धार्मिक ग्रंथों में समलैंगिकता है तो...

  • 4 अप्रैल 2015
रेवती और कल्कि कोचलिन इमेज कॉपीरइट MARGARITA WITH A STRAW

सेंसर बोर्ड की सख़्ती से निर्देशक, निर्माता और कलाकार भी परेशान हैं. दक्षिण की फ़िल्मों में काम कर रही अभिनेत्री रेवती ने भी अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है.

रेवती अपनी फ़िल्म ‘मार्गरिटा विद ए स्ट्रॉ’ के लिए इन दिनों मुंबई में हैं.

रेवती ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में बताया कि वो क्यों सेंसर बोर्ड से ख़फ़ा हैं?

'बचकाना हरक़त'

रेवती का कहना है कि सेंसर बोर्ड अभी एक बच्चे की तरह बर्ताव कर रहा हैं.

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उनका कहना है कि यह ऐसा ही है जैसे हम जब किसी बच्चे को बिजली का तार छूने से रोकते हैं. उसके बावजूद बच्चा वही काम करता है, जिसके लिए हम उसे मना करते हैं.

रेवती कहती हैं, "कुछ ऐसा ही हाल सेंसर बोर्ड का भी है, ये मत करो, वो मत करो. इतनी रोक-टोक. सेंसर बोर्ड को ये समझना होगा कि अगर कोई दृश्य या डायलॉग समाज को नुकसान पहुँचा रहे हैं तो उसे सेंसर करना चाहिए. ना की किसी और चीज़ को."

उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट ने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया हैं. इसलिए सेंसर बोर्ड को 'कपटी नहीं, सच्चा होना चाहिए.'

समलैंगिकता का विरोध क्यों?

मार्गरिटा विद स्ट्रॉ में समलैंगिक रिश्तों को दिखाया गया है.

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क्या इस पर भी कुछ लोग फ़िल्म का विरोध कर सकते हैं, रेवती कहती हैं, “रामायण, महाभारत से लेकर तमाम धार्मिक ग्रंथों में लैंगिकता और समलैंगिकता का उल्लेख है. ये किताबें हम सभी के घरों में हैं, ऐसे में समझ में नहीं आता हमारी सोच ऐसी क्यों है.”

मार्गरिटा विद् स्ट्रॉ में रेवती के साथ अभिनेत्री कल्कि केकलां भी हैं. यह फ़िल्म 17 अप्रैल को रिलीज़ हो रही है.

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