मुंबई में पानी के रास्ते कब होगी यात्रा संभव

  • 1 मई 2015
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मुंबई में परिवहन का सारा दारोमदार लोकल ट्रेनों और सड़क मार्ग पर है. सुबह शाम के व्यस्त समय में तो ट्रैफ़िक का हाल बहुत बुरा हो जाता है.

लाख कोशिशों के बावजूद जाम और बढ़ती भीड़ से छुटकारा नहीं मिलता दिखता.

लेकिन रेल और सड़क मार्ग के अलावा मुंबई के पास समंदर का भी एक रास्ता है, जिसे यातायात के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

लेकिन जलमार्ग जैसा बड़ा साधन होने के बावजूद यहां जल यातायात की इतनी कमी क्यों है, एक नज़र डाली बीबीसी ने.

समुद्र का रास्ता

मुंबई वैसे तो अरब सागर के तट पर बसा हुआ है, लेकिन अभी भी यहां समंदर के रास्ते सार्वजनिक यातायात की सेवा शुरू नहीं हो पाई है.

मुंबई मैरीटाइम बोर्ड के अधिकारी बताते हैं, "मुंबई में समंदर से यातायात करने में सबसे बड़ी दुविधा मानसून के मौसम में आएगी."

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इसके अलावा कई तकनीकी अड़चनें हैं जिन पर सरकार अभी भी काम कर रही है, जैसे समुद्र कि गहराई, जल प्रदूषण और यात्रियों की सुरक्षा.

लेकिन लगता नहीं है कि आने वाले निकट समय में मुंबई की जनता इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेगी.

लोगों की राय

मुंबई के रहने वाले राजेश बताते हैं कि "अगर सरकार समुद्र के रास्ते मुंबई के दो किनारों को जोड़ दें तो इससे अच्छी सुविधा कोई और हो ही नहीं सकती."

भूषण जो रोज़ मुंबई के उत्तर से दक्षिण की ओर सफ़र करते हैं, कहते हैं, "फ़ेरी से सफ़र मैं तभी करना उचित समझूंगा जब मुझे वह किफ़ायती और सुरक्षित लगेगी. मैं ट्रेन से सफर करना ज़्यादा ठीक समझूंगा क्योंकि ट्रेन हर 5 से 10 मिनट में उपलब्ध हो जाती हैं."

फिलहाल मुंबई लोकल ट्रेनें यातायात के लिए सबसे सस्ता साधन है.

कहां है ऐसी सुविधा?

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हाल ही में मुंबई से उरण के लिए यात्री बोट की सुविधा शुरू हुई है जिसमें दो घंटे का लंबा सफ़र महज़ आधे घंटे में ही पूरा किया जा सकता है.

आरएन शिपिंग के राजेश कोली बताते हैं, "सरकार से उन्हें ये सुझाव काफ़ी पहले आ चुका था कि वे मुंबई से उरण के लिए फेरी की सर्विस शुरू करें, लेकिन बिना सुरक्षा व्यवस्था की पुष्टि किए हम इससे शुरू करना नहीं चाहते थे."

राजेश बताते हैं कि फ़ेरी और बड़ी नावों को सतह पर टिकने के लिए गहरे पानी की ज़रूरत होती है, जोकि जुहू और बैंड स्टैंड जैसे समुद्र से जुड़े इलाक़ों में उपलब्ध नहीं है.

ऐसी तकनीकी सुविधा बहाल करने के लिए मूलभूत सुविधाओं का निर्माण करने की ज़रूरत होगी, जिसकी शुरुआत भी अभी तक सरकार ने नहीं की है.

सुरक्षा

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मुंबई मे हुए 26/11 आतंकी हमलों को कोई भुला नहीं सका है, ज़हां हमलावर समुद्र के रास्ते मुंबई में दाख़िल हुए थे.

मुंबई पुलिस के लिए तभी से समंदर से हर आने जाने वाले पर निगरानी रखना एक बड़ी ज़िम्मेदारी हो गई है.

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