अपने इलाके के 'हीरो', पर बॉलीवुड में..

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बॉलीवुड से क्षेत्रीय फ़िल्मों में कई अभिनेताओं का आना-जाना लगा रहता है.

अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, धर्मेन्द्र से लेकर रितेश देशमुख, विवेक ओबेरॉय सभी ने क्षेत्रीय फ़िल्मो़ं के पर्दे पर अपना जादू बिखेरा है.

लेकिन ऐसे कई क्षेत्रीय अभिनेता भी हैं, जिन्होंने क्षेत्रीय फ़िल्मों में कमाल दिखाने के बाद बॉलीवुड में भी ख़्याति पाई हैं.

हालांकि बॉलिवुड में लीड रोल पाना अब भी इनके लिए एक सपना ही है.

रवि किशन

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भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार रवि किशन ने रियलिटी शो 'बिग बॉस' में जाकर पूरे भारत में काफ़ी लोकप्रियता बटोरी और फिर इस शो के बल पर बॉलीवुड की अपनी पारी शुरू की.

लेकिन भोजपुर इलाक़े के इस सुपरस्टार को बॉलीवुड में सह अभिनेता के तौर पर ही रखा गया

भोजपुरी सिनेमा में रिकॉर्डतोड़ कमाई करने वाली फ़िल्म 'पंडित जी बताई ब्याह कब होई' के हीरो रवि तेरे नाम, वेल डन अब्बा, वेलकम टू सज्जनपुर, एजेंट विनोद जैसी फ़िल्मो में छोटे मोटे किरदार निभाते नज़र आए. यहां तक कि तनु वेड्स मनु में तो वो सह अभिनेता के भी सहयोगी के किरदार में नज़र आए थे.

रवि किशन कहते हैं "मुझे ख़ुशी है कि मैं भोजपुरी सिनेमा से आया हूँ और बॉलीवुड में श्याम बेनेगल, मणि रत्नम जैसे निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिला."

प्रकाश राज

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दक्षिण भारतीय फ़िल्मों से अपनी शुरुआत करने वाले प्रकाश राज अब बॉलीवुड के जाने माने विलेन हैं.

करीबन 200 से ज्यादा क्षेत्रीय फ़िल्मों में काम कर चुके प्रकाश राज ने सलमान खान की फ़िल्म 'वॉन्टेड' में विलेन के किरदार निभाया और उसके बाद विलेन के तौर पर प्रकाश राज की जगह हिंदी सिनेमा में तय हो गई.

फिर उन्होंने विलेन के तौर पर सिंघम, दबंग 2, हीरोपंती, इट्स एंटरटेनमेंट और बॉडीगॉर्ड जैसी फ़िल्में की हैं वहीं भाग मिल्खा भाग में वो एक पॉज़िटिव किरदार निभा चुके हैं.

लेकिन किसी बॉलिवुड फ़िल्म में एक गंभीर व्यक्तित्व वाले लीड किरदार को निभाना अब भी प्रकाश के लिए सपना ही है.

अतुल कुलकर्णी

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मराठी फ़िल्म इंडस्ट्री के जाने माने नाम अतुल कुलकर्णी ने अपनी पहली हिंदी फ़िल्म 'हे राम' में ही सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता का नेशनल अवॉर्ड जीता था.

लेकिन यह अवॉर्ड ही शायद उनके लिए टाईप बन गया क्योंकि इसके बाद अतुल को सह कलाकार के किरदारों लिए ही बुलाया जाने लगा.

दो बार राष्ट्रीय पुरूस्कार विजेता अतुल कलकर्णी ने अब अपना रुख क्षेत्रीय फ़िल्मों की तरफ ही कर लिया है और वो गिनी चुनी हिंदी फ़िल्मे ही करते हैं.

उनकी सफल हिंदी फ़िल्मो में शुमार हैं चांदनी बार, रंग दे बसंती, पेज 3, दम और खाकी.

आदिल हुसैन

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असमिया फ़िल्मों से शुरुआत करने वाले अभिनेता आदिल हुसैन ने बॉलीवुड में विशाल भरद्वाज की फ़िल्म 'इश्किया' से लोगों का ध्यान खींचा.

दिल्ली के इस कलाकार को पहले बॉलिवुड में काम नहीं मिला था.

आदिल बताते हैं,"इश्किया के लिए जब अभिषेक चौबे ने मुझे ऑडिशन करने के लिए मुंबई बुलाया तो मैंने उन्हें साफ़ कर दिया था कि मेरे पास आने के लिए पैसे नहीं हैं. अभिषेक को मेरे काम के बारे में पता था इसलिए वो मुझसे मिलने दिल्ली आ गए वरना आप शायद आज किसी और को देखते इस फ़िल्म में."

वैसे अपने छोटे से करियर में आदिल हुसैन ने हॉलीवुड में भी काम किया है और दो फ़िल्मों 'द रिलक्टेंट फंडामेंटलिस्टट' और 'लाइफ़ ऑफ़ पाई' में छोटा किरदार निभाया है.

आदिल के यादगार रोल में 'इंग्लिश विंग्लिश' और हाल ही में आई फ़िल्म 'ज़ेड पल्स' शामिल की जा सकती है जिसमें वो लीड रोल में भी नज़र आए.

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