क्या रंग लाएगी भंसाली की 'राम-लीला' ?

  • 15 नवंबर 2013
'राम-लीला'

रेटिंग: ****

इरॉस इंटरनेशनल और भंसाली प्रोडक्शंस की राम-लीला दुश्मनी, घृणा और ख़ून ख़राबे के बीच पनपी एक प्रेम कहानी है. गुजरात में सनेड़ा और रजाड़ी खानदानों के बीच पांच सौ सालों से दुश्मनी चली आ रही है.

दोनों के बीच दुश्मनी का पुराना ख़ूनी इतिहास है. राम (रणवीर सिंह) रजाड़ी खानदान के नेता का बेटा है. वो दिलफेंक क़िस्म का लड़का है और जब मौका मिलता है तो लड़कियों से इश्क़ फ़रमाने लगता है.

वो सनेड़ा खानदान की मुखिया धानोकर बा (सुप्रिया पाठक) की बेटी लीला (दीपिका पादुकोण) से मोहब्बत करने लगता है और लीला का रुझान भी राम की तरफ़ हो जाता है. इधर धनोकर बा, लीला की शादी कहीं और तय कर देती हैं.

राम और लीला की मोहब्बत परवान चढ़ ही रही होती है कि राम के भाई की हत्या सनेड़ा खानदान के लोगों के हाथ हो जाती है और गुस्से में आकर राम, लीला के भाई की हत्या कर देता है. लेकिन लीला, अपने प्यार के आगे भाई की हत्या को भूलकर राम के साथ भाग जाती है.

(रिव्यू: 'सत्या 2')

आगे क्या होता है? क्या राम और लीला की शादी हो जाती है? क्या दोनों खानदान अपने बच्चों के प्यार को कुबूल कर लेते हैं? क्या दोनों खानदानों की दुश्मनी फ़ौरन ख़त्म हो जाती है या आगे और भी ज़्यादा ख़ून ख़राबा होता है? यही फ़िल्म की कहानी है.

स्क्रीनप्ले

फ़िल्म की कहानी शेक्सपियर के ड्रामा रोमियो और जूलियट पर आधारित है. संजय लीला भंसाली ने इसे बेहतरीन तरीक़े से भारतीय परिस्थितियों में पिरोया है.

सिद्धार्थ-गरिमा और संजय लीला भंसाली का स्क्रीनप्ले बेहतरीन है. फ़िल्म में इतने दिलचस्प मोड़ हैं कि दर्शक शुरू से आख़िर तक कहानी के साथ बंधे रहते हैं. राम और लीला के साथ भागने तक फ़िल्म की रफ़्तार थोड़ी धीमी है लेकिन उसके बाद फ़िल्म गति पकड़ लेती है.

('रिव्यू: कृष-3')

कहानी में मेलोड्रामा राम और लीला की इस लव स्टोरी को एक अलग ही स्तर तक ले जाता है. फ़िल्म को बहुत बड़े और भव्य स्केल पर फ़िल्माया गया है जो इसका एक मज़बूत पक्ष है.

फ़िल्म में किरदारों का भी बेहद सशक्त चित्रण है और फ़िल्म के पात्र लंबे समय तक दर्शकों के ज़ेहन में बने रहेंगे.

भावनात्मक दृश्यों की कमी

फ़िल्म का एक कमज़ोर पहलू भी है और वो है भावनाओं की तीव्रता की कमी. दर्शक दोनों प्रेमियों की पीड़ा को महसूस तो करेंगे लेकिन वो उनसे इतना नहीं जुड़ पाते कि उनके लिए आँसू बहा सकें.

(रिव्यू:'मिकी वायरस')

फ़िल्म की कहानी में हालांकि कई भावनात्मक दृश्यों की गुंजाइश थी लेकिन लेखक इस क्षेत्र में चूक गए.

लेकिन राम और लीला की बेहतरीन प्रेम कहानी की वजह से दर्शक इन छोटी-मोटी कमियों को नज़र अंदाज़ कर देंगे. फ़िल्म के डायलॉग बेहतरीन हैं.

अभिनय

रणवीर सिंह अपनी बेहतरीन एक्टिंग से सबको चौंका देंगे. उनकी संवाद अदायगी कमाल की है, बॉडी लैंग्वेज और हाव भाव ज़बरदस्त हैं और एक कलाकार के तौर पर उनकी रेंज हैरान कर देती है.

फ़िल्म में उनका शरीर बेहद ख़ूबसूरत और तराशा गया लगता है. उनका डांस भी शानदार है. लीला के रोल में दीपिका पादुकोण ने अपनी छाप छोड़ी है. फ़िल्म के शुरुआती हिस्सों में उनका चुलबुलापन देखते ही बनता है. पारंपरिक गुजराती परिधानों में वो बेहद ख़ूबसूरत लगी हैं.

फ़िल्म के दूसरे हिस्से में उनका गंभीर अभिनय बताता है कि वो कितनी शानदार अभिनेत्री हैं. दीपिका इस फ़िल्म में अपनी ख़ूबसूरती और अभिनय दोनों से ही दर्शकों के दिलो-दिमाग में छा जाएंगी.

(रिव्यू: 'बॉस')

फ़िल्म में उनके गहने और कपड़े नए फ़ैशन ट्रेंड को जन्म दे सकते हैं. उनका डांस भी ज़बरदस्त है. लीला की मां के रोल में सुप्रिया पाठक भी बेहतरीन रही हैं.

रसीला के रोल में ऋचा चड्ढा ने भी कमाल किया है. बाकी कलाकारों ने भी उम्दा अभिनय किया है. एक गाने में स्पेशल अपियरेंस में नज़र आईं प्रियंका चोपड़ा ने फ़िल्म के ग्लैमर को और बढ़ाया है.

भव्य फ़िल्म

संजय लीला भंसाली एक रंगीन और भव्य फ़िल्म बनाने के लिए बधाई के पात्र हैं. फ़िल्म के हर फ़्रेम में बारीकियों का ध्यान रखा गया है. उन्होंने फ़िल्मों को अलग-अलग रंगों में पिरोया है.

फ़िल्म के कलाकारों से शानदार काम निकलवाने के लिए भी उनकी तारीफ़ की जानी चाहिए. संजय लीला भंसाली ने फ़िल्म का संगीत भी दिया है.

हालांकि इंटरवल से पहले गाने बहुत कम अंतराल में आते हैं लेकिन उनका प्रस्तुतीकरण दर्शकों को बोर नहीं होने देता. फ़िल्म के एक्शन दृश्य और एडिटिंग भी अच्छी है.

कुल मिलाकर 'राम-लीला' एक बेहतरीन फ़िल्म है. फ़िल्म हर तरह के दर्शक वर्ग का मनोरंजन करेगी. मल्टीप्लेक्सेस और सिंगल स्क्रीन थिएटर, दोनों ही जगह फ़िल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है.

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