'मैं ऑस्कर लाऊंगी'

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पियानो पर बैठकर पूजा जब बला की तेज़ी से संगीत रचती हैं तो कमाल का नज़ारा होता है.

वो पियानो को देखे बिना ही दो मिनट में नई धुन निकाल देती हैं.

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हैदराबाद में पली बढ़ी और मुंबई में रह रही पूजा नीलम कपूर 21 साल की हैं और बचपन से डिस्लेक्सिया की शिकार हैं.

जब वो छोटी थीं तब एक दफ़ा दवा के ग़लत डोज़ की वजह से उन्हें दिमाग़ी दौरे पड़ने शुरू हो गए.

लेकिन बचपन से संगीत की शौक़ीन पूजा ने इस बीमारी को आड़े नहीं आने दिया.

डिस्लेक्सिया से निपटने के लिए उनकी मां ने उंगलियों के व्यायाम के लिए उन्हें पियानो दिलाया.

पियाने ने पूजा की ज़िंदगी ही बदल दी.

कामयाबी

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हैदराबाद में पूजा की प्रतिभा के चर्चे सुनकर टीवी निर्माता एकता कपूर ने उनसे संपर्क किया.

जब पूजा महज़ 15 साल की थीं तो उन्होंने एकता के सीरियल 'काव्यांजलि' और 'क्या होगा निम्मो का' के लिए संगीत दिया.

वो कई टीवी रियलिटी शोज़ में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं.

उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं.

सपने

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हैदराबाद में एक सड़क दर्घटना के बाद पूजा कपूर के भाई के दोनों पैर लकवाग्रस्त हो गए.

उनके बेहतर इलाज के लिए पूजा का परिवार पांच साल पहले मुंबई आ गया.

पूजा कहती हैं, "मैं संगीत में कामयाबी पाना चाहती हूं. अपने भाई को बिलकुल ठीक करवाना चाहती हूं. मां ने मेरे सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की. मैं उनके लिए ऑस्कर लाना चाहती हूं."

मैं हूं साधारण

पूजा नीलम कपूर ने दसवीं तक पढाई की और वो कॉलेज करना नहीं चाहती.

पूजा के मुताबिक़ उन्हें गॉसिप करना और फ़िल्में की बातें करना पसंद नहीं.

वो कहती हैं, "कभी मुझे मेक-अप का शौक़ था. अब नहीं है. मैं पूरा ध्यान सिर्फ़ संगीत में लगाना चाहती हूं."

मां का रोल अहम

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पूजा दिवंगत यश चोपड़ा से लेकर सलमान ख़ान, ऋतिक रोशन और शंकर महादेवन से भी मिल चुकी हैं.

वो बताती हैं कि इन सभी ने उनका हौसला बढ़ाया है.

वो अपनी ज़िंदगी में मां को बेहद अहम मानती हैं.

और मां के चेहरे पर ख़ुशी देखने के लिए बड़ी कामयाबी हासिल करना चाहती हैं.

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