क्या आप गंदे नायकों को अपना हीरो मानेंगे?

  • 23 सितंबर 2013

ब्रेकिंग बैड अमरीकी टेलीविज़न का ऐसा शो है, जिसे बहुत से आलोचकों ने अब तक का सबसे महान शो बताया है और इसके सिर्फ़ दो एपिसोड अब एयर होने बाकी हैं.

ब्रेकिंग बैड एक हाईस्कूल कैमिस्ट्री टीचर वॉल्टर व्हाइट के क्रियाकलापों की कहानी है. उसे जब पता चलता है कि उसे फेफड़े का कैंसर है, तो वह बुरा बनने का फ़ैसला करता है और परिवार के लिए पैसा जुटाने की कोशिश में क्रिस्टल मीथेमफ़ेटामाइन बनाना शुरू करता है. क्रिस्टल मीथेमफ़ेटामाइन एक ख़ास किस्म की ड्रग है, जो इंसान का मूड और उसका व्यवहार बदल सकती है.

शो निर्माता विंस गिलीगन का कहना है कि उनकी योजना एक ऐसे शख़्स की कहानी सुनाने की थी, जो ‘मिस्टर चिप्स से स्कारफ़ेस में बदलता है’.

तो एक ड्रग डीलर, हत्या के लिए उतारू सनकी नायक किरदार प्राइमटाइम अमरीकी टेलीविज़न शो पर आया कैसे?

एक शो जो वॉल्ट से ज़्यादा लोकप्रिय है, अब नैतिकता के गर्त में गिर चुका है.

मनोरंजन वेबसाइट सेलन के लेखक डेनियल डी अडारियो कहते हैं कि पिछले दो दशकों में टीवी के प्रमुख किरदार काफ़ी बदल चुके हैं.

‘किरदार गंदे से गंदे होते गए हैं- आज इस तथ्य पर यक़ीन करना मुश्किल है कि एक वक़्त था कि टीवी सिरीज़ के नायक कमोबेश साफ़-सुथरे हीरो हुआ करते थे.’

यह ट्रैंड 1993 तक रहा, जब पुलिस ड्राम एनवायपीडी ब्ल्यू सिरीज़ शुरू हुई. इस सिरीज़ को अमरीकन फ़ैमिली एसोसिएशन ने ‘सॉफ़्ट-कोर पोर्न’ का दर्जा दिया.

इसमें मुख्य नायक एंडी सीपोविज़ दारूबाज़ी, व्यभिचार और बेवफ़ाई से जूझता दिखाई दिया था.

नैतिक भूलभुलैया

फिर बदलाव क्यों? टेलीविज़न किरदारों के चरित्र में नैतिक बदलाव को निश्चित तौर पर अमरीकी टीवी केबल नेटवर्कों के विस्तार से सहारा मिला है.

इन नेटवर्कों ने प्रोग्राम निर्माताओं को ऐसे कंटेंट को बनाने की छूट दी, जिसकी बहुत अपील नहीं थी और उन्हें वह सब कुछ दिखाने का मौक़ा दिया, जिसकी इजाज़त नहीं थी.

हफ़िंगटन पोस्ट की टीवी आलोचक मॉरीन रयान इन टीवी किरदारों के नैतिक चरित्र को इनके पूर्ववर्तियों के मुक़ाबले कमज़ोर पाती हैं.

वह कहती हैं, ‘अब मुख्यधारा की कॉमेडी और ड्रामा के बीच लाइन खींचना काफ़ी मुश्किल है क्योंकि इसमें लचीलापन बहुत है. अगर ग़ैरक़ानूनी काम करने वालों के व्यवहार की कहानी रोचक है और किरदारों के कार्यकलाप किसी भी तरह न्यायोचित हैं तो एचबीओ, शोटाइम, एएमसी, एफ़एक्स और दूसरे केबल नेटवर्क के मामले में तो यह रेखा कहीं भी हो सकती है.’

भलाई के लिए बुराई!

एचबीओ के द सोपरानोस में ‘हीरो’ के खांचे को लगातार तोड़ने वाला किरदार टोनी सोपरानो मुख्य किरदार है.

टोनी वो शख़्स है, जिसे अपने परिवार की बेहद परवाह है (पारंपरिक और आपराधिक दोनों) और लगता है मानो वह अमरीकी इतिहास में जगह पाने को बेक़रार है.

वह सिरीज़ के पायलट एपिसोड में पूछता है, ‘गैरी कूपर को क्या हुआ? मज़बूत ख़ामोश इंसान. वह अमरीकी था. उसे अपनी भावनाओं का पता नहीं था. उसने वही किया, जो वह करता.’

भले ही टोनी गैरी कूपर बनना चाहता हो, पर असल में वह टीवी के नए अमरीकी एंटी हीरो का अवतार है, एक इंसान जो अपने ही ग़ैरक़ानूनी तरीक़ों में उलझा है और अपने कामों को बड़ी अच्छाई के लिए ज़रूरी बताता है- चाहे वह बड़ी अच्छाई का काम सिर्फ़ उसके लिए ही क्यों न हो.

