चिलम और दियों में बहती गंगा!

  • विदित मेहरा
  • बीबीसी संवाददाता

मिट्टी के दिए, चिलम और कुल्हड़ से बना गंगा नदी का अद्भुत नज़ारा.

ख़तरे में पड़े पर्यावरण की तरफ़ सबका ध्यान खींचने के लिए कलाकार मानव गुप्ता ने एक नायाब तरीका निकाला.

उन्होंने दिल्ली में हुए अपने शो में मिट्टी से बने हुए दिए, चिलम और कुल्हड़ में गंगा नदी का नज़ारा दिखाया और अपनी बात भी कह डाली.

मानव गुप्ता को फ़ाएनेंशियल टाइम्स ने भारत के 10 कलाकारों की फ़ेहरिस्त में शामिल किया है.

समीक्षकों के अनुसार वे एक आधुनिक कलाकार हैं जो बहुत ही प्रतिभाशाली और अपने काम में निपुण हैं.

मानव इस पूरे साल अपने इस पब्लिक आर्ट के शो के लिए काम करते रहे.

यहां मिट्टी के मटकों से गंगा नदी को दर्शाया गया. मानव गुप्ता कोलकाता में पले बढ़े जहां गंगा नदी थी.

फिर वो दिल्ली आए जहां उन्हें यमुना नदी दिखी. गंगा और यमुना के प्रदूषण को देखकर ही उन्होंने इस प्रदूषण के प्रति लोगों का ध्यान खींचने के लिए कुछ सोचा.

एक ज़माने में खाली बोतल में संदेश भेजा जाता था. मानव ने मिट्टी के चिलम से यह बात पेश की.

मानव गुप्ता दक्षिण अफ्रीका गए जहां उन्होंने मिट्टी की कलाकृतियों से 'गंगा नदी' को दिखाया जो वहां के लोगों को बहुत पसंद आया.

मानव अब चाहते हैं की साउथ अफ़्रीका से हुई अपनी शुरुआत को वो हर जगह ले जाए और 'गंगा नदी' का महत्व सबको समझाएं.

समय बताने वाली 'रेत घड़ी' को मिट्टी से बने कुल्हड़ों के ज़रिए दिखाया गया.

गंगा नदी का बहाव दिखाने के लिए कलाकार मानव गुप्ता ने 'दीयों' से बनाई ये कलाकृति.

मानव कहते हैं, ''अंत में जब इन दीयों को तोड़ा जाता है, तो एक कलाकार को दुख होता है. मैं चाहता हूं कि वह दर्द हमारे पर्यावरण के लिए भी सब महसूस करें.''

बहते पानी का झरना. इसे दीवार से लटकती चिलमों के ज़रिए दर्शाया गया.

कला के ज़रिए पर्यावरण या 'गंगा नदी' के प्रदूषण के बारे में जागरूकता फैलाना एक नई सोच है.

मानव अंत में यही कहते हैं, "मानो तो मैं गंगा मां हूं, न मानो तो बहता पानी."

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