मिलिए उन पुरुषों से जो कामयाब 'औरतें' हैं

  • 5 मार्च 2014
सुनील ग्रोवर इमेज कॉपीरइट sunil grover facebook page

बड़ी पुरानी कहावत है कि हर एक कामयाब मर्द के पीछे एक औरत का हाथ होता है. लेकिन हम आज आपको मिलवा रहे हैं कुछ ऐसे पुरुषों से जिनकी कामयाबी औरत होने में ही है या यूं कहें कि औरत बनकर ये लोकप्रियता के झंडे गाड़ रहे हैं.

टीवी के शौक़ीन दर्शकों में आज ऐसा कौन होगा जो गुत्थी, पलक और पम्मी प्यारेलाल जैसे नामों से अनजान हो. इन किरदारों को जी रहे कलाकार सुनील ग्रोवर, किक्कू और गौरव गेरा से जानते हैं इनके इस सफ़र की दास्तां.

महिला सिर्फ़ सम्मान की हक़दार

इमेज कॉपीरइट star plus

टीवी शो 'मैड इन इंडिया' में चुटकी बनने वाले सुनील ग्रोवर 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' में गुत्थी बनकर लोगों के दिलों में छा चुके हैं.

सुनील कहते हैं, "मैंने जब से औरत का किरदार निभाना शुरू किया है तब से मैं उन्हें और बेहतर तरीक़े से समझने लगा हूं. महिलाएं सिर्फ़ सम्मान की हक़दार हैं और उन्हें सिर्फ़ वही मिलना चाहिए. मेरी कोशिश यही है कि मेरे शो में भी औरतों के सम्मान को किसी तरह की ठेस ना पहुंचे और उनकी भावनाएं आहत ना हों."

'सिर्फ़ बाहरी चमक-दमक ख़ूबसूरती नहीं'

इमेज कॉपीरइट colors

कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में पलक का किरदार निभाने वाले कॉमेडियन किक्कू कहते हैं, "औरतों को कभी भी उनके रंग, उनके नैन-नक्श और वेशभूषा के आधार पर नहीं आंकना चाहिए. अब पलक का ही किरदार लीजिए. वो देखने में बेहद मोटी ज़रूर है लेकिन लोगों का भरपूर मनोरंजन करती है. सबको ख़ुश रखती है, जो ज़्यादा अहम है."

'अभिनेत्रियां बहुत मेहनती होती हैं'

अभिनेता गौरव गेरा मानते हैं कि टीवी पर अभिनेताओं की तुलना में अभिनेत्रियों का काम ज़्यादा चुनौतीपूर्ण होता है. गौरव गेरा ने टेलीविज़न पर 'मिस पम्मी प्यारेलाल' का किरदार निभाकर वाहवाही बटोरी.

इमेज कॉपीरइट colors

वो कहते हैं, "जब मैं पम्मी का किरदार निभा रहा था तब मुझे ये एहसास हुआ कि अभिनेत्रियों को कितना कुछ करना पड़ता है. शूटिंग के दौरान काफ़ी तकलीफ़ झेलनी पड़ती है. कभी सैंडल्स काट रहे हैं तो कभी हील्स की वजह से टांगें दर्द कर रही हैं. आंखों पर आई लैशेस हैं तो आंखें खुल नहीं रहीं हैं, उसके बावजूद सही हावभाव लाकर अभिनय करना पड़ता है. 12 से लेकर 15 घंटे तक की शिफ़्ट करनी पड़ती है. मैं तो सच में सभी महिला कलाकारों का क़ायल हो गया."

'टाइपकास्ट' होने का ख़तरा

महिला किरदार निभाने वाले इन पुरुष कलाकारों को क्या 'टाइपकास्ट' होने का ख़तरा नहीं होता? क्या उन्हें बार-बार इसी तरह के रोल ऑफ़र नहीं होते. इसके जवाब में 'पलक' उर्फ़ किक्कू ने कहा, "शुरुआत में मुझे भी डर लग रहा था लेकिन फिर हम उसी शो में 'लच्छा' नाम का एक पुरुष किरदार भी लाए जो मैं ही निभाता हूं. उसके बाद पलक की मां भी शो में आई. वो भी मैं ही निभाता हूं. तो इससे 'टाइपकास्ट' होने का ख़तरा थोड़ा कम हो गया."

इमेज कॉपीरइट Colors

वहीं 'चुटकी' का किरदार निभाने वाले सुनील ग्रोवर 'टाइपकास्ट' होने के सवाल पर कहते हैं, "मैं पहले भी कई ऐसे किरदार कर चुका हूं. जैसे रेडियो पर 'सुड', जिसे सुनकर मेरे दोस्त बोलते थे कि यार तू ज़िंदगी भर के लिए 'सुड' ही मत बन जाना. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. फिर मैंने एक साइलेंट शो भी किया. और अब ये 'चुटकी' आई. तो मैं बस इसे एन्जॉय कर रहा हूं और कुछ नहीं सोच रहा हूं."

अभिनेता शेखर सुमन टीवी पर कई कॉमेडी शो जज कर चुके हैं. शेखर सुमन सहित कई और विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे पर्दे पर पुरुष कलाकारों के महिला बनने का ट्रेंड अब बहुत ज़्यादा हो गया है और लोग जल्द ही इनसे बोर होने लगेंगे. लेकिन फ़िलहाल इन कलाकारों को ये डर नहीं सता रहा है और इन्हें महिला बनकर मिलने वाली कामयाबी से रत्ती भर भी परहेज़ नहीं है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार