बोलती बंद हो जाती है गुलज़ार के सामने: रेखा भारद्वाज

  • 2 मई 2014
गुलज़ार, रेखा भारद्वाज

गुलज़ार मीडिया से ज़्यादा बात करना पसंद नहीं करते.

कई पत्रकार उनसे 'अच्छे सवाल' ना पूछने के लिए फ़टकार भी खा चुके हैं.

हालांकि गुलज़ार के क़रीबी बताते हैं कि वो उनसे बड़े प्यार से पेश आते हैं लेकिन फिर भी उनके सामने कई लोगों की बोलती बंद हो जाती है और उनमें से एक हैं गायिका रेखा भारद्वाज.

(पढ़िए: गुलज़ार पर बीबीसी की ख़ास पेशकश)

'कमीने', 'ओमकारा' और 'इश्क़िया' जैसी फ़िल्मों में गुलज़ार के लिखे गाने गा चुकी रेखा भारद्वाज ने बीबीसी से ख़ास बात करते हुए बताया, "गुलज़ार जी के लिखे वो नग़मे जो मैंने गाए हैं उनके ज़रिए मैंने पूरी ज़िंदगी के भाव जिए हैं. मैं गुलज़ार जी के सामने कुछ कह नहीं पाती. तो एक दफ़ा मैंने एक प्रश्न चिट्ठी में लिख कर उन्हें थमा दिया जिसका जवाब उन्होंने एक कविता से दिया जो मेरे लिए अनमोल है."

भविष्य में काम

गुलज़ार अभी भी फ़िल्मों के लिए, नाटकों के लिए कविताएं व कहानियां लिखते हैं. इसके आलावा वो एक बहुत ही कमाल का काम कर रहे हैं जिसके बारे में बताया रेखा भारद्वाज ने.

रेखा ने बताया, "इस वक़्त वो एक बहुत ही ख़ास काम कर रहे हैं जिसमें वो अलग अलग भाषाओँ की 300 कवियों के काम का अनुवाद कर रहे हैं. ऐसे काम से हम लोगों को कुछ ऐसी कविताएं मिल जाती हैं जो हमारी एल्बम, हमारी फ़िल्म के अनुकूल होती है."

रेखा भारद्वाज और गुलज़ार एक नया एलबम लेकर आएंगे और इसके लिए गुलज़ार ने रेखा भारद्वाज के लिए कुछ नग़मे भी लिखे हैं पर विशाल भारद्वाज की व्यस्तता के कारण अभी इसका संगीत नहीं बन पाया है.

गुलज़ार से पहली मुलाकात

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रेखा भारद्वाज कहती हैं, “गुलज़ार साहब के काम की प्रशंसक मैं बचपन से ही थी. हमारे घर में फ़िल्में देखने का माहौल नहीं था पर आंधी एक ऐसी फ़िल्म है जिसे देखने के लिए पूरा परिवार गया था."

वो कहती हैं, "उनके टीवी धारावाहिक ग़ालिब की मैं दीवानी थी और धारावाहिक का हर भाग देखा करती थी. 1991 में विशाल भारद्वाज से विवाह के बाद जब में मुंबई आई तो उस समय गुलज़ार साहब की फ़िल्म ‘लेकिन’ रिलीज़ होने वाली थी. तब गुलज़ार साहब ने विशाल भरद्वाज के ज़रिए मुझे न्योता दिया ‘लेकिन’ फ़िल्म के प्रीमियर पर आने के लिए."

गुलज़ार साहब से रिश्ता

रेखा भारद्वाज आधिकारिक तौर पर गुलज़ार को "बाबा" बुलाती हैं. रेखा भारद्वाज मानती है कि आज वो और विशाल जो कुछ भी है उसमें गुलज़ार जी का सबसे बड़ा हाथ है.

गुलज़ार को वो अपने लिए एक आर्शीवाद मानती हैं.

जब 'दादा साहब' की घोषणा हुई

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जब गुलज़ार को पता चला कि उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने वाला है तो उन्होंने ये बात अपने सभी क़रीबी लोगों को बताई और उनमें रेखा भी शामिल थीं.

तो किस तरह गुलज़ार ने बताया रेखा को अपने पुरस्कार के बारे में?

इस सवाल पर रेखा ने कहा, "जब दादा साहब फाल्के अवार्ड्स की घोषणा हुई तो मुझे गुलज़ार जी ने मोबाइल पर मैसेज किया की मैं दादा बन गया और मैं इसका मतलब समझ गई. उस दिन से हम सिर्फ उत्सव ही मना रहे हैं. अवार्ड उन्हें मिला है लेकिन उसका तोहफ़ा साड़ी के रूप में मुझे मिलेगा गुलज़ार जी से."

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