मैं अभी ख़त्म नहीं हुआ हूं: सुभाष घई

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Image caption (बाएं से: कार्तिक आर्यन, मिष्टी चक्रबर्ती और सुभाष घई)

कभी बॉक्स ऑफ़िस जिनके इशारों पर नाचता था, जिनका नाम किसी फ़िल्म से जुड़ा होना ही कामयाबी की गारंटी माना जाता था और तो और जिन्हें राज कपूर के बाद 'शोमैन ऑफ़ बॉलीवुड' कहा जाता था, वो सुभाष घई लंबे समय से कामयाबी के लिए तरस रहे हैं.

उनकी पिछली कई फ़िल्में जैसे 'युवराज', 'किसना', 'यादें' फ़्लॉप रहीं. बतौर निर्माता भी वो कोई ख़ास कमाल नहीं कर पा रहे हैं.

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लेकिन सुभाष घई अभी मानने को तैयार नहीं है कि उनके अंदर का फ़िल्मकार ख़त्म हो गया है.

उन्होंने कहा, "पूरे विश्व में चाहे कोई कितना भी बड़ा फ़िल्मकार क्यों ना हो. हिट और फ़्लॉप फ़िल्मों का सिलसिला चलता रहता है. यह तो एक सफ़र है. बड़ी बात यह है कि मुझमें अब भी फ़िल्म बनाने का जुनून है और जब तक ये है मैं फ़िल्म बनाता रहूंगा. मैं अभी ख़त्म नहीं हुआ हूं."

घई की 'कांची'

सुभाष घई अब लेकर आने वाले हैं फ़िल्म 'कांची' जिसमें नए सितारे हैं.

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Image caption बतौर निर्देशक सुभाष घई लेकर आ रहे हैं फ़िल्म 'कांची'.

उन्होंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, "भारत में लोग सिर्फ़ बॉक्स ऑफ़िस को ही कसौटी मानते हैं. लेकिन अच्छी फ़िल्में हमेशा याद की जाती हैं. राज कपूर जी की फ़िल्म मेरा नाम जोकर नहीं चली थी. लेकिन लोग आज भी उसे महान फ़िल्म के तौर पर याद रखते हैं. यश चोपड़ा जी ने लम्हे जैसी ख़ूबसूरत फ़िल्म बनाई जो उस वक़्त नहीं चली. लेकिन लम्हे एक महान फ़िल्म थी लोग आज भी मानते हैं."

'कई बार वापसी की'

सुभाष घई ने कहा कि 70 के दशक के आख़िर में उनकी फ़िल्म 'क्रोधी' फ़्लॉप हुई तो लोगों ने कहा कि उनका करियर ख़त्म हो गया.

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उन्होंने कहा, "लेकिन क्रोधी के बाद मैंने विधाता, हीरो, क़र्ज़, राम-लखन जैसी बेहद कामयाब फ़िल्में दीं. फिर 90 के दशक में त्रिमूर्ति नहीं चली तो लोगों ने कहा बस, अब बहुत हो गया. फिर मैंने ताल और परदेस जैसी कामयाब फ़िल्में दीं. तो ये साइकल तो चलता रहता है."

सुभाष घई की नई फ़िल्म 'कांची' में कार्तिक आर्यन और मिष्टी चक्रबर्ती जैसे नए कलाकार हैं. फ़िल्म 25 अप्रैल को रिलीज़ होगी.

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