टीवी पर फिर से दहशत की दस्तक

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दर्शकों को पहले ही डरा चुके 'आहट' और 'फ़ीयर फ़ाइल्स' जैसे टीवी शो फिर से छोटे पर्दे पर वापसी कर रहे हैं.

लगता है कि टीवी पर हॉरर शो का ज़माना फिर से वापस लौट रहा है.

हालांकि समय के साथ-साथ ये शो तकनीक़ी रूप से उन्नत हुए हैं और पुराने धारावाहिकों की तुलना में इनका स्वरूप भी काफ़ी बदल गया है.

बीबीसी हिंदी ने नज़र डाली बीते दो दशकों के पांच ऐसे ही हॉरर धारावाहिकों पर जिन्होनें छोटे पर्दे पर काफ़ी सफलता मिली.

ज़ी हॉरर शो

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90 के दशक में शुरू हुए इस शो को बनाया था बॉलीवुड के 'हॉरर गुरु' रामसे ब्रदर्स ने.

1993 से शुरू हुए इस शो का सफ़र 1997 तक चला. इस शो का टाइटल साउंड ट्रैक भी काफ़ी लोकप्रिय हुआ था.

विश्लेषक इस शो की लोकप्रियता के पीछे किसी अन्य धारावाहिक से कोई प्रतिस्पर्धा न होना भी एक बड़ी वजह मानते हैं.

कई लोकप्रिय धारावाहिकों को प्रस्तुत करने वाला दूरदर्शन अंधविश्वास या भूत प्रेत संबंधी कार्यक्रम का प्रसारण नहीं करता था.

इस शो के साथ ही ख़ौफ़ ने टीवी पर दस्तक दे दी थी. बहुत जल्द ही छोटे पर्दे पर हॉरर की नई 'आहट' सुनाई दी.

आहट

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यूं तो 'आहट' के कई संस्करण आए हैं लेकिन 1994 में आया पहला संस्करण इसके सबसे डरावने संस्करणों में गिना जाता है.

कहा जाता है कि इस धारावाहिक से लोग इतना डर गए थे कि इसके निर्माता सोनी टीवी को लोगों ने चिट्ठियां लिख कर कहा था कि इसे रात नहीं दिन के समय प्रसारित किया जाए क्योंकि आहट देखने के बाद उन्हें सोने में कठिनाई होती है.

ये पहला भूतहा नाटक था जिसमें कंप्यूटर ग्राफ़िक्स का इस्तेमाल किया गया था. इस धारावाहिक ने शुरू होने के दो साल में ही ज़ी हॉरर शो को नंबर एक की कुर्सी से उतार दिया था.

ज़ी हॉरर शो के टाइटल साउंड ट्रैक की तरह आहट का शीर्षक साउंड ट्रैक भी काफी सराहा गया था.

श्श्श्श्श् कोई है

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90 के दशक में स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले इस धारावाहिक कि ख़ासियत ये थी कि इसमें दर्शकों की कई चिट्ठियों के बाद एक हीरो डाला गया था.

'स्टार प्लस' पर उस समय तक पारिवारिक कहानियों वाले धारावाहिक हावी नहीं थे, ऐसे में 'श्श्श्श् कोई है' ने काफ़ी लोकप्रियता हासिल की. इस शो की ख़ास बात थी कि इसमें आने वाले भूत एपिसोड के अंत में मरते नहीं थे.

एक सीज़न तक बिना किसी लीड के चलने के बाद इस धारावाहिक में एक्टर ममिक सिंह 'विकराल' के किरदार में आए जो भूतों को पकड़ते थे.

विकराल हालीवुड के वेन हेलसिंग किरदार की नकल था. हालांकि इस धारावाहिक को मिली शुरुआती लोकप्रियता ज़्यादा समय तक नहीं बनी रह पाई.

वोह

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लगान और स्वदेश जैसी फ़िल्मों के चर्चित निर्देशक आशुतोष गोवारिकर जब बहुत प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक नहीं थे तब उनके निर्देशन और अभिनय से सजे इस धारावाहिक 'वोह' को काफ़ी लोकप्रियता मिली थी.

'वोह' कहानी थी एक ऐसे गुड्डे की जो दिखता जोकर की तरह था लेकिन उसमें एक बुरी आत्मा समाई हुई थी.

इस कहानी पर आरोप लगा था कि ये मराठी फ़िल्म 'ज़ापटलेला' से चुराई गई थी. ज़ापटलेला वही फ़िल्म है जिसमें एक गुड्डे में किरदार तांत्या विच्चू की आत्मा आ जाती है और उस गुड्डे का प्रिय डॉयलॉग होता है 'ओम फट स्वाहा'.

वोह केवल कुछ ही एपिसोड चल पाया था और फिर ज़ी के अगले लोकप्रिय धारावाहिक एक्स ज़ोन ने इसकी जगह ले ली थी.

एक्स ज़ोन

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'आहट' से सीख लेते हुए ज़ी टीवी ने भी फ़ैसला किया था कि वो अब कंप्यूटर ग्राफ़िक्स की मदद से भूतहा धारावाहिक बनाएगा और नतीजा था एक्स ज़ोन.

एक्स ज़ोन के मुख्य लेखक और निर्देशक वही थे जिन्होनें ज़ी टीवी के लोकप्रिय शो ज़ी हॉरर शो का निर्माण किया था लेकिन इस टीम में कुछ एनिमेशन से जुड़े एक्सपर्ट भी शामिल हुए.

इस धारावाहिक में छोटी छोटी कहानियाँ दिखाई जाती थी और हर कहानी में कोई न कोई फ़िल्म कलाकार दिखाई देता था. इस धारावाहिक की विभिन्न कहानियों में आशुतोष राणा, केके मेनन, मुकेश खन्ना और रज़ा मुराद जैसे कलाकार नज़र आए थे.

इन पांच धारावाहिकों के अलावा 'अचानक 37 साल बाद', 'मानो या न मानो', 'गर्ल्स नाईट आउट' और अनहोनी जैसे धारावाहिकों ने भी अपनी पहचान बनाई लेकिन टीआरपी चार्ट में ये पाँचों ही टॉप में जगह बना सके.

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