बॉलीवुड में संघर्ष करते विदेशी कलाकार

  • 18 नवंबर 2013
नरगिस फख़री

भारतीय छोटे परदे पर ''फिरंगी बहू'' नाम से एक सीरियल आने वाला है जो सांस्कृतिक टकराव और बदलते सामाजिक तौर-तरीकों की कहानी है.

यह कहानी एक पारंपरिक गुजराती परिवार की है जिसके घर यूरोप की एक लड़की बहू बनकर आती है.

बहू की भूमिका के लिए चुनी गईं हॉलैंड की अभिनेत्री सिपोरा अन्ना ज़ोउटवेले के लिए यह एक बड़ी सफलता है, क्योंकि भारतीय स्क्रीन पर विदेशी कलाकारों को मुश्किल से कोई अहम किरदार निभाने को मिलता है.

ज़ोउटवेले का कहना है कि बॉलीवुड में काम हासिल करने के लिए आपको भाग्यशाली होने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, ''यहां बड़ी भूमिका हासिल करना आसान काम नहीं है क्योंकि यह केवल आपके टैलेंट का मसला नहीं बल्कि आप किसको जानते हैं, यह काफी मायने रखता है."

Image caption पारंपरिक गुजराती परिवार में फिरंगी बहू की भूमिका में ज़ोउटवेले.

ज़ोउटवेले ने कहा "यदि आप पैसे वाले परिवार से हैं या आप कई लोगों को जानते हैं तो आपके लिए चीजें आसान हो जाती है. वे आपको लॉन्च कर सकते हैं. वे आपके लिए एक फ़िल्म बना देंगे.''

उन्होंने कहा, ''एक बाहरी होने के नाते काम मिलना तो आसान है लेकिन यहां लंबे समय तक बने रहना और एक से अधिक फ़िल्में हासिल करना मुश्किल है.''

आकर्षक और सेक्सी

एक छोटे शहर की रहने वाली ज़ोउटवेले सबसे पहले डांस सीखने के लिए मुंबई आईं. उनको यह शहर बहुत पसंद आया और उन्होंने मॉडलिंग और टीवी विज्ञापन के लिए कोशिश की.

एक साल बाद एक निर्माता ने उन्हें टीवी सीरियल में भूमिका निभाने का ऑफर दिया. इस तरह उनको करियर में ब्रेक मिला.

इस तरह से ब्रेक हासिल करने के बारे में बहुत लोग सपना देखते हैं लेकिन बहुत कम को ही सफलता मिलती है.

Image caption हिंदी फिल्मों में विदेशी डांसरों की खूब मांग है.

दरअसल, मुंबई का फ़िल्म उद्योग काफी प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ जोख़िम भरा भी है. दर्शक स्थानीय कलाकारों को पसंद करते हैं और अधिकतर भूमिकाएं हिंदी में होती हैं.

इन दिनों दुनिया के कोने-कोने से बॉलीवुड में किस्मत आज़माने के लिए कलाकार आ रहे हैं.

हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है कि कितने कलाकार बॉलीवुड में आ रहे हैं, लेकिन कास्टिंग निर्देशक मुकेश छाबड़ा का कहना है कि उन्हें हर महीने ऑडिशन के इच्छुक विदेशियों के 10 से 15 ईमेल आते हैं.

आमतौर पर निर्देशक विदेशी कलाकारों को बतौर डांसर या फिर दृश्य को आकर्षक बनाने के लिए फिल्मों में लेते हैं.

ज़ोउटवेले कहती हैं कि विदेशी होने के नाते आमतौर पर आइटम गर्लके रूप में भूमिका निभाने के लिए आपसे संपर्क किया जाता है.

'नहीं मिलती लीड भूमिका'

भारत में मल्टीप्लेक्स के बढ़ते दर्शकों को देखते हुए फिल्म निर्माता लीक से हटकर कहानियों को आज़मा रहे हैं, जिससे विदेशी कलाकारों के लिए संभावनाएं बढ़ रही है.

छाबड़ा का भी कहना है कि इंडस्ट्री को और अधिक विदेशी चेहरे चाहिए क्योंकि वे एक ही चेहरे को हर फिल्म में नहीं दिखा सकते.

उनका कहना है कि विदेशी कलाकार यहां टिकना नहीं चाहते. अधिकतर अच्छे कलाकार हॉलीवुड का रुख कर लेते हैं. लेकिन अगर वे यहां रुकते हैं तो निश्चित तौर पर उन्हें अधिक काम मिलेगा.

Image caption बॉलीवुड के लिए पहली फिल्म करने से पहले लिज़ा लज़ारस कभी भारत नहीं आई थी.

लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां बाहरी कलाकारों को अब भी मुख्य भूमिका नहीं मिलती.

इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि कलाकार लंबे समय तक यहां नहीं टिक पाते.

काफी समय पहले करियर बनाने के लिए वेल्स से यहां आने वाली पूर्व मिस लैनेली लिज़ा लज़ारस का कहना है कि यदि आप यहां आते हैं तो आपको कड़ी मेहनत करने और ख़ुद को समर्पित करने के लिए तैयार करना होगा.

अनुभव

ऐतिहासिक ड्रामा 'वीर' में काम करने से पहले वह कभी भारत नहीं आई थी. वह बॉलीवुड के अनुभव के बारे में कहती हैं कि यहां काफी दबाव है.

कई बार तो वह 24 घंटे की शूटिंग के बाद घर जाकर खूब रोती थी. उन्होंने कहा कि उनकी एक ड्रेस का वज़न 15 किलो था और उनको उसे तीन हफ़्ते तक पहनना था.

इस बारे में ज़ोउटवेले कहती हैं कि अगर आप कड़ी मेहनत करते हैं तो आपको बताने और सहयोग करने वाले लोग मिल जाते हैं.

तमाम बुराइयों और कास्टिंग काउच की घटनाओं से भरे इस उद्योग में आपको यह पता होना चाहिए कि आप क्या चाहती हैं.

यहां पर लोग कई ऑफर देते हैं और ये सभी बेहद आकर्षक दिखते हैं लेकिन ये होते नहीं.

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