चोपड़ा या ख़ान होती तो और बात होती: ऋचा

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"अगर आप नए हैं और आपके पास एक मशहूर ख़ानदान का नाम नहीं है, तो मुश्किलें ज़रूर आएंगी."

यह कहना है अभिनेत्री ऋचा चड्ढा का जिनकी फ़िल्म 'तमंचे' इस शुक्रवार को रिलीज़ हुई.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में ऋचा ने कहा, "मेरे नाम के आगे ख़ान या चोपड़ा लगा होता तो शायद मेरे लिए राह आसान होती."

'अफ़सोस नहीं'

तो क्या ऋचा को अफ़सोस है?

जवाब में वह बोलीं, "मैं बड़े नामी-गिरामी निर्माताओं के साथ काम करना मिस नहीं करती क्योंकि मुझे मेरे काम से प्यार है. मैं काम पैसों के लिए नहीं अपनी ख़ुशी के लिए करती हूं."

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Image caption 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' में अभिनय के लिए ऋचा चड्ढा को तारीफ़ मिली.

लेकिन ऋचा को बॉलीवुड की स्टार कल्चर से शिक़ायत है.

शिक़ायत

वह कहती हैं, "बड़े बैनर तो सिर्फ़ स्टार के साथ ही काम करते हैं. छोटे निर्देशकों की फ़िल्में भी जब हिट हो जाती हैं, तो वो अपनी अगली फ़िल्म किसी बड़े सितारे के साथ करना चाहते हैं."

ऋचा अभय देओल के साथ फ़िल्म 'ओए लकी लकी ओए' में पहली बार दिखी थीं लेकिन इसे वह अपना ब्रेक नहीं मानतीं.

वो कहती हैं, "इस फ़िल्म के बाद भी डेढ़ साल तक मैं खाली थी. मैं अपना असल ब्रेक मानती हूं गैंग्स ऑफ़ वासेपुर को."

'गैंग्स ऑफ़..'

'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' में मनोज बाजपेयी की पत्नी के रूप में ऋचा के अभिनय को वाहवाही मिली थी.

इसके अलावा संजय लीला भंसाली के साथ काम करने की चाहत में उन्होंने 'गोलियों की रासलीला राम लीला' में एक छोटा सा रोल भी क़बूल कर लिया.

'तमंचे' में उनके साथ निखिल द्विवेदी हैं. ऋचा ने एक चोर का किरदार निभाया है.

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