लोकप्रियता को गंभीरता से नहीं लिया: राजीव खंडेलवाल

सम्राट एंड कंपनी

टेलीविज़न से बड़े पर्दे पर आए राजीव खंडेलवाल का कहना है कि उन्होंने कभी भी टीवी पर मिली अपनी 'लोकप्रियता' को गंभीरता से नहीं लिया और कुछ हटकर काम करने की तलाश में फ़िल्मों का इंतज़ार करते रहे.

अक्सर लीक से हटकर बनी फ़िल्मों में नज़र आने वाले राजीव खंडेलवाल इस बार एक और लीक से हटकर बनी फ़िल्म ‘सम्राट एंड कंपनी’ में नज़र आए जो शुक्रवार को रिलीज़ हुई.

('मैं नहीं करता सच का सामना')

इस फ़िल्म में राजीव किरदार निभा रहे हैं एक जासूस का जो हर वो केस सुलझाता है जो कुछ अलग होता है.

आख़िर क्या है हर चीज़ में ये ‘हटके’ वाली बात, बीबीसी को बताया ख़ुद राजीव खंडेलवाल ने.

उन्होंने कहा, “मैं भीड़ में गुम नहीं होना चाहता था इसलिए मुख्यधारा से अलग फ़िल्में करता हूं वर्ना मसाला फ़िल्मों के ढ़ेरो ऑफ़र मिलते हैं मुझे."

प्रेरणा

इमेज कॉपीरइट Samrat and Co
Image caption शुक्रवार को राजीव खंडेलवाल की फ़िल्म 'सम्राट एंड कंपनी' रिलीज़ हुई.

राजीव ने बताया की इस तरह का सिनेमा करने की प्रेरणा उन्हें इंडस्ट्री के सीनियर कलाकारों से मिलती है.

वो कहते हैं, “मुझे इंडस्ट्री के बड़े-बड़े कलाकारों ने कहा है कि जो काम तुम कर रहे हो वही करो ये तुम्हारे लिए अच्छा है और इसी से तुम्हें अलग पहचान मिलेगी. कम से कम तुम नकल तो नहीं कर रहे हो.”

राजीव से ये पूछे जाने पर कि बॉलीवुड में वो अपने साथी कलाकारों से कितना कॉम्पटीशन महसूस करते हैं, इस पर उनका जवाब था, “मैं नहीं मानता कि यहां पर कोई कॉम्पटीशन है. मुक़ाबला रेस में होता है. यहां हम सब अपना अपना काम कर रहे हैं और हर किसी का काम अलग है”.

('नए निर्देशकों के साथ काम करने की चाहत')

अपने आलोचकों के लिए अमिताभ बच्चन का उदाहरण देते हुए वो कहते हैं, “कई लोगों ने एक वक़्त में अमिताभ को भी चुका हुआ मान लिया था लेकिन वो आज सदी के महानायक हैं. तो किसी को भी चुका नहीं मानना चाहिए.”

टीवी से एंट्री हुई आसान

अपने समकालीन कलाकारों में राजीव, रणवीर सिंह को प्रतिभाशाली बताते हैं.

इमेज कॉपीरइट Samrat and Co

ये पूछे जाने पर कि टीवी की पृष्ठभूमि से आने से क्या फ़िल्मों की राह आसान होती है, राजीव ने कहा, “मेरे समय में ये मुश्किल था. निर्देशक टीवी कलाकारों को आसानी से रोल नहीं देते थे. मुझसे पहले सिर्फ़ शाहरुख़ ही एक बड़े टीवी कलाकार थे जो फ़िल्मों में चले. लेकिन अब ऐसा नहीं है. दोनों ही माध्यम एक दूसरे के लिए खुल गए हैं.”

राजीव ने माना कि आज भी टीवी के लिए उनका प्यार ज़िंदा है लेकिन फ़िलहाल वो अपना पूरा समय फ़िल्मों को देना चाहते हैं.

मसाला फ़िल्मों से परहेज़

राजीव हमेशा थ्रिलर या सस्पेंस फ़िल्में करना पसंद करते हैं. क्या उन्हें आम मसाला फ़िल्मों से परहेज है.

इस पर राजीव हंसते हुए कहते हैं, “ऐसा नहीं है कि मैं किसी फ़िल्म से परहेज़ रखता हूं. बस मैं वो घिसा पिटा काम करना नहीं चाहता.”

“मैं वो फ़िल्में चाहता हूं जिन्हें समझना पड़े. जो दर्शक को बांधे और सोचने पर मजबूर करे. जिसमें धैर्य की ज़रूरत हो. पहले ऐसी फ़िल्में कम बनती थी. अब ऐसी फ़िल्मों की तादाद भी अच्छी ख़ासी है. कुल मिलाकर अब विकल्प भी ज़्यादा हो गए हैं.”

तो क्या मसाला फ़िल्में वो कभी काम नहीं करेंगे. ये पूछने पर राजीव ने बात ख़त्म करते हुए कहा, “मैं जब तक अपनी फ़िल्में और रोल ख़ुद चुनने की हालत में हूं तब तक तो ऐसा ही करूंगा. लेकिन अगर कभी ऐसा हुआ कि हालात तंग हो गए या मजबूरी में आ गया तो आप मुझे भी फ़ार्मूला फ़िल्म करते पाएंगे.”

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉइड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक और ट्विटर पेज से भी जुड़ सकते हैं)

संबंधित समाचार