गब्बर सिंह कैसे बच गया ज़िंदा?

  • 9 नवंबर 2013
'शोले'
Image caption ('शोले' को थ्री डी में परिवर्तित किया गया है. ये संस्करण अगले साल जनवरी में रिलीज़ होगा)

गब्बर सिंह को ठाकुर अपने जूतों के नीचे कुचलने की पूरी तैयारी कर लेता है. वो उसे मारने ही वाला होता है कि तभी पुलिस आ जाती है. गब्बर को क़ानून के हवाले कर दिया जाता है. ठाकुर को समझाया जाता है कि अपराधी को सज़ा देना क़ानून का काम है.

ठाकुर को बात समझ में आ जाती है और फिर लात, घूंसों से पिटे ख़ून में सने गब्बर सिंह को पुलिस अपने साथ ले जाती है.

साल 1975 की सुपरहिट फ़िल्म 'शोले' का सब ने यही अंत देखा है.

लेकिन क्या आपको पता है कि फ़िल्म की मूल स्क्रिप्ट में गब्बर सिंह, ठाकुर के हाथों मारा जाता है. फिर ये बात दर्शकों के सामने क्यों नहीं आई. ये बताया फ़िल्म की लेखक जोड़ी सलीम-जावेद के जावेद यानी जावेद अख़्तर ने.

(वो चरित्र कलाकार)

उन्होंने मीडिया को बताया, "वो इमरजेंसी का ज़माना था. हमसे सरकारी अधिकारियों ने कहा कि भाई गब्बर सिंह को मारना ग़ैर क़ानूनी है. ये अलग बात है कि गब्बर सिंह की करतूतें उन्हें ग़ैर क़ानूनी नहीं लगीं. लेकिन हमारे सामने कोई चारा नहीं था. तो मजबूरन हमें क्लाइमेक्स रीशूट कराना पड़ा."

जावेद अख़्तर ने बताया कि फ़िल्म के मूल क्लाइमेक्स में गब्बर सिंह को मारने वाला दृश्य इंटरनेट पर मौजूद है.

थ्री डी 'शोले'

'शोले' फ़िल्म को थ्री डी में परिवर्तित करके उसे दोबारा रिलीज़ करने की तैयारी है. और इसी घोषणा के लिए इसकी लेखक जोड़ी सलीम ख़ान और जावेद अख़्तर को न्यौता दिया गया था.

Image caption 'शोले' की मूल कहानी में गब्बर सिंह के किरदार की मौत हो जाती है.

इस मौक़े पर ही शोले से जुड़ी कई दिलचस्प बातों को इस जोड़ी ने साझा किया.

'ज़ंजीर', 'शोले', 'दीवार', 'डॉन' और 'त्रिशूल' जैसी सुपरहिट फ़िल्में लिखने वाली ये जोड़ी अब टूट चुकी है. लेकिन बरसों बाद ये दोनों पुराने दोस्त सार्वजनिक तौर पर 'शोले' की ख़ातिर साथ नज़र आए.

जावेद अख़्तर ने ये भी बताया कि 'शोले' की स्क्रिप्ट को कई निर्माता पहले नकार चुके थे और अंतत: जब उन्होंने जीपी सिप्पी को ये कहानी सुनाई तो उन्हें ये बहुत पसंद आई.

जावेद अख़्तर ने बताया, "जीपी सिप्पी साहब बेहद जुनूनी फ़िल्मकार थे. उन्होंने शोले की कहानी 15 मिनट सुनने के बाद ही कह दिया कि वो इस फ़िल्म को बनाएंगे. फिर रमेश सिप्पी ने फ़िल्म का निर्देशन किया."

नदारद रहे रमेश सिप्पी

फ़िल्म को थ्री डी में बदला पैन इंडिया के जयंतीलाल गढ़ा ने. उन्होंने बताया कि इस काम में 25 करोड़ रुपए की लागत आई.

फ़िल्म अगले साल तीन जनवरी को रिलीज़ होगी.

इस मौक़े पर शोले के निर्देशक रमेश सिप्पी नज़र नहीं आए.

जयंतीलाल गढ़ा ने बताया, "रमेश सिप्पी के कुछ मसले हैं और उन्होंने शोले के थ्री डी संस्करण के ख़िलाफ़ केस दायर कर रखा है. लेकिन हमें उम्मीद है कि अंत में सब कुछ सुलझ जाएगा."

वापस आएंगे सलीम-जावेद ?

Image caption 'शोले' को लिखने वाले लेखक सलीम-जावेद कई सालों बाद साथ नज़र आए.

'शोले' के डायलॉग जैसे "कितने आदमी थे", "तेरा क्या होगा कालिया", "इतना सन्नाटा क्यों है भाई" वग़ैरह बड़े लोकप्रिय साबित हुए. लेकिन सलीम ख़ान मानते हैं कि उन्होंने सोचा ही नहीं था कि ये संवाद हिट होंगे.

सलीम ख़ान बोले, "‏शोले के वो डायलॉग जो हमने बड़ी मेहनत से लिखे और जिन्हें लेकर हमें बड़ी उम्मीद थी वो तो चले ही नहीं. और ये सब चल गए कि तेरा क्या होगा कालिया. कितने आदमी थे. ये तो सवाल थे. डायलॉग थोड़े न थे."

(बॉलीवुड के दमदार डायलॉग)

सलीम-जावेद की जोड़ी ने 70 के दशक में कई सुपरहिट फ़िल्में लिखीं. लेकिन 80 के दशक में ये जोड़ी टूट गई. तब सलीम ख़ान ने कुछ फ़िल्में अकेले लिखीं और जावेद अख़्तर ने बतौर गीतकार अपना करियर आगे बढ़ाया.

तो क्या ये जोड़ी भविष्य में फिर से एक साथ काम करेगी. जावेद अख़्तर ने कहा, "आप इंतज़ार कीजिए. भविष्य में किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. कुछ भी हो सकता है."

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