हां, मोदी के आने से हुई निराशा: हंसल मेहता

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लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलने के बाद निर्देशक हंसल मेहता ने चुनाव परिणामों पर निराशा ज़ाहिर की है.

बीबीसी से बातचीत में हंसल मेहता ने कहा, "हां, मैं इन परिणामों से निराश था. और मैंने इसे व्यक्त भी किया. मैंने भाजपा के विरोध में मत दिया था. लेकिन ये लोकतंत्र है. हमें बहुमत का सम्मान करना चाहिए. उम्मीद करते हैं नई सरकार बेहतर काम करेगी!"

हंसल ने ये भी कहा, "उम्मीद है कि नई सरकार उन लोगों के हित में भी काम करेगी जिन लोगों या समुदाय ने भाजपा के विरोध में मत दिया या जो इस पार्टी की विचारधारा से सहमत नहीं हैं."

तो नई सरकार से उन्हें क्या उम्मीद है ? हंसल बोले, "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाए. लोगों को अपने विचार रखने की आज़ादी मिले. हम जैसी फ़िल्म बनाना चाहते हैं वो बनाने से कोई हमें ना रोके."

'धर्मनिरपेक्ष सरकार'

Image caption निर्देशक हंसल मेहता ने बीबीसी से बात करते हुए माना कि भाजपा की जीत से उन्हें निराशा हुई.

लोकसभा चुनाव परिणाम आने से पहले पटकथा लेखक अंजुम राजाबाली ने एक अभियान चलाया था जिसमें लोगों से एक 'धर्मनिरपेक्ष सरकार' चुनने की अपील की गई थी.

और इस अपील को हंसल मेहता, महेश भट्ट, नंदिता दास, इम्तियाज़ अली, कबीर ख़ान और शुभा मुदग्ल जैसी हस्तियों ने सपोर्ट किया था.

वहीं फ़िल्मकार महेश भट्ट ने भी बीबीसी से बात करते हुए कहा था, "मैं भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से सहमत नहीं हूं लेकिन अब जब उनकी सरकार बन गई है तो उन्हें बधाई. उम्मीद करते हैं कि वो लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरें."

'सिटीलाइट्स'

इस शुक्रवार को हंसल मेहता निर्देशित फ़िल्म 'सिटीलाइट्स' रिलीज़ हो रही है. फ़िल्म के निर्माता महेश भट्ट हैं. इसमें राजकुमार राव और पत्रलेखा की मुख्य भूमिका है.

फ़िल्म के बारे में हंसल ने कहा, "दरअसल भट्ट साहब का नाम अर्थ, सारांश और डैडी जैसी बेहतरीन फ़िल्मों से हुआ. उन्होंने मुझसे कहा कि वो उसी ब्रांड का सिनेमा बनाना चाहते हैं. महेश भट्ट ने मुझसे कहा कि बहुत पैसे कमा लिए अब मैं वो फ़िल्म बनाना चाहता हूं जिस तरह की फ़िल्मों ने मुझे पहचान दी."

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क्या महेश भट्ट जैसा नामी गिरामी फ़िल्मकार बतौर निर्माता जुड़ा होने से किसी तरह की असुरक्षा महसूस नहीं हुई.

इसके जवाब में हंसल ने कहा, "पहले मुझे ज़रूर डर लगता था कि कहीं भट्ट साहब सेट पर आकर मुझे सुपरवाइज़ ना करने लगें. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. उनकी मौजूदगी प्रेरणा देती थी, बल्कि उन्होंने मुझसे कहा कि मैं तुम्हें कुछ नहीं बताउंगा. तुम ईमानदारी से अपना काम किए चले जाओ. शुक्र है फ़िल्म उन्हें बहुत पसंद आई."

'सिटीलाइट्स' से पहले हंसल मेहता ने फ़िल्म 'शाहिद' बनाई थी जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था.

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