टीवी पर अमिताभ बच्चन का फ़्लॉप 'युद्ध'

  • 28 जुलाई 2014
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कहा तो ये कहा जा रहा था कि सदी के सबसे बड़े स्टार अमिताभ बच्चन छोटे पर्दे पर भी बड़ा हंगामा खड़ा करने वाले हैं और कहाँ उनके पहले सीरियल के मुँह के बल गिरने की नौबत आ गई है.

हिंदी सिनेमा में जिस अमिताभ बच्चन का सिक्का सत्तर की उम्र में भी चलता है, टेलीविज़न पर उनके पहले सीरियल 'युद्ध' का कोई नामलेवा भी नज़र नहीं आ रहा.

न कहीं अख़बारों की सुर्ख़ियाँ बन रहीं, न ही टेलीविज़न शोज़ में इसकी चर्चा है.

बेहद कम टीआरपी

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टीवी शो की लोकप्रियता मापने के पैमाने टीआरपी नंबर्स को पैमाना बनाया जाय तो हिंदी सिनेमा के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ अपना ये 'युद्ध' हारते नज़र आ रहे हैं.

(जब मनोज कुमार ने 'रोका' अमिताभ को)

शो की टीआरपी रही महज़ 0.7 और ज़ाहिर है अमिताभ बच्चन इस फ़्लाप रिपोर्ट से ख़ुश तो क़तई नहीं होंगे.

तुलना में उन्हीं के 'कौन बनेगा करोड़पति' जैसे लोकप्रिय शो की रेटिंग्स 15 और 16 तक पहुँच गई थीं.

इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि रोती-झगड़ती, ज़ेवरों से लदी सास-बहुओं ने सदी के महानायक को टेलीविज़न के पर्दे पर हरा दिया है.

क्यों छाया है सन्नाटा

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हालाँकि 'युद्ध' को शुरू हुए दो हफ़्ते होने जा रहे हैं पर इतना सन्नाटा क्यों है भाई....?

('थोपे' जा रहे हैं फ़िल्मी बच्चे)

अचरज इस बात का है कि टीवी इंडस्ट्री से जुड़े जाने-माने लोगों ने शो और अमिताभ की इस विफलता पर चुप्पी साध रखी है.

हमने शो के कई कलाकारों से बात करनी चाही लेकिन कोई इस पर बात करने को तैयार नहीं है.

शो के क्रिएटिव डायरेक्टर अनुराग कश्यप से जब सवाल किया गया तो वो बोले, "अभी मैं अपनी फ़िल्म बॉम्बे वैलवेट को लेकर इतना व्यस्त हूं कि मुझे किसी बात की कोई ख़बर नहीं."

शो के क्रिएटिव कंसलटेंट हैं शुजित सरकार और इसका निर्देशन कर रहे हैं ऋभु दासगुप्ता.

उलझी कहानी ?

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कहा जा रहा है कि ये भारतीय टीवी इतिहास का सबसे महंगा फ़िक्शन शो है और हर एपिसोड की लागत कथित तौर पर तीन करोड़ रुपए है.

इतने ताम-झाम के बाद भी शो का न चल पाना हैरानी भरा है.

जानी-मानी फ़िल्म समीक्षक नम्रता जोशी कहती हैं कि शो का टाइम स्लॉट रात साढ़े दस बजे है जो शायद उपयुक्त नहीं है. लेकिन नम्रता इतने भर से शो को क्लीन चिट देने को तैयार नहीं है.

वो कहती हैं, "शो की कहानी बड़ी उलझी है. हम भारतीय दर्शक टीवी पर ऐसे शो देखने के आदी नहीं है. और जिस तरह के दर्शक वर्ग को ये टारगेट करता है वो पहले से ही इससे कहीं ज़्यादा अच्छे और सधे हुए अंग्रेज़ी फ़िक्शन शो देखता है. तो वो दर्शक वर्ग भला क्यों ये देखेगा."

बेरंग अमिताभ ?

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पर अगर आपने ये सीरियल देखा हो तो शायद आप भी मानेंगे कि इसमें अमिताभ बच्चन एकदम थके हुए और अनमने से बुज़ुर्ग नज़र आते हैं.

(अमिताभ का 'युद्ध')

हो सकता है आने वाले एपिसोड्स में वो खलनायकों को फ़्लाइंग किक मारते हुए नज़र आएँ और शो में कुछ जान आए, मगर फ़िलहाल तो अपना एक कमज़ोर हाथ सँभालने की कोशिश करते हुए वो कनफ़्यूज़ ज़्यादा कर रहे हैं.

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'युद्ध' को बनाने वाले प्रोडक्शन हाउस एंडेमॉल के हेड दीपक धर भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं.

शो में काम करने वाले कलाकार संजय गांधी (वो बड़ी मुश्किल से हमसे बात करने को तैयार हुए) शो को नाकाम मानने को तैयार नहीं. संजय, शो में अमिताभ के साले का रोल निभा रहे हैं.

वो कहते हैं, "पहली बात तो ये कि शो रात साढ़े दस बजे आता है जो भारतीय टीवी दर्शकों के लिए बड़ा अजीब टाइम है. हमें शुरुआत से ही लग रहा था कि ये ग़लत वक़्त है. वैसे शो को शुरु हुए अभी ज़्यादा वक़्त नहीं हुआ है. हमें उम्मीद है कि आने वाले वक़्त में इसकी रेटिंग्स में इज़ाफ़ा होगा."

संजय की उम्मीदों को साकार करने के लिए किसी बड़े करिश्मे की ज़रूरत है. मगर फ़िलहाल को अमिताभ बच्चन का भी सहारा काम नहीं आ रहा.

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