मुझे नहीं पता गुरुदत्त ने क्यों की ख़ुदकुशी: वहीदा रहमान

वहीदा रहमान

मुंबई के सोफ़िटेल होटल में मैं इंतज़ार कर रही थी वहीदा रहमान का जो 50 और 60 के दशक में अपनी ख़ूबसूरती और लाजवाब अदाकारी के लिए जानी जाती थीं.

वहीदा रहमान पर नसरीन मुन्नी कबीर ने एक किताब लिखी है. उसी के लॉन्च समारोह में मुझे बुलाया गया था.

(वहीदा को किस बात का अफ़सोस)

थोड़ी ही देर बाद मैंने एक महिला को अपनी ओर आते देखा. उन्होंने बेहद ख़ूबसूरत साड़ी पहन रखी थी और 70 साल की उम्र पार करने के बाद भी वो बेहद गरिमामय नज़र आ रही थीं. ये वहीदा रहमान थीं.

मेरी नमस्कार का उन्होंने बेहद शालीन तरीके से जवाब दिया और फ़ौरन कहा, चलिए इंटरव्यू शुरू करते हैं.

सवाल: आपके चाहने वालों को इस किताब में क्या दिलचस्प मिलने वाला है ?

वहीदा: मुझे नसरीन ने जो पूछा मैं बताती गई. बचपन से लेकर अब तक की सारी बातें हैं इस किताब में. जहां तक दिलचस्प यादों की बात करें तो वो मैं नहीं कह सकती.

Image caption अपनी जीवनी के साथ वहीदा रहमान.

क्योंकि हो सकता है मुझे जो दिलचस्प लगता हो वो पाठकों को ना लगे या पाठक जिसे दिलचस्प समझे वो मेरी नज़र में उतना मज़ेदार ना हो. (देव आनंद को याद कर रो पड़ीं वहीदा)

सवाल: 1954 में आपने अपना करियर शुरू किया था. क्या आपको लगा था कि इतनी उपलब्धियां हासिल कर पाएंगीं?

वहीदा: मैंने कुछ नहीं सोचा था. इसके लिए मैं अपने आपको ख़ुशकिस्मत मानती हूं. मुझे जो काम मिला उसे मैंने पूरी ईमानदारी से किया. कोई तिकड़मबाज़ी नहीं की.

सवाल: आपकी बेहद क़रीबी दोस्त नंदा इस अहम मौक़े पर आपके साथ नहीं हैं. उनकी कमी कितनी खल रही है ?

वहीदा: (वहीदा इसके जवाब में भावुक हो गईं) मेरा और नंदा का रिश्ता बहुत गहरा है. 55 सालों की दोस्ती थी. उनकी याद तो हमेशा रहेगी. हम ये किताब पहले ही लॉन्च करने वाले थे लेकिन उसके ठीक दो दिन पहले ही नंदा हमें छोड़कर चली गईं. तब मैंने ये कार्यक्रम टाल दिया था.

(50 पार लेकिन जादू बरक़रार)

सवाल: नंदा जी तो अब है नहीं लेकिन उनके अलावा भी आपका, आशा पारिख, साधना, शम्मी जी वगैरह का दोस्तों का ग्रुप है. जब आप लोग मिलती हैं तो किस तरह की बातें होती हैं. क्या पुराने दौर की भी बातें होती हैं ?

वहीदा: हां, होती हैं. लेकिन हर वक़्त गुज़रे ज़माने की बातें हम लोग नहीं करते रहते. इस दौर की बात करते हैं. नई फ़िल्मों की बातें होती हैं. खाने-पीने की बातें होतीं है. घूमने-फिरने की बातें होती हैं.

सवाल: कई कलाकार आपके प्रशंसक हैं. अमिताभ बच्चन, जिनके साथ आपने कुछ फ़िल्में भी की हैं वो आपको हिंदी सिनेमा की सबसे ख़ूबसूरत अभिनेत्री मानते हैं. आप इस पर कैसे रिएक्ट करती हैं?

