आपको भाएगी टाइगर की 'हीरोपंती'?

  • 23 मई 2014
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स्टार रेटिंग ***1/2

यूटीवी मोशन पिक्चर्स और नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट की फ़िल्म हीरोपंती एक ऐक्शन से भरपूर प्रेम कहानी है. बबलू का किरदार निभाने वाले टाइगर श्रॉफ़ को डिंपी यानी कृति शैनन से प्यार है.

बबलू को नहीं पता कि डिंपी हरियाणा के एक चौधरी परिवार से संबंध रखती है जिनकी बड़ी बेटी रेणू बबलू के दोस्त राकेश के साथ घर छोड़कर भाग गई है.

डिंपी के पिता को इस बात का भरोसा नहीं है कि उनकी बेटी भाग सकती है और उन्हें लगता है कि राकेश ने उसका अपहरण किया है. कहानी हरियाणा में प्रचलित उस व्यवस्था को आधार बनाती है जहां प्रेम विवाह के लिए जगह नहीं है और प्यार करने वालों को सज़ा के तौर पर मिलती है मौत.

जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है बबलू भी इस चक्रव्यूह में फंस जाता है जहां वो रेणू और राकेश को बचाना भी चाहता है और चौधरी की छोटी बेटी से प्यार भी करता है.

हीरोपंती की कहानी एक तेलुगु फ़िल्म परुगु की कहानी और पटकथा पर आधारित है.

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पटकथा

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संजीव दत्ता की लिखी पटकथा की शुरुआत नीरस है.यहां तक की फ़िल्म का एक बड़ा हिस्सा आपको बोर कर सकता है. बबलू के रूप में टाइगर का परिचय एक शानदार ऐक्शन सीन में दिखाया गया है लेकिन ये ड्रामा इंटरवल के 15-20 मिनट पहले तक कुछ ख़ास दम नहीं रखता.

कहानी बेहद धीमी गति से आगे बढ़ती है और बिल्कुल मनोरंजन नहीं करती. यहां तक कि हल्के-फुल्के लम्हों में भी बात नहीं बनती.

डिंपी के सामने ये राज़ खुलने के बाद कि बबलू उसी से प्यार करता है, कहानी में गति आती है और पकड़ भी बनती है. फ़िल्म के पहले हिस्से का अंत बेहद दिलचस्प मोड़ पर होता है जो आगे की कहानी के लिए जिज्ञासा जगाता है.

पटकथा का दूसरा हिस्सा उस वायदे को पूरा करता है. चौधरी की नाक के नीचे पनप रहा प्यार मनोरंजक है. इस हिस्से में भी टाइगर के एक्शन दृश्य विस्मित करते हैं.

दर्शकों को चौधरी का किरदार ख़ासा लंबा लग सकता है लेकिन इससे कहानी की कुछ ख़ास बातों की अहमियत कम नहीं हो जाती. संजीव दत्ता के संवाद कई जगह क़ाबिल-ए-तारीफ़ हैं.

अभिनय

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टाइगर श्रॉफ़ का डेब्यू शानदार है और वो लड़कियों को ख़ासकर रिझाएंगे. उनका चॉकलेटी चेहरा, मुग्ध करने वाली हंसी और बेहद चुस्त-दुरूस्त शरीर देखकर लड़कियों का फ़ैन बनना लाज़मी है.

अभिनय अच्छा करते हैं, ऐक्शन दृश्यों में लाजवाब हैं और नाचते भी बेहद शानदार हैं. लोगों को शायद उनके ग़ैर-परंपरागत नैन-नक्श के साथ तालमेल बिठाने में वक्त लगेगा लेकिन एक बात तय है कि टाइगर लंबी रेस के घोड़े हैं और यहां टिकने के लिए आए हैं.

इसी फ़िल्म से हिंदी फ़िल्मों में आग़ाज़ करने वाली कृति सैनन भी प्रभावित करती हैं. वो भी बेहद अच्छी शुरुआत कर रही हैं और कैमरे के सामने आत्मविश्वास से भरी हुई नज़र आती हैं. जैसे वो भावाभिव्यक्ति में अच्छी हैं वैसे ही डांस भी अच्छा करती हैं.

प्रकाश राज जो भी करते हैं अच्छा ही करते हैं. चौधरी के किरदार में वो असर डालते हैं. बबलू के दोस्तों का किरदार निभा रहे अभिनेता अच्छी सहायक भूमिका में हैं.

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निर्देशन

सब्बीर ख़ान निर्देशक के तौर पर अच्छा काम कर पाए हैं. उन्होने एक्शन और रोमांस को अच्छे से मिलाया है और नाटकीयता बढ़ाने के लिए थोड़ी संवेदना भी मिला दी है. साजिद-वाजिद का संगीत भी काफ़ी अच्छा बन पड़ा है और अब फ़िल्म रिलीज़ के बाद औऱ ज़्यादा सुना जाएगा.

हरि वेदांतम ने कैमरे से कमाल किया है और अनल अरासु का ऐक्शन और स्टंट निर्देशन असाधारण है और फ़िल्म का सबसे मज़बूत पक्ष भी है.

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि हीरोपंती एक हिट फ़िल्म साबित होगी.

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