कंडोम पर भी चढ़ा आईपीएल का बुख़ार!

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यूं तो हमने कंडोम के कई विज्ञापन देखे हैं पर इस विज्ञापन को देखकर में दंग रह गया. ये विज्ञापन था कंडोम के 'टी 20' पैक का.

क्रिकेट के साथ जुड़कर यूं तो कई ब्रांड्स ने जमकर अपनी मार्केटिंग की है पर एक ब्रांड ऐसा भी है जो ख़ुद क्रिकेट के बराबर हो गया है.

आईपीएल टी20, क्रिकेट का एक ऐसा टूर्नामेंट है जिसकी दीवानगी साल 2008 से शुरू हुई और साल दर साल ये दीवानगी बढ़ती ही जा रही है.

इसकी दीवानगी का आलम हर घर में शाम को तो दिखता ही है. पर लगता है कि कंपनियां इसकी दीवानगी बिस्तर तक भी पहुँचाने की कोशिश में हैं.

उस दिन मेरी नज़र टीवी पर आ रहे एक विज्ञापन पर टिक गई - कंडोम के विज्ञापन पर. ये विज्ञापन था कंडोम के 'टी 20' पैक का.

कंडोम बनाने वाली एक कंपनी ने एक स्पेशल "टी 20" कंडोम पैक निकाला है जो मार्किट में उपलब्ध है और ये कंडोम इस साल चल रहे आईपीएल के सातवें संस्करण के दौरान बाज़ार में उतारा गया है.

सवाल ये उठता है कि कंडोम जैसी चीज़ को बेचने के लिए क्या आईपीएल जैसे बड़े ब्रांड का नाम होना ज़रूरी है या ये ब्रांड की पहचान बनाने के लिए एक मार्केटिंग नीति है?

कमाल की मार्केटिंग

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जब मैंने एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ को ये बात बताई तो वो ज़ोर ज़ोर से हंस पड़े.

प्रहलाद ने फिर कहा,"ये बहुत ही अच्छी मार्केटिंग नीति है. इससे उस कंडोम बनाने वाली कंपनी को काफ़ी फ़ायदा होगा और इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि आईपीएल के नाम से उन्हें अच्छी ख़ासी लोकप्रियता मिलेगी."

उन्होंने आगे कहा, "देखो कई लोग कंडोम खरीदने में थोड़ा बहुत हिचकिचाते हैं, धीमी आवाज़ में बोलते हैं. उनके लिए तो ये पूरी तरह काम करेगा. उन्हें बस दुकान पर जाकर कहना होगा 'भईया एक टी20 देना' और बस काम हो जाएगा. इससे आपको 'निरोध' और 'सुल्तान' जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा."

प्रहलाद से बात करने के बाद मैंने सोचा कि क्यों न बाज़ार जाकर किसी मेडिकल स्टोर से पूछा जाए कि क्या इस तरह के स्पेशल कंडोम जब बाज़ार में आते हैं तो क्या कोई इन्हें खरीदने भी आता है?

मैं पहुंचा दिल्ली की मशहूर बंगाली मार्किट में जहां कई सारे मेडिकल स्टोर्स हैं. मैं उनमें से एक में जा घुसा.

वहां मेरी मुलाक़ात हुई छह साल से वहां काम कर रहे भोला से.

युवराज का विज्ञापन

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Image caption आईपीएल के दौरान एक कंपनी ने निकाला टी20 पैक .

मैंने भोला को उस स्पेशल 'टी 20' कंडोम के बारे में बताया और उनसे पूछा, "क्या इस तरह के कंडोम जब आपके पास आते हैं तो लोग उसे खरीदते हैं?"

मेरे सवाल पर भोला बोले, "देखिये सबका अपना-अपना ब्रांड होता है और सब कंडोम ब्रांड के हिसाब से ही खरीदते हैं. ये कंपनी अभी नई-नई आई है और आईपीएल के ज़रिये ये मार्किट में अपना नाम बनाना चाहती है."

अब चाहे ये कंपनी अपना नाम बनाना चाहती हो या फिर अपना उत्पाद बेचना, इन दोनों ही मामलों में आईपीएल का नाम इनकी बखूबी मदद कर रहा है.

मुझे इस सबके बीच क्रिकेटर युवराज सिंह के एक विज्ञापन का एक वाक्य याद आ रहा है जो इस पूरी कहानी पर अच्छी तरह लागू होता है.

वो वाक्य है, "जब तक बल्ला चल रहा है, ठाठ है."

अब देखना ये है कि जब ये बल्ला रुकेगा तो ठाठ रहेगा या फिर.....

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