भारत के संविधान की कहानी: श्याम बेनेगल की ज़ुबानी

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मेरी मुलाकात भारत के संविधान से कक्षा छह में हुई. जब मेरा दो किलो का बस्ता सीधा तीन किलो का हुआ और मेरे बस्ते में जगह बना ली सिविक्स यानी नागरिक शास्त्र की किताब और कॉपी ने. डरता था मैं सिविक्स से, कारण इसका कठिन होना.

निर्देशक श्याम बेनेगल की नई टीवी सीरीज़ 'संविधान' बनाने की प्रक्रिया और इसके मूल तत्वों को आसानी समझने का एक अच्छा जरिया हो सकती है. इस टीवी सीरीज में सन 1946 से 1950 की घटनाओं का जि़क्र है. यही वो दौर था जब निर्माण हुआ था भारत के संविधान का और भारत बना था गणतंत्र.

इस धारावाहिक से 25 साल बाद फ़िल्मकार श्याम बेनेगल की टीवी पर वापसी हो रही है. सन 1988 में बने टीवी शो ‘भारत एक खोज’ के बाद बेनेगल अब टीवी पर दिखाएंगे भारत के संविधान की कहानी. कितना चुनौतीपूर्ण था ये विषय और इस प्रोग्राम पर काम करने के अनुभव को श्याम बेनेगल ने बीबीसी से साझा किया.

टीवी पर ‘संविधान’ कैसे?

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संसद के ऊपरी सदन राज्य सभा को समर्पित ‘राज्य सभा टीवी’ ने संविधान पर टीवी प्रोग्राम बनाने का फ़ैसला किया है.

भारत के उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने श्याम बेनेगल को बुलाया और उन्हें संविधान पर धारावाहिक बनाने का आइडिया दिया.

बीबीसी से हुई बताचीत में श्याम बेनेगल ने कहा, "हमारा संविधान बहुत ही महत्वपूर्ण है जिसके बारे में कोई ज़्यादा सिखाता नहीं है, हमारा संविधान हमारे देश के बारे में बताता है. हम कैसे लोग हैं, क्या सोच हैं और लोकतांत्रिक रिश्ते कैसे बनते हैं."

बेनेगल छह साल तक सांसद भी रहे हैं. संसद की गतिविधियों को जानने के बाद उन्होंने इस धारावाहिक पर काम करने का फैसला किया. संविधान को 10 अंकों में दिखाया जाएगा. इसका पहला अंक रविवार को प्रसारित किया गया.

रोमांचक अनुभव

दो साल 11 महीने और 17 दिनों में बना था भारत का संविधान और लगभग इतने ही दिनों में श्याम बेनेगल ने अपना शो भी शूट किया.

संविधान पर टीवी प्रोग्राम को एक रोमांचक अनुभव बताते हुए श्याम बेनेगल ने बताया, "ये रोमांचक इसलिए था क्योकि हमारे पूर्वजों ने इस संविधान को बनाने में 3 साल लगाए. इसे बनाने में संसद में बहस होती थी उसमें काफ़ी ड्रामा था. संविधान के बनने की कहानी एक नावेल जैसी है या कहूं तो एक नाटक जैसी."

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श्याम बेनेगल बताते हैं, "इस शो को बनाने के लिए खूब रिसर्च की गई. हमारे लेखकों ने एक-एक तथ्य को रिकॉर्ड्स में जांचा. हमारे प्रोग्राम में जो पंडित नेहरू ने कहा था वैसे का वैसा ही बोला गया है. एक भी फैक्ट इधर से उधर नहीं किया गया."

अगर संविधान के निर्माण की कहानी इतनी ही दिलचस्प है तो क्यों आज तक इस विषय पर किसी ने काम नहीं किया ?

यही सवाल जब मैंने बेनेगल से पूछ तो उन्होंने कहा, "ये मैं नहीं जानता, और मैं यह भी नहीं समझता की हम लेट हो गए ऐसे विषय पर बात करने में क्योंकि एक देश का जीवन एक मनुष्य से लंबा है और देश चलता रहता है. जैसे भारत एक खोज मेरा टीवी शो आज भी देखा जा सकता है वैसे ‘संविधान’ को भी लोग कभी भी उठा कर देख सकेंगे – ये समयबद्ध नहीं है – टाइमलेस शो है."

बड़ी स्टार कास्ट

उस दौर में संविधान से जुड़े सभी बड़े दिग्गजों को टीवी के परदे पर उतरा जाएगा. बीआर आंबेडकर से लेकर गाँधी तक और जिन्ना से लेकर नेहरू तक.

शो की कास्टिंग के बारे में बात करते हुए बेनेगल ने बताया, "इस धारावाहिक के साथ कुल एक हज़ार लोग जुड़े हैं, जिनमें से 150 फ़िल्मी या अन्य कलाकार है. इस शो के लिए लोगों को चुनना काफ़ी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि अगर मुझे नेहरू को दिखाना है तो नेहरू जैसा कोई हो जिसपर दर्शक विश्वास कर सकें कि ये नेहरू हैं– तो मैंने दिलीप ताहिल को नेहरू बनाया."

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उन्होंने बताया, "गाँधी के रूप में नीरज काबी को लिया जिन्होंने अपना सिर मुंडवाया और यहाँ तक गाँधी की तरह उन्होंने अपना दिनचर्या तक बना ली, बीआर आंबेडकर के रूप में मराठी अभिनेता सचिन खेडेकर लिए गए – तो एक-एक कलाकार ऐसा चुना गया जिसको देख आपको वो नेता याद आएंगे जिन्होंने संविधान का निर्माण किया था."

संसद सदस्य के रूप में अपने अनुभव के बारे में पूछने पर श्याम बेनेगल कहते हैं, "सांसदों के संसद में व्यवहार का स्तर गिर गया है. जो स्तर उन्हें बनाए रखना था वे रख नहीं पा रहे हैं. उन्हें सुधार तो करना ही होगा. इसलिए ही इस किस्म के कार्यक्रम हमारे नेताओं के लिए भी ज़रूरी हैं. वे जान पाएंगे कि हमारे पुराने नेता किस तरह से संसद में व्यवहार करते थे."

श्याम बेनेगल का यह धारावाहिक अगले 10 हफ्तों तक टीवी पर प्रसारित किया जाएगा और शायद इन दस हफ़्तों में इसकी वजह से मेरे जैसे कुछ स्कूली बच्चे भी भारत के संविधान में रुचि लेने लगें.

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