रिव्यू: कुछ ताकत भी है सलमान की 'किक' में?

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रेटिंग: *1/2

सलमान ख़ान की फ़िल्मों में सलमान ख़ान के अलावा शायद ही कोई और एक्टर लोगों को याद रहता हो. और ऐसा होना लाज़िमी भी है. लोग सलमान ख़ान को ही देखने के लिए तो टिकट ख़रीदते हैं.

'किक' में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी जैसे मंझे हुए कलाकार भी हैं जो चार या पांच सीन से ज़्यादा में नज़र नहीं आते. उनका काम फ़िल्म में अच्छा है.

(रिव्यू: 'पिज़्ज़ा')

ख़ासतौर से फ़िल्म में जब वो सलमान ख़ान के सामने खड़े नज़र आते हैं तब महसूस होता है कि बड़े बजट की ऐसी फ़िल्मों में हमारे सुपरस्टार्स के सामने ऐसे ही ताक़तवर कलाकार होने चाहिए.

उससे 'किक' जैसी बेवक़ूफ़ाना स्क्रिप्ट वाली फ़िल्में भी कुछ हद तक देखने लायक़ बन ही जाती हैं.

सलमान के लिए दीवानगी

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जो भी हो लेकिन हमारे यहां दर्शक कुछ सुपरस्टार्स को परदे पर देखकर दीवाने हो ही जाते हैं. चाहे वो कुछ भी कर रहे हों.

लोगों की ये दीवानगी समझ पाना मुश्किल है. इसके लिए आप कोई तर्क नहीं दे सकते. ये समझना बहुत मुश्किल है कि लोग किसे स्टार बना दें ?

(रिव्यू: 'हंप्टी शर्मा की दुल्हनिया')

सुपरमैन और स्पाइडरमैन मिलकर भी भारत में सलमान ख़ान की स्टारडम का मुक़ाबला नहीं कर सकते.

महाशक्तिशाली सलमान !

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'किक' में सलमान ख़ान सर्वशक्तिमान हैं. वो टेबल टेनिस में अकेले ही डबल्स टीम को हरा सकते हैं. वो कानों में जन्मजात कुंडल पहनकर पैदा हुए हैं.

दो साल की छोटी उम्र में सैकड़ों फ़ीट की ऊंचाई से स्वीमिंग पूल में छलांग लगा सकते हैं.

(रिव्यू: 'बॉबी जासूस')

लेकिन जब वो ईद में लाखों लोगों की भीड़ को थिएटर में खींचकर एक घटिया फ़िल्म दिखाने की क्षमता रखते हैं तो ये सारी सुपरपावर तो छोटी-मोटी बातें हैं.

उनकी फ़िल्मों की कमाई की चर्चा तो मीडिया में कुछ यूं होती है जैसे ये सलमान के प्रशंसकों में बांटी जाएगी.

'धूम'नुमा फ़िल्म

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मैंने ये फ़िल्म 'भाई' के भक्तों के साथ देखी. 'किक' एक तरह से 'धूम 4' लगती है.

फ़िल्म में सलमान डेविल बने हैं जो मास्क पहनकर ख़ज़ाना लूटता है (जैसे 'धूम-3' में आमिर लूटते हैं) और पुलिस इंस्पेक्टर रणदीप हुडा (जैसे 'धूम' में अभिषेक बच्चन और उदय चोपड़ा) उन्हें दिल्ली से वॉरसा तक बस खोजते ही रहते हैं.

(रिव्यू: 'एक विलेन')

किक में एंटी हीरो (सलमान ख़ान) है, हीरो के पापा (मिथुन चक्रवर्ती) हैं, दूसरा हीरो (रणदीप हुडा) और एक विलेन (नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी) है.

जब आपको लगता है कि फ़िल्म ख़त्म होने वाली है तो ये फिर से फ़्लैशबैक में चली जाती है और एक नई कहानी शुरू हो जाती है. फ़िल्म के इस हिस्से में सलमान को रॉबिनहुड के तौर पर पेश किया गया है.

बेमानी है रिव्यू!

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सलमान के अलावा फ़िल्म में बस कुछ गाने और एक्शन सीन हैं. फ़िल्म के बेहतरीन स्टंट सीन और पीछा करने वाले दृश्य आप प्रोमो में पहले ही देख चुके हैं.

हां, एक ख़ास बात. अगर मैंने फ़िल्म का कोई सीन मिस नहीं किया तो सालों बाद ये कोई ऐसी फ़िल्म होगी जिसमें सलमान ने शर्ट नहीं उतारी.

आख़िर में एक बात कहना चाहूंगा. सलमान की फ़िल्मों की समीक्षा करना अंडरवियर में इस्तरी करना जैसा है. जिसका कोई मतलब नहीं है.

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