जवाब: ये बच्चन जी की मेहरबानी है. ज़र्रानवाज़ी है. वो अक्सर मेरी तारीफ़ करते रहते हैं. मैं उनसे तारीफ़ सुनकर ख़ुश हो जाती हूं. और क्या कहूं ?

सवाल: कोई ऐसी फ़िल्म जो आपने हाल ही में देखी हो और आपको अच्छी लगी हो.

जवाब: मैंने कंगना रानाउत की क्वीन देखी और मुझे बहुत पसंद आई. वैसे भी वो लड़की मुझे बहुत प्यारी लगती है. इसके अलावा दीपिका पादुकोण, विद्या बालन और सोनम भी मुझे पसंद हैं.

सवाल: और अभिनेताओं में कौन पसंद हैं ?

वहीदा: देखिए अभिनेताओं में तो ये चार ख़ान ही हैं. यही छाए रहते हैं. आमिर, शाहरुख़, सलमान और सैफ़. सलमान तो मेरे पड़ोस में ही रहता है. बचपन से उसे देखा है. परिवार की तरह है वो.

इस बीच समारोह के आयोजकों ने इंटरव्यू ख़त्म होने का इशारा कर दिया. मैं सोच ही रही थी कि अगला सवाल वहीदा रहमान से उनकी और गुरुदत्त के कथित रिश्ते पर सवाल पूछुं लेकिन ऐसा हो नहीं पाया.

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Image caption वहीदा रहमान ने गुरु दत्त पर पूछे सवालों का जवाब नहीं दिया.

इस बीच वहीदा के कुछ प्रशंसकों ने उन्हें घेर लिया. और फिर किसी ने वो सवाल पूछ ही लिया जो मैं नहीं पूछ पाई.

किसी ने पूछ लिया कि क्या वाकई उनके और गुरु दत्त के बीच कोई रिश्ता था. इस पर वहीदा बोलीं, “ये मेरी निजी ज़िंदगी है. किसी को हक़ नहीं बनता कि उस पर कोई सवाल उठाए.”

फिर किसी ने पूछा कि गुरुदत्त की ख़ुदकुशी के पीछे क्या वजह थी.

वहीदा रहमान बोलीं, “किसी को भी उनके ख़ुदकुशी करने की वजह नहीं पता. कुछ लोग कहते हैं कि काग़ज़ के फूल की नाकामयाबी की वजह से वो डिप्रेशन में थे. लेकिन मुझे नहीं लगता कि ये वजह रही होगी. क्योंकि इस फ़िल्म के बाद उन्होंने चौदहवीं का चांद बनाई जो सुपरहिट रही.

'बिकनी क्या स्लीवलेस ब्लाउज़ नहीं पहना'

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Image caption गुरु दत्त की 'प्यासा' के एक दृश्य में वहीदा रहमान.

वहीदा ने अपने करियर के शुरुआती दिनों का ज़िक्र करते हुए कहा, “मैंने करियर की शुरुआत में गुरुदत्त जी के साथ तीन साल का कॉन्ट्रेक्ट किया था. लेकिन मैंने शर्त रखी थी कि कपड़े अपनी मर्ज़ी के ही पहनूंगीं. कोई ड्रेस पसंद नहीं आया तो मुझे उसे पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा."

"मैंने फ़िल्मों में कभी बिकनी नहीं पहली क्योंकि मुझे लगता है मेरा फ़िगर वैसा नहीं था. असल ज़िंदगी में भी मैंने कभी स्लीवलेस ब्लाउज़ नहीं पहना. बिकनी तो बहुत दूर की बात है.”

फ़िलहाल वहीदा रहमान अब आगे फ़िल्मों में काम करने की इच्छुक नहीं हैं.

उन्होंने हाल ही में कमल हासन की फ़िल्म 'विश्वरूपम-2' की शूटिंग ख़त्म की. और अब वो अपना पूरा समय परिवार को देना चाहती हैं.

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