'विभाजन का दर्द बयां करती है क्या दिल्ली...'

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Image caption 'क्या दिल्ली क्या लाहौर' से विजय राज़ निर्देशन के मैदान में क़दम रख रहे हैं

'मॉनसून वेडिंग', 'रघु रोमियो' और 'डेल्ही बैली' जैसी फ़िल्मों में अपने अभिनय के हुनर दिखा चुके विजय राज़ अब निर्देशन के मैदान में क़दम रख चुके हैं और अपनी फ़िल्म 'क्या दिल्ली क्या लाहौर' के साथ तैयार हैं जो इस शुक्रवार को रिलीज़ हो गई.

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फ़िल्म के बारे में विजय राज़ ने बताया कि ये विभाजन की पीड़ा को बयां करने के अलावा कुछ और बुनियाद सवाल उठाती है.

फ़िल्म से प्रख्यात गीतकार, शायर और लेखक गुलज़ार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे पेश करने का फ़ैसला किया है.

बीबीसी से ख़ास बात करते हुए उन्होंने कहा, "मेरी फ़िल्म विभाजन के वक़्त हर हिंदुस्तानी और पाकिस्तानी को जो पीड़ा हुई थी उसे बयां करती है. फ़िल्म के किरदार रहमत अली और समर्थ प्रताप शास्त्री के ज़रिए हमने उस दौर का चित्रण किया है."

निर्देशन के साथ अभिनय भी

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Image caption 'क्या दिल्ली क्या लाहौर' को प्रमोट करने का बीड़ा गुलज़ार ने उठाया है

निर्देशन के अलावा विजय राज़ ने फ़िल्म में काम भी किया है और रहमत अली का किरदार निभाया है जो एक सैनिक है और दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में पला बढ़ा है लेकिन विभाजन के बाद उसे पाकिस्तान जाना पड़ता है.

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उसकी मुलाक़ात होती है समर्थ प्रताप शास्त्री से. समर्थ भी सैनिक है और लाहौर में पला बढ़ा है लेकिन विभाजन के बाद उसे भारत आना पड़ता है.

निर्देशन के मैदान में उतरने के लिए ये मुश्किल विषय क्यों?

इसके जवाब में विजय ने कहा, "मैंने सोचा नहीं था कि कभी निर्देशक बनूंगा. लेकिन जब अभिनय करने के लिए मेरे पास ये स्क्रिप्ट आई तो मैं इसमें इनवॉल्व होता चला गया. और फिर मुझसे ही निर्देशन करने को कह दिया गया."

कॉमेडी भी!

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Image caption 'क्या दिल्ली क्या लाहौर' में मनु ऋषि की भी अहम भूमिका है

भारतीय सैनिक समर्थ प्रताप का रोल मनु ऋषि कर रहे हैं जो इससे पहले 'ओए लकी लकी ओए', 'फंस गए रे ओबामा' और 'आंखों देखी' जैसी फ़िल्में कर चुके हैं.

उन्होंने कहा, "वैसे तो ये फ़िल्म एक गंभीर मुद्दे पर आधारित है. लेकिन मैं और विजय अपने करियर में कई बार कॉमेडी भी कर चुके हैं. इसलिए इस फ़िल्म में भी कॉमेडी डाले बिना हम रह नहीं पाए."

पाकिस्तान में रिलीज़?

फ़िल्म के निर्माता करण अरोरा इसे पाकिस्तान में भी रिलीज़ करना चाहते हैं और इसके लिए बात चल रही है.

हालांकि अब तक पाकिस्तान में इसकी रिलीज़ तय नहीं हो पाई है.

मनु ने कहा, "हमें नहीं लगता कि हमारी फ़िल्म को पाकिस्तान में बैन किया जाएगा. क्योंकि इसमें पाकिस्तान के विरोध जैसा कुछ भी नहीं हैं. ये तो बस विभाजन का दर्द बताती है जो भारत और पाकिस्तान दोनों ही जगह के लोगों ने भोगा."

फ़िल्म का पहला ट्रेलर वाघा बॉर्डर में रिलीज़ किया गया था.

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