'तेरा क्या है जाता, जो मैं दम लगाता'

डोपाडेलिक्ज़

मुंबई का एक म्यूज़िक बैंड स्वास्थ्य के लिए गांजे से प्रतिबंध हटाने की भूमिगत कोशिशें कर रहा है.

भारत में गांजा क़ानूनन एक वर्जित पदार्थ है और धूम्रपान के लिए इसका उपयोग अपराध है.

पुलिस के डर से भूमिगत रहने वाले बैंड डोपाडेलिक्ज़ के सदस्य 'गांजा क्रांति' के सपने को पूरा होता देखना चाहते हैं.

Image caption टोनी का कहना है कि गांजे ने ही उन्हें अवसाद से बाहर निकाला है.

धारावी के एक लैबर कैंप में रहने वाले इस बैंड के लीड सिंगर टोनी कहते हैं, "बारहवीं में फेल होने के बाद गांजे ने ही मेरा डिप्रेशन दूर किया था."

गांजे की तारीफ़ में टोनी कहते हैं, "शराब पीने वाले लोग छेड़छाड़ करते हैं, दंगा करते हैं लेकिन गांजा पीने वाले लोग खुद में मस्त रहते हैं. बैन तो दूसरे नशों पर लगना चाहिए जो हमे उकसाते हैं, गांजा तो हमे शांत करता है."

वे गांजे के समर्थन में गुनगुनाते हैं, "हम तो हैं फूंकते, कभी नहीं चूकते ....तेरा क्या है जाता, जो मैं दम लगाता."

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

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अमरीका से भारत में आकर प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर युवनीश बताते हैं, "गांजे के ज्यादा इस्तेमाल से आपकी इंद्रियां काम करना बंद कर सकती हैं, आपकी हृद्यगति रूक सकती है, आपकी याददाश्त जा सकती है यहां तक कि ये आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर डाल सकता है."

वो आगे कहते हैं, "कुछ दिल और क़फ़ के मरीज़ों को डॉक्टर ब्रांडी पीने की सलाह देते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो सभी के लिए उपयोगी है. गांजा भी मेडिकल साइंस में एक ऐनेस्थेटिक एजेंट का काम करता है लेकिन इसका कुछ और उपयोग हानिकारक ही होगा."

लोगों को परेशानी

माटूंगा लेबर कैंप में एक पेड़ के नीचे इस बैंड ने गांजा पीने का अड्डा बनाया था लेकिन अब यहाँ शराबी और सिगरेट पीने वाले ही ज़्यादा दिखते हैं.

इलाक़े के लोग यहाँ के माहौल से परेशान हैं और इन्हें नशेड़ी ही मानते हैं, कलाकार नहीं.

धारावी में रहने वाले विनोद डी कांबले को संगीत से कोई परेशानी नहीं है, वे कहते हैं, "ये अच्छी बात है कि ये लोग कुछ अलग करना चाह रहे हैं लेकिन गांजे से इनको दूरी बनानी चाहिए."

धारावी रेजिडेंट्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी ई. शेखरन कहते हैं, "हम चाहेंगे कि ये बच्चे आगे बढ़ें, लेकिन अगर यही हाल रहा तो हम इन्हें रोक भी सकते हैं क्योंकि गांजा है तो ख़राब ही."

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