कुमार गंधर्व की बेटी के लिए 'बैरी था संगीत'

  • 22 नवंबर 2014
कलापिनी कोमकली

कलापिनी कोमकली एक शास्त्रीय गायिका हैं और पंडित कुमार गंधर्व की बेटी और शिष्या हैं.

हाल ही में उन्होंने अपने पिता पर लिखी गई एक किताब का संपादन किया है जिसका नाम है 'कालजयी कुमार गंधर्व'. यह पुस्तक दो भागों में बंटी है.

(सुनिए: कलापिनी से बातचीत का पहला हिस्सा)

पहला भाग समर्पित है मराठी भाषा को. इसमें मराठी भाषा में कुमार गंधर्व के सांगीतिक योगदान के बारे में लिखे गए आलेखों का संग्रह है.

दूसरे भाग में अंग्रेजी और हिंदी में कुमार गंधर्व पर लिखे गए आलेखों का संग्रह है.

बचपन

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शास्त्रीय गायिका कलापिनी कोमकली को बचपन में संगीत से बहुत ग़ुस्सा आता था.

कलापिनी बताती हैं, "मुझे बचपन में ये लगता था कि ये संगीत मेरा बैरी है. घर में सभी लोग गा रहे होते थे और मेरी इच्छा ये रहती थी कि मेरे माता पिता मुझ पर ध्यान दें. तब मुझे लगा कि ये जो संगीत है, इससे बड़ा बैरी कोई नहीं है."

(सुनिए: कलापिनी से बातचीत का दूसरा हिस्सा)

वे आगे बताती हैं, "जब भी मैं नींद से उठती थी और अपनी मां को अपने क़रीब नहीं पाती थीं तो मुझे तुरंत पता चल जाता था कि वो बाबा के कमरे में उनके सामने रियाज़ कर रही होंगी. मैं तुरंत उनके पास जाती, उनके गले में अपनी बाहें डालती और कहती 'अब तुम मत गाओ'.

कुमार गंधर्व

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कुमार गंधर्व को टीबी की बीमारी हुई जिसकी वजह से उनकी गायकी पर काफ़ी असर पड़ा. बीमारी से ठीक होने के बाद उन्होंने दोबारा गाना शुरू किया.

(सुनिए: कलापिनी से बातचीत का तीसरा हिस्सा)

कलापिनी बताती हैं, "मैं बाबा से पूछती थी कि बाबा अगर आप इस तरह बीमार नहीं पड़ते तो क्या आपका इस तरह का सृजन होता या नहीं? उन्होंने कहा, जब मैं पलंग पर पड़े पड़े ये सोचता था तो पेड़ पर बया पक्षी की आवाज़ मुझे बहुत तंग करती है, मुझे चैन से सोने तक नहीं देती थी. तब मैंने सोचा कि अगर इसकी आवाज़ इतनी ज़्यादा तेज़ है तो मैं कहीं ज़्यादा विशाल हूं. मैं तो हिला कर रख दूंगा और अब मुझे इस बीमारी से उबरना ही है."

कलापिनी कोमकली ने कहा कि वो बहुत ख़ुशकिस्मत हैं कि कुमार गंधर्व उनके पिता हैं.

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