मनोरंजन अख़बार द एवी क्लब की लेखक डोना बोमैन एंटी हीरो को ‘कामयाबी की ज़रूरत से सराबोर और सुरक्षा पाने के लिए कुछ भी ख़तरनाक करने को तैयार’ शख़्स के बतौर देखती हैं.

वह कहती हैं, ‘हम जानते हैं कि आज की स्थितियों में हम पूरी तरह साफ़-सुथरे नहीं हो सकते और यह सिर्फ़ बताता है कि हम जो चाहते हैं उसे पाने के लिए कितना और गिर सकते हैं.’

एलए स्टोरी

टोनी सोपरानो बेशक 9/11 के बाद के जटिल और मुश्किलों से घिरे अमरीका का किरदार हो, पर इस शो को प्रेरणा लॉस एंजेलेस पुलिस के एक भ्रष्टाचार के मामले से मिली, जो 1990 के दशक में हुआ था.

इसमें दिखाया गया है कि एक इंसान जो चाहता है, उसे हासिल करने के लिए कितना गिर सकता है.

द शील्ड यूएस केबल चैनल एफ़एक्स पर 2002 में प्रसारित होना शुरू हुआ और इसमें मुख्य किरदार डिटेक्टिव विक मैकी को पेश किया गया था, जिसका खुद के बारे में कहना है- ‘एक अलग तरह का पुलिसकर्मी.’

सात सीज़न तक उसका व्यवहार उन अपराधियों से भी ख़राब था, जिनका वह पीछा कर रहा था और इस पर भी लोगों को उस पर यक़ीन था.

डेनियल डी अडारियो समझाते हैं, ‘एक टीवी शो वहां तक चलता है जब तक उसकी इजाज़त होती है. अगर इसमें कोई ढांचा नहीं है, तो शो खुद को भ्रमित करने वाली स्थितियों में ढाल लेगा.’ टोनी सोपरानो से तुलना करें तो द शील्ड में मैकी को ‘सुधरने के और भी कम मौक़े’ हासिल थे.

केबल नेटवर्क ज़िम्मेदार

मॉरीन रयान द सोपरानोस और द शील्ड को अपने समय के दो सबसे प्रभावशाली शो के बतौर देखती हैं.

वह कहती हैं, ‘द शील्ड और द सोपरानोस से शुरू होने के कुछ साल बाद और जब इस बात की कम परवाह थी कि आप लोगों और उनके कामों को कैसे पेश करते हैं, लगा मानो कोई बांध टूट गया हो.’

वह आगे कहती हैं, ‘निर्माताओं को न केवल मुश्किलभरे क्षेत्र में घुसने की इजाज़त दी गई थी बल्कि उन्हें बहुत से केबल नेटवर्कों से भी बढ़ावा मिला, जो सभी ऐसे शो के ज़रिए अपनी पहचान बनाना चाहते थे जिन्हें ख़तरनाक और विध्वंसकारी माना जाता था.’

नए एंटी हीरो

द सोपरानोस ने बेशक एंटी हीरो के किरदार की शुरुआत की, लेकिन टोनी के अलावा इस बीच कई दूसरे किरदार आ गए हैं.

24, हाउस, डैक्स्टर, द वायर, डेडवुड, हाउस ऑफ़ कार्ड्स और मैडमैन जैसे शोज़ ने नायक के पारंपरिक स्वरूप को चुनौती दी और दिखाया कि आप किसी किरदार को कहां तक ले जा सकते हैं और कितनी देर तक दर्शक को उससे जोड़े रख सकते हैं.

टोनी सोपरानो, विक मैके और डॉन ड्रेपर सभी को उनके संदिग्ध व्यवहार के बावजूद उनके चाहने वाले मौजूद हैं.

बोमैन का मानना है कि इस तरह के किरदारों को दर्शकों से जोड़ने के लिए ‘हमें समझना होता है कि जो वो करते हैं तो क्यों करते हैं; उनके कार्यकलाप किसी परिस्थिति से जुड़े होने चाहिए, जिसे हमें समझना होता है.’

सहानुभूति कैसे

तो वाल्टर व्हाइट और उसमें बदलाव कैसे आएगा? शायद जब सिरीज़ ख़त्म होगी, तभी हम पूरी तरह आंकलन कर पाएंगे कि वह टीवी के एंटी हीरो यानी ‘अपराधियों की श्रेणी’ में कहां खड़ा है.

मगर मौत और मुक्ति (अगर उसकी गुंजाइश हो भी तो) भी व्हाइट के अपराधों के असर को पांच साल में नहीं बदल पाया है.

मॉरीन रयान इसे यूं कहती हैं, ‘कम ही शोज़ ऐसे हैं, जिनके मुख्य किरदारों का साथ देने की आपकी इच्छा होगी, चाहे उन्होंने कुछ भी किया हो.

मगर अव्वल दर्जे के शो आपको याद दिलाते हैं कि नायक ऐसा नहीं कि आप उसका अनुसरण करें और ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि आप उनसे सहानुभूति कैसे रखेंगे.’

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार