पचास के 'ख़ान्स' पर जलवा बरक़रार!

  • 22 जनवरी 2015
सलमान, आमिर और शाहरुख़ ख़ान इमेज कॉपीरइट AFP REUTERS AFP

हर चीज़ की एक उम्र होती है. फ़िल्मी सितारों की भी चमक उम्र के साथ घटती जाती है. जब अमिताभ बच्चन 50 साल के हुए तब उनका स्टारडम डगमगाने लगा था.

इस साल बॉलीवुड के तीन ख़ान सलमान ख़ान, शाहरुख़ ख़ान और आमिर ख़ान 50 साल के हो जाएंगे. पर इस उम्र में भी ये तीनो ख़ान न सिर्फ़ हिट फ़िल्में दे रहे हैं बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जगह बनाने में भी कड़ी चुनौती दे रहे है.

क्या है ऐसा इन 'ख़ान्स' में जो वो आज तक नंबर एक के पायदान पर हैं?

काम करने का तरीक़ा

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तीनों ख़ान ने लोगों के बीच अपनी अलग छवि बना रखी है. जहां शाहरुख़ ख़ान ने अपनी फ़िल्मों से रोमेंटिक हीरो की छवि बनाई, वहीं सलमान ख़ान रोमांटिक हीरो से दबंग एक्शन हीरो बने हुए नज़र आते हैं और अपने आप को 'परफ़ेक्शनिस्ट' बना रखा है आमिर ख़ान ने.

हिंदी फ़िल्म इतिहासकार राजा भारतन कहते हैं, "शाहरुख़ हर फ़िल्म से निखरते रहे और आमिर ने समझकर फ़िल्में करना शुरू किया. सलमान ख़ान में हमेशा से ही सुनहरा स्पर्श रहा है. पर सिर्फ़ क़िस्मत आपको आगे नहीं ले जा सकती मेहनत भी ज़रूरी है. राजश्री फ़िल्मों ने सलमान ख़ान को बनाया."

हिंदी फ़िल्म इतिहासकार रफ़ीक़ बग़दादी कहते है, "तीनों ख़ानों ने निर्देशकों से साझेदारी कर सफल फ़िल्में दी हैं. मिसाल के तौर पर सलमान ख़ान - सूरज बड़जात्या, शाहरुख़ ख़ान - यश चोपड़ा, आमिर ख़ान - राजकुमार हिरानी. "

फ़िल्म इंडस्ट्री में बदलाव

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राजा भारतन कहते हैं, "भले ही भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री ने अपने सफल 100 साल पूरे किए पर फ़िल्म इंडस्ट्री को पहले सम्मान नहीं मिलता था और फ़िल्मो में अंडरवर्ल्ड का भी काफ़ी प्रकोप था. अब फ़िल्म व्यवसाय को सम्मानजनक व्यवसाय माना जाता है."

वो कहते हैं, "अब फ़िल्म इंडस्ट्री में काफ़ी अनुशासन है. अगर पहले की बात करें संजीव कुमार की तो वो हमेशा से चार से पांच घंटे देरी से काम पर आते थे. देव आनंद साहब समय पर पहुंच जाते थे पर उनके सह कलाकार समय पर नहीं पहुंचते थे."

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वहीं रफ़ीक़ बग़दादी का मानना है, "फ़िल्म इंडस्ट्री में तकनीकी क्रांति भी आई है. मीडिया भी बढ़ा है, टीवी क्रांति के बाद फ़िल्मी सितारों की पहुंच भी बढ़ी है. पहले अभिनेता को जैसे ही किरदार मिलते थे और उनकी अधिकतर फ़िल्में उसी साल आ जाती थी. तीनो ख़ानों की फ़िल्में एक अंतराल में आती है जिससे लोगों में उन्हें देखने का उत्साह बरक़रार रहता है".

50 का होगा असर ?

फ़िल्म निर्देशक, लेखक और अभिनेता नीरज वोरा कहते है, "मैं आमिर ख़ान को कॉलेज के दिनों से जानता हूं. जब वो कॉलेज नाटको में बैक स्टेज काम करते थे तभी भी उन्हें कोई भी काम करने में किसी तरह की हिचक नहीं थी. आमिर शतरंज के माहिर खिलाड़ी है. आमिर जब तक 100 प्रतिशत अाश्वस्त नहीं हो जाते वो काम नहीं करते.

वो आगे कहते हैं, "वहीं सलमान ख़ान सही मायने में बड़े दिल वाले हैं, वो दोस्ती के लिए कुछ भी कर गुज़रने में विशवास रखते है और यही उनकी ख़ामी भी है."

अभिनेता अर्जुन रामपाल कहते हैं, "शाहरुख़ ख़ान बहुत मेहनती है और उनमें कमाल की ऊर्जा है. वो अपने लक्ष्य से टस से मस नहीं होते. "

शाहरुख़ ख़ान ख़ुद कहते हैं कि उनकी उम्र तो बढ़ रही है पर वो दिमाग़ी तौर से और जवान होते जा रहे है और उनकी फुर्ती में कोई कमी नहीं आई है.

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