थिएटर संग 'साग मीट' का लुत्फ़

  • 28 नवंबर 2014
एनसीपीए थिएटर फ़ेस्टिवल इमेज कॉपीरइट MANISH SHUKLA

नेशनल सेंटर फ़ॉर परफार्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए) के थिएटर फ़ेस्टिवल सेंटर स्टेज में इस साल 10 दिनों में 14 बिलकुल नए नाटकों का मंचन होगा.

अंग्रेज़ी, हिंदी, गुजराती और मराठी भाषाओं में होने वाले इन नाटकों में कई युवा प्रतिभाओं के साथ देश-दुनिया के मंझे हुए थिएटर कलाकार अपना हुनर दिखाएंगे.

28 नवंबर से सात दिसंबर तक चलने वाले इस फ़ेस्टिवल में दर्शकों को उम्मीद है कि विश्व थिएटर जगत से आए कलाकारों के ज़रिए उन्हें नाट्यशास्त्र के नवरस का स्वाद ज़रूर मिलेगा.

'आधुनिक विषयों पर नाटक'

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एनसीपीए के चेयरमैन खुशरू संतुक ने कहा, "हम युवा टैलेंट को एक स्टेज देना चाहते हैं जो आधुनिक और प्रासंगिक विषयों पर काम करे."

‘द गवर्नमेंट इंस्पेक्टर', ‘हैप्पी बर्थडे सुनीता’, ‘नानी मां’, ‘पॉपकॉर्न विद परसाई’, ‘ईला’, ‘साग मीट’, ‘टेक मी इन योर हैंड्स’ जैसे नाटक फ़ेस्टिवल के आकर्षण हैं.

शबाना आज़मी अभिनीत ‘हैप्पी बर्थडे सुनीता’ एक ब्रिटिश-पंजाबी परिवार की कहानी है जिसमें बेटी की 40वीं सालगिरह के लिए इकट्ठा हुए परिवार के सदस्यों के दिलों में दबी कई बातें बाहर आती हैं.

नाटक ‘टेक मी इन योर हैंड्स’ दीपिका रॉय ने निर्देशित किया है जिसमें एक किताब की दुकान के ज़रिए मिले दो किरदारों की कहानी है.

परसाई को श्रद्धांजलि

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आइडियाज़ अनलिमिटेड का ‘पॉपकॉर्न विद परसाई’ एक सोलो एक्ट है जिसमें मशहूर व्यंगकार हरिशंकर परसाई का पात्र दयाशंकर पांडे निभा रहे हैं.

इस नाटक के निर्देशक मनोज शाह ने कहा, "मैं इस स्क्रिप्ट पर एक साल से ज़्यादा वक़्त से अपने लेखक निलय उपाध्याय के साथ काम कर रहा हूं. इस बायोग्राफ़िकल नाटक के ज़रिए हम महान व्यंग्यकार परसाई को श्रद्धांजलि दे रहे हैं."

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गुजराती नाटक ‘नानी मां’ के निर्देशक प्रीतेश सोढ़ा ने अपनी कृति में पीढ़ियों के अंतर को सटीक तरीक़े से दर्शाया है.

एक नानी जब अपने रूठे हुए पोते से 20 साल बाद मिलती है तो क्या होता है, यही नाटक की कहानी है.

प्रीतेश, इस तरह के फ़ेस्टिवल को भारत में थिएटर के विकास के लिए बहुत अहम मानते हैं.

'साग मीट'

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दूरदर्शन के मशहूर धारावाहिक 'बुनियाद' से लोकप्रिय हुईं अभिनेत्री सीमा पाहवा अपने नाटक 'साग मीट' में नया प्रयोग करेंगी.

मंच पर नाटक के मंचन के बाद सीमा दर्शकों को साग मीट भी खिलाएंगी. ऐसा शायद पहली बार हो रहा है.

इसके अलावा पूजा स्वरूप के नाटक ईला का भी मंचन किया जाएगा. पूजा को इसका विचार, देव दत्त पटनायक की लिखी शार्ट स्टोरी 'प्रेग्नेंट किंग' से आया.

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पूजा कहती हैं, "हर व्यक्ति में स्त्रीत्व और पुरुषत्व के गुण कम-ज़्यादा मात्रा में होते हैं. यही बात हमारे नाटक का आधार बनी. हमारी कोशिश है कि हम जेंडर इश्यू को अलग तरीके से दिखाएं."

इनके अलावा 'जुग जुग जियो', 'अटके भटके लटके सुर' और 'स्वीट ड्रीम्स' जैसे नाटक भी फ़ेस्टिवल में देखने को मिलेंगे.

महोत्सव के अंत में इनसाइड आउट एक्टिंग वर्कशॉप का आयोजन भी किया जाएगा.

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