फ़िल्म रिव्यू: 'ग्रैंड मस्ती' में कितनी मस्ती?

ग्रैंड मस्ती फ़िल्म का एक दृश्य

रेटिंग: ***1/2

बिज़नेस रेटिंग: ***1/2

मारुति इंटरनेशनल की फ़िल्म 'ग्रैंड मस्ती' (ए), 'मस्ती' फ़िल्म का सीक्वल है, यह तीन विवाहित और ख़ुशहाल लोगों की कहानी है जो फ़िल्म में मौजमस्ती की तलाश भटकते नज़र आते हैं.

डॉ. अमर सक्सेना (रितेश देशमुख), मीत मेहता (विवेक ओबरॉय) और प्रेम चावला (आफताब शिवदासानी) दोस्त हैं. कॉलेज के दिनों में वे हर वक़्त लड़कियों के बारे में सोचते रहते हैं.

रॉबर्ट परेरा (प्रदीप रावत) उनके कॉलेज के बेहद सख़्त प्रिंसिपल होते हैं.

वो कॉलेज में एक आदेश जारी करते हैं कि अश्लील हरकतों में शामिल होने वाले लड़के-लड़कियों के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाए जाएंगे.

कालेज प्रिंसिपल से मिली सज़ा के बाद कॉलेज के एक लड़के हार्दिक (सुरेश मेनन) को मानसिक अस्पताल जाना पड़ता है.

छह साल के बाद कॉलेज के सभी पूर्व-छात्रों को अपने-अपने जीवनसाथी के साथ कॉलेज में एक सप्ताह की छुट्टी बिताने के लिए बुलाया जाता है.

रोमांस

संयोग से डॉ. अमर सक्सेना की पत्नी ममता ( सोनाली) उनके साथ नहीं आ पाती है क्योंकि वो अपने नवजात बच्चे की देखभाल में व्यस्त हैं, मीत की पत्नी उन्नति (करिश्मा तन्ना) भी साथ आने से मना कर देती है क्योंकि उन्हें अपने बॉस (कैप्टन बिक्रम जीत सिंह) के साथ तुर्की जाना होता है और प्रेम की पत्नी भी उनके साथ आने से मना कर देती है क्योंकि उन्हें अपने परिवार में बड़ों की देखभाल करनी होती है.

कॉलेज के तीनों दोस्त 'मिलन समारोह' में अपनी पत्नियों के बग़ैर जाने का फ़ैसला करते हैं और विवाहेतर संबंधों की योजना बनाते हैं. संयोग से कॉलेज के प्रिंसिपल राबर्ट परेरा दो दिन के लिए देश से बाहर गए होते हैं.

वो कॉलेज परिसर में किसी भी तरह की 'ग़लत गतिविधि' और अश्लील बातचीत को रोकने के लिए कुछ ख़ास लोगों को नियुक्त करते हैं जो सभी पर नज़र रखते हैं.

कॉलेज में डॉ. अमर की मुलाकात एक बिंदास लड़की मैरी (ब्रूना अब्दुल्ला) से होती है जो अपनी मर्जी से उसके साथ हमबिस्तर होने तक को तैयार है.

मीत की मुलाकात मार्लो से होती है और वो उस पर फ़िदा हो जाता है.

प्रेम अपनी टीचर रोज़ (मरियम जकारिया) को फंसाने की कोशिश करता है, जो उसे रात को अपने बेडरूम में आने का निमंत्रण देती है.

मनोरंजक दृश्य

इससे पहले कि तीनों दोस्त अपने-अपने पार्टनर के क़रीब आने की योजना को अंजाम देते, राबर्ट परेरा की कॉलेज में वापसी हो जाती है. यह पता चलता है कि रोज़ रॉबर्ट की दूसरी पत्नी हैं, मैरी उनकी पहली पत्नी की लड़की है और मार्लो उनकी बहन है.

रॉबर्ट को शक होता है कि तीनों जरूर उनकी पत्नी, बेटी और बहन के साथ संबंध बनाना चाहते हैं, इसलिए वह उनका पीछा करता है. अमर, मीत और प्रेम शहर से भागने की ताक में होते हैं कि तीनों की पत्नियां वहां पहुंच जाती हैं.

