क्या भाएगी हवा-हवाई?

रेटिंग-***1/2

फ़ॉक्स स्टार स्टूडियो और अमोल गुप्ते की फ़िल्म हवा-हवाई साहस और दृढ़ता की कहानी है. अर्जुन हरिश्चन्द्र वाघमरे बने पार्थो गुप्ते ग़रीब परिवार के एक होनहार छात्र की भूमिका में हैं.

पिता की मौत के बाद अर्जुन एक चाय की दुकान पर काम करता है जिसके सामने एक स्केटिंग कोचिंग है. अर्जुन की दिलचस्पी स्केटिंग में पैदा होती है और इस दिलचस्पी को अपना करियर बनाने के लिए किस अर्जुन क्या करता है यही कहानी है.

पटकथा

अमोल गुप्ते की लिखी कहानी और पटकथा ईमानदार और साधारण हैं. एक ग़रीब बच्चे के सपने और ज़िंदगी में कुछ बड़ा करने की चाहत लोगों को काफ़ी अपील करेगी. फ़िल्म का पहला हिस्सा हल्का-फुल्का और हास्य से भरपूर है जहां अर्जुन और उसके साथियों की ज़िदगी और सोच को रेखांकित किया गया है.

हालांकि फ़िल्म के उस हिस्से को ज़्यादा तरजीह मिलनी चाहिए थी जहां अर्जुन का संघर्ष दिखाया गया है. इंटरवल के बाद की नाटकीयता ज़्यादा बांधती है और दिल को छूने वाली है.

कुछ दृश्य इतने ज़्यादा संवेदनशील हैं कि लोगों के लिए आंसू रोकना मुश्किल हो जाएगा. स्केटिंग कोच और उनके भाई के बीच का संबंध काफ़ी ख़ूबसूरती से दिखाया गया है.

फ़िल्म का अंत बेहद अच्छा है. अमोल गुप्ते की लिखी पटकथा में दर्शकों को रिझाने के लिए हर चीज़ मौजूद है- हल्के-फुल्के क्षण, संवेदना, तनाव, नाटकीयता और बलिदान. संवाद बेहद अच्छे हैं.

विजय राज बने निर्देशक

निर्देशन

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Image caption हवा-हवाई की कहानी और पटकथा अमोल गुप्ते की है.

अमोल गुप्ते का निर्देशन क़ाबिल-ए-तारीफ़ है. स्क्रिप्ट के साथ उनका कहानी कहने का तरीक़ा दर्शकों को पहले सीन से आख़िरी सीन तक बांध कर रखते हैं.

इस तरह की फ़िल्म जिन चीज़ों की गुंजाइश थी उन्होने सबको जगह दी है. फ़िल्म में हास्य, ड्रामा, संवेदना और जिज्ञासा इस फ़िल्म का हिस्सा हैं हालांकि हिट गानों की कमी खलती है.

हितेश सोनिक का संगीत फ़िल्म के लिए उपयुक्त है. दीपा भाटिया का संपादन असाधारण है.

अर्से बाद लौटे सुभाष घई

अभिनय

पार्थो गुप्ते अपने किरदार अर्जुन वाघमरे के रूप में प्रभावी हैं. अच्छा अभिनय करते हैं और सही वक्त पर सही भाव देते हैं. मास्टर अशफ़ाक बिस्मिल्लाह ख़ान ने गोची के रूप में बेहद अच्छा काम किया है. उनकी संवाद अदायगी प्रभावित करती है.

अर्जुन की मां के तौर पर नेहा जोशी की तारीफ़ करनी होगी. वो कई लम्हों में इतना ज़बरदस्त अभिनय करती हैं कि दर्शकों की आंखों से आंसू निकलेंगे.

अर्जुन के कोच की भूमिका में साक़िब सलीम ने अपना रोल बहुत संयम के साथ निभाया है. उनका काम आले दर्जे का है. बाक़ी सभी कलाकार अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं.

कुल मिलाकर हवा-हवाई एक शानदार मनोरंजक फ़िल्म है जो दर्शकों हँसाएगी, रूलाएगी और भरपूर मनोरंजन करेगी.

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