बदलने चाहिए सेंसर बोर्ड के नियम: अनुपम

  • 17 जनवरी 2015
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अभिनेता अनुपम खेर का मानना है कि 'सेंसर बोर्ड की गाइड लाइन बेहद पुरानी हैं और उन्हें तत्काल बदलने की ज़रूरत है.'

अनुपम खेर की फ़िल्म 'बेबी' अगले शुक्रवार को रिलीज़ होने वाली है उसी के प्रमोशन पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने ये बात कही.

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इसी गुरुवार को डेरा सच्चा सौदा के बाबा राम रहीम की विवादित फ़िल्म 'मैसेंजर ऑफ़ गॉड' को फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन एपेलेट ट्राईब्यूनल (एफ़सीएटी) से मंज़ूरी मिलने के बाद लीला सैमसन ने सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

लीला सैमसन ने सेंसर बोर्ड के कामकाज के तरीक़े पर सवाल उठाया था और कहा था कि सरकार का इसके काम में दख़ल है.

अब कहा जा रहा है कि हरी झंडी मिलने के बाद 'मैंसेजर ऑफ़ गॉड' रविवार को रिलीज़ होगी.

'पुराने नियम'

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अनुपम खेर ख़ुद भी सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं.

उन्होंने बोर्ड के काम करने के तरीक़ेपर कहा, "देखिए बोर्ड की ऐसी गाइडलाइंस है जिसमें कोई भी फ़िल्म रिलीज़ हो सकती है और किसी भी फ़िल्म को रोक दिया जाता है. ये गाइडलाइन 1956 की है. हम अंगीठी से माइक्रोवेभ तक आ चुके हैं ऐसे में इन पुराने नियमों से कुछ नहीं होगा. लेकिन मेरे ख़्याल से गाइडलाइंस बदल रही हैं और जल्द ही इनमें सुधार होगा."

'नियमों का पालन नहीं'

अनुपम खेर ने ये भी कहा कि सेंसर बोर्ड के सर्टिफ़िकेट मिलने के बाद उसका ठीक तरह से पालन भी नहीं होता.

उन्होंने कहा, "जिस फ़िल्म को ए सर्टिफ़िकेट मिलता है उसे यहां धड़ल्ले से बच्चे भी देखते हैं. कोई रोक-टोक नहीं. यूरोप में तो ऐसा करने पर उस सिनेमाहॉल का लाइसेंस छिन जाता है."

बेबी के निर्देशक नीरज पांडेय हैं और इसमें अक्षय कुमार की भी मुख्य भूमिका है.

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इससे पहले अनुपम, नीरज की 'अ वेडनसडे' और 'स्पेशल 26' में नज़र आ चुके हैं.

इसके अलावा वो मल्लिका शेरावत के साथ 'द डर्टी पॉलिटिक्स' में भी दिखेंगे.

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