'दिल धड़कने दो': दिल धड़केगा या नहीं

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फ़िल्म: दिल धड़कने दो

निर्देशक: ज़ोया अख़्तर

कलाकार: अनिल कपूर, रणवीर सिंह, प्रियंका चोपड़ा

रेटिंग: ***

मेरी नज़र में ज़ोया अख़्तर की फ़िल्म ये कहना चाहती है कि प्यार से अलग, शादी ( जो बहुत बार समझौता या थोपी गई चीज़ होती है) स्वाभाविक रूप से ही एक डिसफंक्शल संस्था है और ये बात ज़्यादातर परिवारों में झलकती है.

फ़िल्म की यही बात मुझे सबसे ज़्यादा पसंद आई.

तो क्या फ़िल्म आपको शादी के विकल्प बताने की कोशिश करती है या फिर आपको सोचने पर मजबूर करती है कि आपने जिस जीवनसाथी को चुना वो फ़ैसला सही है या ग़लत?

मैं बता दूं कि फ़िल्म ऐसी कोई कोशिश नहीं करती. ये हल्की फुल्की फ़िल्म है जो इतनी गंभीर होती ही नहीं.

लेकिन हां, ये आपको जीवन की कुछ कड़वी सच्चाइयों से ज़रूर रूबरू कराती है.

'जुड़ाव महसूस करेंगे'

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फ़िल्म के मेहरा परिवार को देखकर आपको अपना या अपने दोस्तों का परिवार ज़रूर याद आएगा और इसके पात्रों से आप अपने आपको जुड़ा हुआ महसूस करेंगे.

मेहरा परिवार के रईस मुखिया की भूमिका अनिल कपूर ने निभाई है. संभवत: उन्होंने अपने फ़िल्मी जीवन में पहली बार वयस्क बच्चों के पिता की भूमिका निभाई है.

वैसे मेहरा साब बड़े मिलनसार हैं लेकिन उनको देखकर लगता है कि उन्होंने बड़े दुख और तकलीफ़ों से गुज़रकर पैसा कमाया है.

मेहरा साब हाई क्लास सोसायटी से घिरे रहते हैं. उनके चारों तरफ़ अमीर दोस्तों और रिश्तेदारों का जमावड़ा लगा रहता है.

कुछ लोग अमीरों के इन तौर तरीकों को उनका दोगलापन कह सकते हैं तो कुछ लोग उनके इस बरताव को मैनर का नाम दे सकते हैं.

ये निर्भर करता है कि आपका नज़रिया क्या है.

बेहतरीन रणवीर

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मेहरा परिवार कितना अमीर है इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि मेहरा जी के बेटे की सबसे बड़ी चिंता है कि फ़ैमिली बिज़नेस में आई मंदी की वजह से उसे अपना प्राइवेट जेट बेचना पड़ सकता है.

दिल्ली के कई रईस पंजाबी परिवारों में आपको मेहरा जी के बेटे सरीखे तमाम युवा मिल जाएंगे. लेकिन कम से कम मैं तो ऐसे किसी रईस युवा से नहीं मिला जिसके पास एक प्राइवेट जेट हो.

रणवीर सिंह खिलंदड़े, बिगड़ैल, बेपरवाह रईसज़ादे बने हैं और अपने किरदार में ज़बरदस्त फ़िट हैं.

रणवीर, मुंबई में रहते हैं और उनकी मां (ज़बरदस्त शेफ़ाली शाह) उन्हें पूरे नाज़ो नखरों से पालती हैं.

रणवीर की बहन (प्रियंका चोपड़ा) शादीशुदा हैं और दिल्ली में रहती हैैं. उनका पति एक दमघोंटू, नीरस (राहुल बोस) इंसान है.

कहानी

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मेहरा दंपति की 30वीं सालगिरह मनाने पूरा परिवार और क़रीबी दोस्त एक क्रूज़ पर सवार होकर ख़ूबसूरत जगहों की सैर पर निकल पड़ते हैं.

लगभग पूरी फ़िल्म ही क्रूज़ और समुद्र के नज़ारों के बीच फिल्माई गई है.

लगता है निर्देशक साहिबा पूरी तरह से आश्वस्त थीं कि दर्शक लगातार समुद्र को देखते रहने के बावजूद बोर नहीं होंगे.

हॉलीवुड की बेहद कामयाब फ़िल्म टाइटैनिक में एक बेहद अमीर लड़की को एक ग़रीब लड़के से प्यार हो जाता है.

इस फ़िल्म में इसका ठीक उल्टा होता है.

अमीर लड़के (रणवीर सिंह) को एक साधारण लड़की (अनुष्का शर्मा) से इश्क़ हो जाता है.

अच्छा अभिनय

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लंबे समय बाद मैंने इतनी बड़ी मल्टी स्टारर फ़िल्म देखी.

फ़िल्म अच्छी बन पड़ने की एक बड़ी वजह कलाकारों का अभिनय है.

सभी सितारों को देखकर लगता है कि वो निर्देशक ज़ोया अख़्तर को बहुत अच्छी तरह से जानते और समझते हैं.

ज़ोया इसी वजह से इन सभी से बढ़िया काम ले पाई हैं.

ज़ोया की पिछली फ़िल्म 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' भी मुझे ख़ासी पसंद आई थी.

उसकी तुलना में ये फ़िल्म थोड़ी सी गंभीर है और रिश्तों और ज़िंदगी की कई हक़ीकत का ख़ूबसूरती से विश्लेषण करती है.

फ़िल्म देखने के बाद आप अपने यार दोस्तों के साथ, अपनी जीवन साथी के साथ चर्चा करने पर ज़रूर मजबूर हो जाएंगे.

जब ये टीवी पर आएगी तब एक बार फिर मैं इसे देखूंगा और आपको सलाह दूंगा कि आप भी सिनेमा हॉल जाकर इसे देखें.

कम से कम एक बार तो ज़रूर.

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