी नहीं था. कुछ था तो बस खाली दीवारें और फर्श.''

मेरी माँ के पास महानता दर्शाने का मौका न था

सभी जानते हैं कि हीरो के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए राकेश रोशन को बहुत मशक्कत करनी पड़ी थी. पर अपने बेटे ऋतिक को उन्होंने पहली ही फिल्म,''कहो ना प्यार है'' में स्टार का दर्जा दिला दिया. अपनी ज़िन्दगी और करियर में ऋतिक अपने पिता के योगदान को बहुत मानते हैं.

वे कहते हैं,''मेरी ज़िंदगी पर सबसे ज्यादा प्रभाव मेरे पापा का ही रहा है. उनके जीवन की कहानी से ही मैं सीख पाया कि ज़िंदगी में क्या है? पर मैं आपको एक गहरी बात बताता हूँ. मेरे पिता तो एक एक्टर थे, उनके पास अपनी कहानी कहने के लिए एक वर्ग था. मगर मेरी माँ के बारे में सोचिए, या किसी पत्नी के बारे में जो अपने पति को सपोर्ट करती है. उसके पास महानता दिखाने का कोई मौका या दर्शक नहीं होता."

ऋतिक बताते हैं, "पर बीते सालों में वे जिस तरह चट्टान की मानिंद मेरे पिता के साथ रहीं, वही विवाह है, समर्पण है, प्यार है. हम सभी को हीरे की चाह होती है. पर दो लोगों को एक-दूसरे को पहले कोयले के रूप में स्वीकार करना पड़ता है. और इन्तजार करना पड़ता है की वो हीरे में तब्दील हो. अपने पिता से मैंने जो मूल्य व संस्कार सीखे हैं, उनका पचास प्रतिशत भी अगर अपने बेटों को दे पाया तो खुद को सफल पिता मानूंगा.''

ऑपरेशन टेबल पर गा रहा था

Image caption अपनी ज़िन्दगी और करियर में ऋतिक अपने पिता के योगदान को बहुत मानते हैं.

यह भी कम दिलचस्प नहीं है ऋतिक रोशन हिंदी फिल्म जगत में खूबसूरती के लिहाज से ग्रीक गॉड माने जाते हैं. मगर उन्हें अपनी निजी ज़िंदगी में सबसे ज़्यादा शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा है.

ऋतिक बचपन में काफी मोटे थे. एक समय ऐसा भी था जब वे हकलाया करते थे. फिल्मों में नायक बनने के बाद भी उन्हें कई हादसों से गुजरना पड़ा. फिर वह चाहे उनके घुटने का ओपरेशन हो या दिमाग का.

ज़िन्दगी के उस मुश्किल वक्त के बारे में वे बताते हैं,''ब्रेन सर्जरी के मेरे आखिरी ऑपरेशन के वक़्त डाक्टरों ने बताया कि मेरे दिमाग में ढेर सारा खून भर गया है, उसे छेद करके निकालना पड़ेगा. ऐसा सुनकर कोई भी बुरी तरह घबड़ा जाए. पर मैंने अपना मूड तीन सेकंड में बदल डाला. उस स्थिति को सुपर हीरो की तरह ट्रीट किया. ऑपरेशन टेबल पर भी मैं गा रहा था. मैं जगा हुआ था."

वे बताते हैं, "मेरी ज़िंदगी की जो शुरुआती दिक्कतें थीं, वे आज भी हैं. मेरे घुटने आज भी तकलीफ देते हैं, मेरी पीठ में आज भी दर्द रहता हैं, मेरे कंधे आज भी टूटे हुए हैं, अब तो दिमाग में छेद भी है."

लगा था ''कृष-३ '' नहीं बन पाएगी

१०० करोड़ की लागत से बनी ''कृष-३'' जल्द ही प्रदर्शित होगी. मगर फिल्म के निर्माण के दौरान एक दौर ऐसा भी आया जब फिल्म के निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन ने फिल्म बनाने का इरादा छोड़ दिया था.

ऋतिक बताते हैं, ''स्क्रिप्ट पूरी हो चुकी थी. हम बहुत खुश थे. पापा ने आकर बताया कि जो स्पेशल इफेक्ट्स सोचे गए हैं वो हम इंडिया में कर पाएंगे या नहीं, पता नहीं. हम इस फिल्म से पैसे भी नहीं कमाने वाले."

वे आगे कहते हैं, "मैंने पापा पर दबाव डालकर फिल्म शुरू करवाई. फिर डॉक्टरों ने उसी दौरान मुझे कह दिया कि मैं ''कृष-३'' जैसी फिल्म ज़िंदगी भर नहीं कर सकता. छह महीने मुझे पूरी तरह से बेड रेस्ट लेना पड़ेगा."

सेहत आड़े आई

Image caption ऋतिक रोशन को अपनी निजी ज़िंदगी में सबसे ज़्यादा शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा है.

ऋतिक ने कहा, "मुझे डबल स्लिप डिस्क था. मेरी हालत देखकर पापा ने दोबारा फिल्म की शूटिंग रोकने का फैसला कर दिया. ऐसे हालात से मैं तब भी गुज़रा था, जब २००७ में डॉक्टरों ने कह दिया था कि मेरे घुटनों में गठिया हो गया है और मैं सिर्फ एक साल एक्शन कर पाऊंगा. मगर तब भी दुनिया भर में ढूंढ कर मैंने इलाज करवाया. आज मेरे घुटने पहले से ज़्यादा मज़बूत हैं."

ऋतिक का कहना है, "मुझे इलाज मिला और फिर मैंने 80 दिन लगातार एक्शन किया. इतना ही नहीं कृष के लिए मुझे चमड़े की जैकेट पहनना पड़ता था, चिपचिपा ग्लू लगाकर मास्क लगाना पड़ता था और हैदराबाद की गर्मी में फिल्मसिटी के अंधेरों में शूटिंग करनी पड़ती थी.''

कृष-३ में ऋतिक रोहित,कृष्णा और कृष जैसे तीन किरदार निभा रहे हैं. राकेश रोशन निर्मित-निर्देशित ''कृष-३'' में ऋतिक के अलावा प्रियंका चोपड़ा, विवेक ओबेरॉय, कंगना रानावत जैसे कलाकार हैं. ये बॉलीवुड की सुपर हीरो वाली साइंस फिक्शन फिल्म है.

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