फ़िल्म रिव्यू: इमरान हाशमी की 'मि.एक्स'

मि. एक्स इमेज कॉपीरइट Fox Star

फ़िल्म: मिस्टर एक्स

निर्देशक: विक्रम भट्ट

कलाकार: इमरान हाशमी, अमायरा दस्तूर, अरूणोदय सिंह

रेटिंग: *

हमने पहले भी ऐसी फिल्में देखी है जिसमें एच जी वेल्स के इनविज़िबल मैन की तरह फिल्म का मुख्य किरदार ग़ायब हो जाता है. याद है 2000 में आई 'द हॉलो मैन'?

आपके लिए इस तरह की फिल्में नई नहीं.

बेतुकी कहानी

इमेज कॉपीरइट Fox Star

लगता है कि फिल्म की हीरोइन भी काफ़ी फिल्म देखती हैं. उन्हें आदमी का ग़ायब होना इतना सहज और स्वाभाविक लगता है कि वो जब अपने मृत मंगेतर से मिलती हैं, जो कि पिछली रात ही गोडाउन उड़ने से मारे गए हैं तो उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होता कि वे जीवित कैसे हैं?

उन्हें ये भी अजीब नहीं लगता कि वो वापिस कैसे आए, और ग़ायब क्यों हैं?

उन्हें यह भी आश्चर्यचकित नहीं करता कि बुरी तरह से आग में झुलस कर मरने वाला आदमी कैसे पूरे शरीर के साथ ठीक-ठीक लौट आया है.

वह कभी-कभी सूरज की रोशनी के नीचे और नीली नीओन रोशनी में दिखता है फ़िर ग़ायब हो जाता है.

आपकी जानकारी के लिए यह जादू भगवान कृष्ण के द्वारा प्रायोजित है.

प्लॉट

इमेज कॉपीरइट Fox Star

हीरोइन जो एक काम करना चाहती है वह है अपनी पिस्तौल तान कर, अपने बॉयफ्रेंड को गिरफ्तार करना, क्योंकि उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री को मारने की कोशिश की है.

ग़ायब हीरो की तरह ही हीरोइन भी मुम्बई के ही आंतकवाद-निरोधी विभाग में काम करती है. उसके पिता भी यहीं पर काम करते थे.

हीरोइन के पिता को फर्जी मुठभेड़ मामले में गिरफ्तार किया गया था.

बेकार होमवर्क

इमेज कॉपीरइट Fox Star

मैं जान सकता हूं कि फिल्म बनाने वाले पुलिस के ख़ास दस्ते को आंतकवाद-निरोधी विभाग कहते हैं जबकि विभाग का नाम है आंतकवाद-निरोधी दस्ता.

पुलिस को इस तरह ग़लत तरीके से दिखाने के लिए शायद मुंबई पुलिस उन पर मुकदमा कर देगी.

आतंकवाद-निरोधी विभाग के बॉस अरुणोदय सिंह और उनके सहयोगी मुख्यमंत्री को मारने की योजना बनाते हैं. वो सरकार के लिए एक बड़ा ख़तरा हैं.

ग़ायब हीरो मिस्टर एक्स यानि कि इमरान हाशमी पर ज़िम्मेदारी है कि वे इस हत्या को अंजाम दें.

बेसिर-पैर की कहानी

इमेज कॉपीरइट Fox Star

बेसर-पैर की इस चूहा-बिल्ली दौड़ में खोई यह पूरी फिल्म मिस्टर एक्स और उनकी गर्लफ्रेंड के इर्द-गिर्द भागती है.

हीरोइन बताना चाहती है कि वह एक अच्छी पुलिस अफ़सर है.

कम बजट

यह महेश/मुकेश भट्ट प्रोडक्शन की फिल्म है. फिल्म की शैली को देखते हुए लगता है कि यह कम बजट में बनाई गई है.

इमेज कॉपीरइट dharma productions

इस बैनर के तले इमरान हाशमी वापस लौट रहे हैं.

महेश भट्ट के पिता नानाभाई भट्ट किसी ज़माने में मिथकीय और रोमांचक फिल्में बनाया करते थे. 1957 में रिलीज़ हुई मिस्टर एक्स उन्हीं में से एक थी.

3डी में क्यों

मुझे नहीं पता यह फिल्म 3डी में क्यों बनाई गई, क्योंकि इसका फिल्म से कोई सरोकार है ही नहीं. पर हमें पता है कि एक ग़ायब हो जाने वाले आदमी की कहानी मज़ेदार हो सकती है.

इमेज कॉपीरइट Fox Star

इस तरह की कुछ फिल्मों में अस्सी के दशक की बनी शेखर क़पूर की 'मिस्टर इंडिया' आज भी काफ़ी लोगों को याद है.

पर इसका क्लाइमैक्स बढ़िया लगता है.

पर आपको इसके लिए आख़िर तक फिल्म देखनी होगी. मुझे पहले आधे घंटे कि भीतर ही थिएटर से ग़ायब होने की इच्छा सताने लगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार