कैसा रहा नसीर का 'आइंस्टाइन' रूप?

नसीरुद्दीन शाह

नसीरूद्दीन शाह अभिनित नाटक ‘आइंस्टाइन’ का मुंबई में हाल ही में मंचन हुआ.

कनाडा के नाट्य लेखक गेब्रियल एमानुएल की स्क्रिप्ट में आइंस्टाइन की ज़िंदगी के कई पहलुओं को समझाया गया था.

'आइंस्टाइन' के किरदार के साथ न्याय करने में नसीरूद्दीन ने कोई कसर नहीं छोडी.

यहूदी लहज़ा, झुकी हुई पीठ, आश्चर्य भरे भाव, ऊपर तनी हुई भौंहें, औपचारिक लिबास पहनने पर बदलती बॉडी लैंग्वेज जैसी अभिनय की बारीकियां. कोई और अभिनेता ऐसी सहूलियत से शायद ही निभा पाता.

नाटक के सेट पर रखी बहुत सारी किताबें, वर्किंग टेबल, पुराना टाइपराइटर, आराम कुर्सी, ब्लैक बोर्ड एक वैज्ञानिक की छवि को संपूर्णता देने वाला था.

रोचक तथ्य

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जिस वैज्ञानिक को हमने सिर्फ़ किताबों में देखा था वह नाटक में सबके सामने जीवंत हो कर अपनी बात कर रहा था.

इस नाटक में आपको पता चलता है कि आइंस्टाइन को संगीत का शौक अपनी मां से मिला था और विज्ञान में रुचि के लिए पिता का बचपन में दिया हुआ कैम्पास कमाल कर गया. वहीं एलज़ेब्रा का खेल वह अपने अंकल याकूब के साथ खेलते थे.

अपनी पहली बीवी मिलेवा, बच्चे, धर्म के लिए उनकी सोच, अन्य वैज्ञानिकों से मतभेद, उनकी रिलेटविटी की थ्योरी को एक वाक्य में समझना, बेल्जियम की क्वीन एलिज़ाबेथ से लेकर चार्ली चैपलीन जैसे उनके दोस्त. ऐसी कई बातें उन्हीं की ज़ुबानी हमें जानने को मिलती हैं.

वास्तविकता के करीब

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मंच के एक कोने में रखी गई प्रोजेक्टर स्क्रीन पर आइंस्टाइन से जुड़े लोगों की तस्वीरें दिखाई गई जिसने इस आत्मकथानक के नाटकीय संवाद को वास्तविकता के और करीब बनाया.

नसीरूद्दीन शाह से जब हमने पूछा कि इस किरदार को, स्क्रिप्ट को आपने मंच पर लाने के लिए क्या मशक्कत की, तो उन्होंने कहा, "मशक्कत तो क्या, में तो बस इतना ध्यान रखता हूँ कि मैं कहीं स्टेज पर रखे फर्नीचर से टकरा ना जाऊं, और अपनी लाइंस कहीं भूलूँ नहीं."

संवादो में हास्य और कटाक्ष बहुत असकारात्मक तरीके से बुने गए थे जिसकी वजह से नाटक की गंभीरता यथावत् रहने के साथ-साथ मनोरंजन का स्वाद भी मिलता रहा.

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