रॉबर्ट परेरा और तीनों दोस्तों के बीच चूहे-बिल्ली का खेल शुरू हो जाता है. इसी बीच हार्दिक पागलखाने से बाहर आ जाता है और परेरा को जान से मारना चाहता है.

वह अमर, मीत और प्रेम को रॉबर्ट परेरा को मारने के लिए ब्लैकमेल करता है और धमकी देता है कि उसके पास मैरी, मार्लो और रोज़ के साथ उनके रोमांस की एमएमएस क्लिप है. अगर वो रॉबर्ट को नहीं मारते तो वह उन्हें सार्वजनिक कर देगा.

क्या तीनों दोस्त रॉबर्ट को मार देते हैं और अपनी जान बचाते हैं? या वे परेरा को बचाते हैं और आपनी जान जोख़िम में डाल देते हैं? क्या उनकी पत्नियों को अपने पतियों के बारे में पता चलता कि वे उन महिलाओं के साथ सोने तक को तैयार थे? क्या तीनों महिलाओं को रॉबर्ट परेरा प्रताड़ित करता है या वे विद्रोह कर देती हैं?

अभिनय

Image caption यह फ़िल्म युवाओं को पसंद आ सकती है.

तुषार हीरानंदानी और मिलाप मिलन जावेरी की कहानी और स्क्रीन प्ले में प्रवाह की जगह मज़ाक का जमघट नज़र आता है. फ़िल्म के कुछ दृश्य हंसाने वाले और मनोरंजक हैं तो कुछ दृश्य बेहद सपाट और बोर करने वाले हैं.

इंटरवल के बाद फ़िल्म के दृश्य अपना प्रभाव छोड़ने में विफल रहते हैं. इसके कुछ दृश्य बेहद फूहड़ हैं. फ़िल्म का अंत और बेहतर हो सकता था अगर इसके विभिन्न दृश्यों के बीच के सिलसिले को और उभारा गया होता. अंतिम दृश्य के संवाद फ़िल्म के अंत को बहुत साधारण बना देते हैं.

फूहड़ दृश्यों और संवाद के बीच अभिनय की बारीकियां अक्सर अनदेखी रह जाती हैं. रितेश देशमुख ने भावशून्य हास्य वाले दृश्यों में अच्छा अभिनय किया है. विवेक ओबरॉय अच्छे और गंभीर नज़र आते हैं. आफताब शिवदासानी को अपना वज़न कम करने और अभिनय बेहतर करने की जरूरत है.

तुलसी की भूमिका में मंजरी फणनिस का अभिनय औसत रहा है. करिश्मा तन्ना ने उन्नति की भूमिका बहुत अच्छे से निभाई है. सोनाली ममता की भूमिका में ठीक-ठाक लगी हैं. कैनात अरोरा ने आकर्षक दिखने की भरपूर कोशिश की है और अत्यधिक खुलेपन का प्रदर्शन किया है.

ब्रूना अब्दुल्ला और मरियम जकारिया अपने प्रदर्शन से फ़िल्म में ग्लैमर और कामुकता को बढ़ावा देते हैं. प्रदीप रावत का अभिनय बढ़िया है. सुरेश मेनन अपनी छाप छोड़ते हैं.

निर्देशन

इंद्र कुमार का निर्देशन अच्छा और बिंदास है. फ़िल्म अपने ख़ास दर्शक वर्ग को बहुत आकर्षित करती है.

फ़िल्म में आनंद राज आनंद और संजीव दर्शन का संगीत, कुमार और मनोज दर्पण के गीत अपनी लय और तेज़ी के कारण आकर्षित करते हैं.

गणेश आचार्य और चिन्नी प्रकाश की गीतों की कोरियोग्राफ़ी ठीक है. फ़िल्म का पार्श्व संगीत प्रभावित करता है.

ऋतुराज नारायण की सिनेमेटोग्राफ़ी और रजत पोद्दार के सेट अच्छे बन पड़े हैं. आरपी यादव के ऐक्शन दृश्य सामान्य हैं. संजय अकेला की एडिटिंग बेहतरीन है.

फ़िल्म 'ग्रैंड मस्ती' युवाओं के साथ-साथ ख़ास दर्शक वर्ग और 'फ्रंट बेंचर्स' को पसंद आएगी.

यह फ़िल्म परिवार के साथ देखने योग्य नहीं है.

लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फ़िल्म कमाई कर सकती है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार