इनके लिए कुछ भी कर सकते हैं नसीर

नसीरुद्दीन शाह

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में तीन साल की पढ़ाई के बाद भी पुणे फ़िल्म इंस्टीट्यूट गए क्योंकि उनकी नज़र में ये फ़िल्म इंडस्ट्री का पासपोर्ट था.

उन्हें यक़ीन था उनके लायक़ फ़िल्में बनाने वाले मौजूद हैं तो काम मिल ही जाएगा और हुआ भी ऐसा ही.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में नसीरुद्दीन शाह ने उन चार लोगों का ज़िक्र किया जो उनकी ज़िंदगी में ख़ास जगह रखते हैं.

गुलज़ार

गुलज़ार के महत्वाकांक्षी टेलीविज़न धारावाहिक 'मिर्ज़ा ग़ालिब' में मुख्य भूमिका निभाने को नसीर अपनी ख़ुशक़िस्मती मानते हैं.

वो कहते हैं, "उस भूमिका के लिए मैं सिर्फ़ पांच फ़ीसदी श्रेय लेता हूं क्योंकि मिर्ज़ा ग़ालिब में नब्बे फ़ीसदी योगदान गुलज़ार की स्क्रिप्ट का है."

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वो आगे कहते हैं, "मैं ये अच्छी तरह से जानता हूं कि मैं क्या, दुनिया का कोई अभिनेता नहीं कर पाता अगर वो स्क्रिप्ट ना होती."

नसीर कहते हैं, "गुलज़ार भाई के लिए कुछ भी करूंगा."

श्याम बेनेगल

निर्देशक श्याम बेनेगल भी 70 के दशक में फ़िल्मों में क़दम रख रहे थे और उन्होंने नवोदित नसीरुद्दीन शाह को मौक़ा दिया.

नसीर कहते हैं, "लोगों की राय ने ही मुझे बनाया है, अगर श्याम बेनेगल, अल्काज़ी साहब वग़ैरह अपनी राय न देते तो आज मैं वो नहीं होता जो हूं."

बेनेगल ने नसीर को 'निशांत', 'मंथन' और 'भूमिका' जैसी यादगार फ़िल्में दीं.

सई परांजपे

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Image caption सई परांजपे की 'स्पर्श' को नसीरुद्दीन शाह अपनी बेहतरीन फ़िल्म मानते हैं.

मध्यवर्गीय परिवारों की कहानियों को हास्य में पिरोकर फ़िल्में बनाने वाली सई परांजपे की पहली फ़िल्म 'स्पर्श' में नसीरुद्दीन शाह ने एक दृष्टिहीन का किरदार निभाया.

वो कहते हैं, "सई ने मुझे बुलाया और स्क्रिप्ट पढ़ने को दी. मैंने पहला पन्ना पढ़ा और कहा कि मैं ये फ़िल्म कर रहा हूं. सई ने कहा पढ़ तो लो. मैने कहा बाक़ी घर जाकर पढ़ूंगा."

'स्पर्श' को नसीरुद्दीन शाह अपने करियर की बेहतरीन भूमिका मानते हैं. वो उसे सबसे ऊपर रखते हैं.

शेखर कपूर

नसीर मानते हैं कि शेखर कपूर भारतीय सिनेमा के वो निर्दशक हैं जिनमें बहुत दम था लेकिन बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों ही उनकी क़ाबिलियत के साथ इंसाफ़ नहीं कर सके.

नसीर कहते हैं, "फ़िल्म मासूम में काम करते वक़्त मुझे एक दिन में पता चल गया था कि ये कितना क़ाबिल आदमी है. इसे पता है ये क्या कर रहा है. लेकिन इस इंडस्ट्री ने उसे फ़िल्में नहीं बनाने दीं."

नसीरुद्दीन शाह, 'मासूम' को भी अपने करियर की शानदार फ़िल्म मानते हैं.

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